जून १८, २०१९
मंगलवार, १८ जूनको संसद सत्रके दूसरे दिन लोकसभामें उस समय विरोध तीव्र हो गया, जब सपाके सांसद शफीकुर्रहमान बर्कने शपथ लेनेके पश्चात वंदे मातरमको इस्लामके विरुद्घ बताते हुए ऐसे उद्घोष न करनेकी बात कही ।
उर्दूमें शपथ लेनेके पश्चात बर्कने कहा कि भारतका संविधान जिंदाबाद; परन्तु जहांतक वंदे मातरमका प्रश्न है, यह इस्लामके विरुद्घ है और वो इसका पालन नहीं कर सकते हैं । सांसदके यह कहते ही सदनमें और जोर-जोरसे वंदे मातरमका उद्घोष होने लगा ।
शफीकुर्रहमान बर्कके इस वक्तव्यपर भाजपा सांसद और संघ विचारक राकेश सिन्हाने कहा कि शफीकुर्रहमान बर्ककी मानसिकता स्वतन्त्रतासे पूर्व मुस्लिम लीग वाली है । इनके जैसे लोगोंके लिए देशमें स्थान नहीं है ।
गौरतलब है कि, शफीकुर्रहमान बर्क पहले भी वंदे मातरमका विरोध कर चुके हैं । २०१३ में बीएसपी सांसद रहते हुए उन्होंने वंदे मातरमका बहिष्कार करनेके लिए संसदसे वॉकआउट किया था ।
“बाबर और अकबर जैसे आक्रान्ताओंकी पूजा करनेवाले कृतघ्न धर्मान्ध जिस मातृभूमिपर रह रहे हैं, जहांका खा रहे हैं, उसीके विरुद्ध विष उगल रहे हैं । ऐसे कृतघ्न जिहादी भारतके योग्य नहीं हैं । भारत शासन इन्हें इनके वास्तविक स्थान किसी जिहादी देशमें भेजें ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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