जून २९, २०१९
बंगालके तृणमूल शासनने एक दिशा-निर्देश जारी किया है कि राज्य द्वारा संचालित जिन विद्यालयोंमें मुसलमान छात्रोंकी संख्या ७० प्रतिशतसे अधिक है, वहां उनके लिए पृथक भोजन कक्ष बनाया जाएगा । इसके लिए सभी विद्यालयोंसे ब्यौरा मांगा गया है ।
शासनके आदेशको पारित करनेके लिए बंगालके अल्पसंख्यक और मदरसा शिक्षा विभागने उन सभी शासकीय विद्यालयोंकी तुरन्त सूची मांगी है, जहां मुसलमान छात्रोंकी संख्या ७० प्रतिशतसे अधिक है ।
कूचबिहारके जिला अधिकारीद्वारा जारी किए गए निर्देशमें कहा गया है, ‘विशेष सचिवके १४/०६/२०१९ को लिखे पत्रके अनुसार बंगाल शासश आपसे आग्रह करता है कि आप उन शासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयोंके २८ जूनतक नाम भेजें, जहां अल्पसंख्यक छात्रोंकी संख्या ७० प्रतिशतसे अधिक है । विभाग इन विद्यालयोंमें मध्याह्न भोजके लिए पृथक भोजन कक्ष बनानेका प्रस्ताव देगा ।’
२८ जूनतक विद्यालयोंमें अल्पसंख्यक छात्रोंके प्रतिशतका उल्लेख करनेवाले आंकडोंके साथ राज्य-संचालित और राजकीय सहायता प्राप्त विद्यालयोंकी सूची संकलित करनेके लिए जिला शिक्षा अधिकारी और विद्यालयोंके जिला निरीक्षकको आदेश भेजा गया है ।
राज्यके इस पगपर आपत्ति प्रकट करते हुए बंगालके भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोषने कहा, “धर्मके आधारपर छात्रोंके मध्य यह भेदभाव क्यों ? क्या इस अलगावके पीछे कोई और बदनियति है ? क्या यह एक और षडयन्त्र है ?”
“७० प्रतिशतसे अधिक मुसलमान जनसंख्यावाले विद्यालयोंमें छात्र अलगसे भोजन करेंगें और फिर यही ममता बैनर्जी कहती हैं कि हम हिन्दू और मुसलमान सबके हितोंकी रक्षा करेंगें और लोकतन्त्रका पालन करेंगे । जबकि इनके इन कृत्योंसे इस्लामिक गन्ध आती है । इस्लामकी ओर बढते बंगालको अब हिन्दुओंको ही मिलकर रोकना होगा ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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