जुलाई २, २०१९
मेरठकी भांति आगरामें हुआ उपद्रव भी तबरेज अंसारीकी भीडद्वारा हत्याके विरुद्घ प्रदर्शनके पश्चात आरम्भ हुआ । आगराके मंटोलामें तबरेज अंसारीकी मॉब लिंचिंगकेविरुद्ध बलपूर्वक दुकानें बंद कराई जाने लगी और दुकानों में लूटपाट भी की गई, दुकानोंमें बोतलें फेंकी गईं ! इसके पश्चात दोनों पक्षोंकी ओरसे पथराव हुआ । यह सब सोमवार, १ जुलाईको तब आरम्भ हुआ, जब सैकडोंकी संख्यामें मुसलमान जामा मस्जिदके पास एकत्र हो गए !
उनकी योजना थी कि जामा मस्जिदसे समाहरणालयतक पैदल यात्रा निकाली जाए और फिर वहां पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियोंको ज्ञापन सौंपा जाए; परन्तु वरिष्ठ अधिकारियोंने जामा मस्जिद पहुंचकर ही भीडसे ज्ञापन ले लिया और उन्हें यात्रा न करनेका परामर्श दिया, जिससे मुसलमान भडक गए और प्रदर्शन करने लगे । पुलिसके रोकनेके पश्चात वे पैदल यात्राके लिए आगे बढ निकले । जब पुलिसने अवरोधक (बैरियर) लगाया तो वे दूसरे रास्तोंसे उपद्रव करते और बाजार बंद कराते चल रहे थे ।
जब दुकानदारोंने दुकान बंद करनेसे मना किया तो उनसे लूटपाट की गई । एक मिठाईकी दुकानमें भी उपद्रवियोंने लूटपाट की । व्यापारियोंद्वारा थानेमें अभियोग प्रविष्ट कराए गए हैं, जिसके आधारपर पुलिसने कुछ लोगोंको बन्दी बनाया है और ६०० लोगोंपर अभियोग प्रविष्ट किया गया है ।
“तरबेज अंसारी तो बहाना है, यह तो जिहादका विष है, जो काफिरोंको मालने और उनकी दुकानोंपर लूटपाट करनेपर उतरा है, साथ ही एकपक्षीय भाईचारेका परिणाम, जिसके भ्रममें हिन्दू अबतक जीता रहा है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
Leave a Reply