जून १९, २०१९
गंगा मां हिंदू धर्मके लिए आस्थाका प्रतीक है । दूर-दूरसे लोग गंगामें आस्थाकी डुबकी लगाने आते हैं; परन्तु गत कई माहसे कुछ बाहरी लोगोंने गंगाजीको हुक्का बार औऱ मद्य सेवन करनेवाला बार समझ लिया है !! बाहरी राज्योंसे आए युवक मनोरंजनके लिए गंगा घाट औऱ गंगाके भीतर मदिरा पान और हुक्का पीते दाखते हैं; परन्तु पुलिस प्रशासन मौन है । ये प्रथम प्रकरण नहीं है, जब गंगाका अपमान किया गया है, वरन इससे पूर्व भी कई ऐसे प्रकरण हरिद्वारसे भी सामने आ चुके हैं; परन्तु शासन और पुलिस मौन धारण किए है ।
प्रायः ऐसे प्रकरणमें स्थानीय लोगोंद्वारा ही आवाज उठाई गई है; परन्तु पुलिस प्रशासन और शासनद्वारा गंगाको बचाने और स्वच्छ रखनेके लिए विशेष व्यवस्था नहीं की गए, जिससे लोग हताश हैं । लोगोंद्वारा लंबे समयसे गंगा घाटोंपर पुलिस तैनात करनेकी मांग की गई है, ताकि कोई गंगाको गंदा करनेका प्रयास या अपमानित करनेका दुस्साहस न करें; परन्तु पुलिस प्रशासन और शासन दोनों मौन हैं ।
लोगोंद्वारा आरोप लगाया गया है कि ऋषिकेशमें प्रशासनकी नाकके नीचे गंगाके साथ खिलवाड किया जा रहा है; परन्तु जब उनकेद्वारा ऐसे व्यक्तियोंको रोकनेका प्रयास किया गया तो उल्टा पुलिसद्वारा उनपर ही कार्यवाही करनेकी चेतावनी दी गई । स्थानीय युवकने पुलिसपर युवकोंसे पैसे लेकर उन्हें छोडनेका आरोप लगाया है ।
सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर (सोशल मीडियापर) ऋषिकेशके एक स्थानीय युवकद्वारा ऐसेपर कार्यवाही करनेकी मांग की गई है । एक युवकने बताया कि आजसे ५-७ दिन पूव ऋषिकेश त्रिवेणी घाटपर कुछ युवक मद्यपान कर हंगामा कर रहे है थे, उसने उनको रोकनेका प्रयास किया; परन्तु लगभग १०-१२ युवक उसके साथ हाथापाई और अपशब्द कहने लगे । वहीं इसके पश्चात इसकी परिवाद पुलिसको की गई, जिन्हें ऋषिकेश कोतवाली ले जाया गया; परन्तु वहांके अधिकारीने उल्टा परिवादकर्तापर (शिकायतकर्तापर) ही कार्यवाही करनेकी चेतावनी दी और कुछ ऐसे ही लोगोंको वहांसे भगा दिया गया !!
युवकने आरोप लगाया है कि मुझपर कार्यवाही करनेकी चेतावनी देकर मुझे वहां बैठा लिया गया और लगभग २.३० बजे तभी थोडे समय पश्चात उनकी बडी बहन वहां आई और उन्होंने इस सारी घटनाओंको अपनी आंखोंसे देखा था और अधिकारीको बताया, तब जाकर उसे छोडा गया ।
“धीरे-धीरे गंगा घाट बाहरी लोगोंके लिए बार और मनोरंजनका अड्डा बनता जा रहा है और शासन, पुलिस और लोग मूकदर्शक बने खडे हैं, यह लज्जाकी बात है । अभीतक तो धर्महीन हिन्दू लज्जाहीन होकर गंगामें खडे होकर ‘सेल्फी’ ही लेते थे; परन्तु अब तो मद्यशाला बना दिया है !! क्या हिन्दुओंके आस्थाके केन्द्रका यही मूल्य है । प्रधानमन्त्री त्वरित इन गुण्डोंपर कार्यवाहीकर कडा दण्ड दिलवाएं, तभी माना जाएगा कि वे सत्यमें शिव और गंगाके उपासक हैं; अन्यथा ये बातें भी केवल एक जूमला सिद्ध होंगीं और उस युवकको साधुवाद, जिसने भ्रष्ट व धर्महीन व्यवस्थाकी पोल खोली है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : खबर उत्तराखण्ड
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