आजकल जब एलोपेथी चिकित्साके महाविद्यालयमें कुछ विद्यार्थियोंको स्नातकमें प्रवेश नहीं मिलता है तो वे आयुर्वेद चिकित्सा पद्धतिसे स्नातककी उपाधि ले लेते हैं जिसमें प्रतिस्पर्धा एलोपेथीकी तुलनामें अल्प प्रमाणमें होता है एवं आयुर्वेदसे स्नातक लेनेके पश्चात वे एलोपेथी चिकित्सासे रोगियोंका उपचार करते हैं ! ऐसे सभी वैद्योंको वस्तुत: आयुर्वेदका महत्त्व ही ठीकसे नहीं पढाया जाता है; अतः उनसे इसप्रकारकी चूक होती है । आयुर्वेद और एलोपेथमें आकाश और पातालका अन्तर है; किन्तु दुःख तब होता है जब इसका भेद चिकित्सकोंको ही ज्ञात नहीं होता है । मैंने यह अनेक बार अनुभव किया है ।
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