पूर्व कालमें और आज भी, अनेक विवाहित स्त्रियां माथेसे टीका नहीं हटाती हैं और आजकी आधुनिक स्त्रियोंके माथेपर टीका लगानेको कहें तो ‘वह टिकती नहीं है’, वे ऐसा कहती हैं । जो टीका सहस्रों वर्षोंसे विवाहित स्त्रियोंके श्रृंगारका अविभाज्य अंग रहा है, वह आजकी आधुनिक कही जानेवाली स्त्रियोंके माथेपर क्यों नहीं टिकता है, इसपर उन्हें अवश्य ही विचार करना चाहिए ! टीका स्त्रीका एक आवश्यक सौभाग्य अलंकार है, इससे उसमें दैवी शक्ति कार्यरत रहती है, यह तथ्य ध्यानमें रखकर स्त्रियोंने टीका अवश्य ही लगाना चाहिए ।
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