सन्त वाणी


जाग्रतकी अवस्था दीर्घ और स्वप्नकी क्षणिक होती है, इसके अतिरिक्त उनमें और कोई भेद नहीं है । जाग्रतमें जाग्रतकी घटनाएं जितनी सत्य दिखती हैं, उसीप्रकार स्वप्नमें स्वप्नकी घटनाएं उतनी ही वास्तविक लगती है । स्वप्नमें मन एक दूसरा शरीर धारण करता है । जाग्रत और स्वप्न दोनों ही अवस्थाओंके नाम, रूपके विचार क्रमशः आते रहते हैं – रमण महर्षि



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