भाजपाके कुछ वरिष्ठ वयोवृद्ध नेता या पूर्व केंद्रीय मन्त्री, जो इस वर्ष चुनाव नहीं लडे थे, उन्होंने अपने शासकीय आवासको छोड दिया है इसलिए सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर लोग उनकी भूरी-भूरी प्रशंसा कर उन्हें महान होनेकी उपाधि तक दे रहे हैं | वस्तुत: यह तो अति सामान्य सी बात है; किन्तु इस देशमें उत्तरदायित्वहीन एवं स्वार्थीनेताओंकी संख्या इतनी अधिक है कि यह सामान्यसा नियम पालन भी उन्हें महान बना रहा है ! यदि भारतकी यही स्थिति रही तो एक दिवस ऐसे नेताओंको उनके इस ‘महती त्याग’के लिए तो भारतका उच्च नागरिक सम्मान न दे दिया जाए !
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