जुलाई ५, २०१९
उत्तरप्रदेशके अलीगढमें गुरुवार, ५ जुलाईको जाकिर और समीर नामक उन्मादियोंने ५५ वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति दिलशेरको उसीके घरमें घुसकर इसलिए पीटा; क्योंकि वह पूज्य सनातनी ग्रन्थ श्रीमद्भागवत गीता पढ रहा था ।
दिलशेरद्वारा पुलिसको दी गई परिवादके अनुसार, वह एक फैक्ट्रीमें रक्षकके (सेक्युरिटी गार्डके) रूपमें कार्यरत है । उसने आरोप लगाया है कि जब वह अपने कामसे घर वापास आया तो वह धार्मिक पुस्तक गीता अपने घरपर पढ रहा था । इस मध्य समीर, जाइक और कुछ अज्ञात लोग उसके घरमें घुस आए तथा उसके साथ मारपीट की । साथ ही उसके पाससे हिन्दू धर्मकी धार्मिक पुस्तकें भगवद गीता, रामायणको छीन लिया । दिलशेरने बताया कि वह इन पुस्तकोंको ३८ वर्षसे पढ रहा है तथा उसे इन धार्मिक पुस्तकोंको पढनेसे शांति मिलती है ।
पुलिसने आरोपियोंके विरुध्द भादंसंकी धारा २९८, ३२३, ४५२, ५०४, ५०६ के अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट कर लिया गया है ।
“असभ्य जिहादी, जो मौलवियोंसे सीखकर समाजमें उपद्रव व अशान्ति प्रसारित करते हैं, वे न तो स्वयं शान्तिसे बैठ सकते हैं और न ही अन्योंको बैठने देते हैं । कोई व्यक्ति अपने घरमें बैठकर गीता और रामायणका पाढ पढे तो इनकी धर्मान्धता, जिहादी मानसिकताको चोट पहुंचती है । ऐसे विषधर लोग हिन्दू समाजमें रहने योग्य नहीं है और हिन्दुओ ! कुछ सीखिए दिलशेर नामक मुसलमान व्यक्तिसे, जिसने मुसलमान होकर गीता और रामायणके छिपे मूलको जाना कि ३८ वर्षोंसे छोड ही नहीं पा रहा है और एक और हम धर्म त्याग चुके हिन्दू हैं, जो इन्हें हाथ ही नहीं लगा रहे हैं । यह लज्जाजनक है ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : सुदर्शन न्यूज
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