चूक लिखनेकी इच्छा नहीं होती हो या कोई व्यसन हो, तो क्या करें !
एक जिज्ञासुको जब हमने नित्य चूकें लिखने हेतु बताया तो उन्होंने मुझसे बताया कि मुझमें बडे-बडे दोष हैं और उन्हें दूर करनेमें मैं असफल हो जाता हूं | प्रतिदिन सोचता हूं और प्रतिदिन पुनः अपनी आसक्तियोंके आवेशमें वही चूकें हो जाती है ! ऐसेमें छोटे दुर्गुण जैसे आलस्य, इर्ष्या इत्यादि दूर करनेकी इच्छा नहीं होती है ! सच पूछें तो मुझे चूक लिखनेकी इच्छा होती ही नहीं है !
ऐसे लोगोंने निम्न बातोंका ध्यान रखना चाहिए –
१. यदि आपको चूक लिखनेकी इच्छा नहीं होती है तो उसके लिए भी स्वयंसूचना इसप्रकार दें –
जब जब मुझे चूक लिखनेकी इच्छा नहीं होगी तब तब मुझे भान होगा कि चूकें ढूंढकर लिखनेसे अंतर्मुखतामें वृद्धि होती है एवं इससे दोष न्यून होनेकी प्रक्रिया आरम्भ होती है अतः मैं इसे प्रतिदिन लिखनेका प्रयास करुंगा/करुंगी |
२. यदि हमें कोई व्यसन है तो ध्यान रखें कि ९० % व्यसन अनिष्ट शक्तियोंका हमारे भीतर स्थान होनेके कारण ही होता है; इसलिए उस व्यसनसे मुक्त होने हेतु सबसे सरल उपाय है दोष निर्मूलन करते हुए सर्व आध्यात्मिक उपचार करना ! इससे अनिष्ट शक्तियोंके स्थान नष्ट होते हैं एवं हमारा व्यसन सदैवके लिए दूर हो जाता है !
३. दुर्गुण कभी भी छोटे या बडे नहीं होते हैं ! किन्तु यदि आपको कोई दुर्गुण छोटा लगता है तो उसे ही दूर करनेका प्रयास करें इस हेतु उस दुर्गुणसे सम्बन्धित चूकें लिखें उसमें सुधार हेतु स्वयंसूचना दें एवं उसकी प्रगतिको भी अंकित करें | जैसे ही एक दोष न्यून होंगे वैसे ही आपको दूसरे दोष दूर करने हेतु प्रोत्साहन मिलेगा और इसप्रकार आपने बडे दुर्गुण दूर करने हेतु भी प्रयत्न आरभ हो जाएंगे !
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