सन्त वाणी


व्यक्तिकी धारणा (मान्यता) उसके वातावरणसे प्रभावित होती है; अतः उसे पवित्र व ज्ञानियोंकी ही संगति करनी चाहिए । अपने आत्मरूपमें विश्वास ही सच्ची धारणा है एवं अनात्माको आत्मरूप मानना ही अविश्वास है । – स्वामी रामकृष्ण परमहंस



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