अब सन्तोंका भी हो रहा है अंग्रेजीकरण ! अपने यहां आदर्श जीवनकी लाखों बातें रामायण, महाभारत, पुराण इत्यादिमें होते हुए भी कुछ सन्त उनके नियतकालिकोंमें पाश्चात्योंकी कथाएं प्रेमपूर्वक छापते हैं ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्थासाभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (http://sanatanprabhat.org)
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