सन्त वाणी


ऐश्वर्यका भूषण सज्जनता, शूरताका मित-भाषण, ज्ञानका शांति, कुलका भूषण विनय, धनका उचित व्यय, तपका अक्रोध, समर्थका क्षमा और धर्मका भूषण निश्छलता है। यह तो सबका पृथक-पृथक हुआ; परंतु सबसे बढकर सबका भूषण शील है। – भतृहरि



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