श्रीगुरु उवाच
कलियुगमें साधना करवाकर लेनेवाले गुरुका महत्त्व
पहलेके युगोंमें ऋषि-मुनियोंद्वारा केवल सैद्धान्तिक (तात्त्विक) जानकारी बतानेपर ही जिज्ञासु साधना आरम्भ करते थे । वर्तमान कलियुगमें बताई सैद्धान्तिक जानकारी सुनकर कोई साधना नहीं करता; इसलिए ‘साधना कैसे करें ?’, यह उन्हें सिखाना पडता है और उनसे साधना करवाकर लेनी पडती है; इसीलिए साधना करवाकर लेनेवाले गुरुका महत्त्व है । – *परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था*
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