१. राम मन्दिरपर निर्णय सुनाते हुए न्यायमूर्ति गोगोईने १९९१ के ‘पूजा स्थल विधान (कानून)’का उल्लेख किया, जिसके अनुसार १५ अगस्त १९४७ तक जिस पूजा स्थलकी जो भी स्थिति है, उसमें कोई धार्मिक परिवर्तनकी आज्ञा नहीं है; अतः इससे सम्बन्धित सभी अभियोग (मथुरा, काशी आदि) अब समाप्त माने जाएंगें ! उल्लेखनीय है कि प्रधानमन्त्री मोदीने भी अपने भाषणमें रामभक्तिसे ऊपर उठकर भारतभक्ति करनेको कहकर इसी ओर संकेत किया था ! वहीं संघ संचालकने कहा कि संघ आन्दोलन नहीं करता है एवं राम मन्दिरसे जुडना बस एक अपवाद था !
Leave a Reply