जून १८, २०१९
भारत जनसंख्याके प्रकरणमें विश्वमें चीनके पश्चात दूसरे स्थानपर है । संयुक्त राष्ट्रमें अर्थव्यवस्था और सामाजिक प्रकरणके विभागने (यूएन-डीईएसए) सोमवारको एक ब्यौरा जारी किया । इसके अनुसार, २०२७ तक भारतकी जनसंख्या चीनसे अधिक हो जाएगी । वर्तमानमें भारतकी जनसंख्या लगभग १.३६ अरब और चीनकी १.४२ अरब है । संभावना प्रकट की गई है कि २०२५ तक भारत १६४ कोटि जनसंख्याके साथ उच्चपर पहुंच जाएगा ।
ब्यौरेमें कहा गया है कि २१वीं शताब्दीके अंततक विश्वकी जनसंख्या सबसे अधिक लगभग ११ अरबतक पहुंच जाएगी । २०५० तक विश्वकी कुल जनसंख्याकी आधी जनसंख्या केवल ९ देशोंमें होगी । इनमें भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, कांगो, इथियोपिया, तंजानिया, इंडोनेशिया, मिस्र और अमेरिका सम्मिलित हैं । इन देशोंको सम्भावित जनसंख्या वृद्धिके घटते क्रममें रखा गया है ।
संयुक्त राष्ट्रके अध्ययनके अनुसार, अगले ३० वर्षोंमें विश्वकी जनसंख्या लगभग २ अरब बढकर ९.७ अरब होनेकी संभावना है । वर्तमानमें विश्वकी जनसंख्या ७.७ अरब है । शताब्दीके अंततक यह अपने चरमपर लगभग १०.९ अरब होगी ।
संयुक्त राष्ट्र विभागके संचालक जॉन विल्मोथने सोमवारको प्रेस वार्तामें कहा कि ताजा अध्ययनमें पाया गया कि विश्वकी जनसंख्या तीव्रतासे बढ रही है । गत ६९ वर्षमें विश्वकी जनसंख्या तीन गुणा बढी है । जॉनने कहा कि ब्यौरेसे हटकर हमारा अनुमान है कि २०५० तक विश्वकी जनसंख्या १०.१ अरब और २१०० के अंततक १२.७ अरब हो सकती है ।
अगले ३० वर्षमें भारतकी जनसंख्यामें २७.३ कोटिकी वृद्धि हो सकती है । इस हिसाबसे २०५० तक भारतकी कुल जनसंख्या १६४ कोटि होनेका अनुमान है । इस शताब्दीके अंततक भारतकी १.५ अरब, चीनकी १.१ अरब, नाइजीरियाकी ७३.३ कोटि, अमेरिकाकी ४३.४ कोटि और पाककी ४०.३ कोटि जनसंख्या हो जाएगी ।
“यदि भारत शासनने त्वरित इस स्थितिको परिवर्तित नहीं किया तो यह स्थिति अनियन्त्रित हो जाएगी और सबसे बुरी स्थिति यह है कि मुसलमानोंकी बढती जनसंख्या चिन्तनीय है । क्योंकि ऐसा होनेपर भारतकी स्थिति सीरिया जैसे हो जाएगी । भारत शासन समय रहते सम्भल जाएं, कहीं हमें सोचनेका अवसर भी न मिलें ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : भास्कर
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