उतिष्ठ कौन्तेय
उतिष्ठ कौन्तेय (१०/०४/२०२०)
१. अलीगढ जनपदके गांव कमलापुरमें ‘लॉकडाउन’के मध्य जिहादियोंने राशन लेने आए युवकको मारना आरम्भ कर दिया व उसके पश्चात उसके घर पहुंच पथराव किया, जिसके कारण युवकके परिवारके १२ लोग चोटिल हो गए ! विवादका कारण दो दिवस पूर्व राशन लेने हेतु जिहादीसे पंक्तिबद्ध होकर खडे होनेका आग्रह किया था । घटनाक्रमके मुख्य आरोपी क्षेत्रके प्रधान चमन खांके परिवारके ६ व्यक्तियोंको बन्दी बनाया गया है व १०० अज्ञात व्यक्तियोंके विरूद्ध अभियोग प्रविष्ट किया गया है ।
इन प्रकरणोंसे जिहादियोंको भयभीत बतानेवाले हिन्दुओंके नेत्र अवश्य खुल रहे होंगें, ऐसी आशा करते हैं !
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२. मलेशियाकी ‘इस्लाम ऑन द मूव’ नामक एक इस्लामी पुस्तकमें तबलीगियोंको, सबके सामने मल त्यागनेमें लज्जा नहीं करनेका उल्लेख किया गया है । जिहाद करते हुए उनकेद्वारा थूकने , छेडछाड करने तथा अन्य प्रकारकी असभ्य व्यवहार करना, ये सभी उनके इसी कथित धर्मशास्त्रकी देन हैं, जिसकी जानकारी कुमारी सोतीने भी दी है । साथ ही ‘कोरोना’ महामारीको एक षडयन्त्र बताते हुए उनके मुखिया मौलाना सादद्वारा शासनको शैतानके (असुरके) रुपमें बताते हुए दिखाया गया है !
शासनने अब इस जमातको प्रतिबन्धित करते हुए ऐसे धर्मान्धोंको सीधे कारवासमें भेजना चाहिए, अब यही एकमात्र उपाय है !
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३. महाराष्ट्रमें बढते ‘कोरोना’के रोगियोंकी संख्याको देख पूर्व मुख्यमन्त्री देवेन्द्र फडनवीसने तबलीगी जमातियोंके लोगोंको ‘मानव बम’ बताया है । उन्होंने एक वायरल वीडियोमें कहा है कि देहलीके मरकजमें सम्मिलित हुए लोग संक्रमित होकर मानव बमकी भांति समूचे देशमें घूम रहे हैं, इनको तुरन्त पकडकर ‘क्वारंटाइन’कर इनकी जांचकी जाए । उन्होंने महाराष्ट्र शासनपर यह आरोप भी लगाया कि वे सोच समझकर मरकजसे जुडे संक्रमितोंकी संख्या’ समक्ष नहीं रख रहे हैं !
देशमे कोरोनासे मरनेवालों और संक्रमित लोगोंकी संख्या महाराष्ट्रमें ही सबसे अधिक है, जिसमें ९० प्रतिशत तबलीगी जमातके लोग हैं; अतः अब उद्दव शासनको विचार करना होगा कि ५ % आरक्षण देकर तुष्टिकरण करना है या महाराष्ट्रको विनाशकी ओर ले जाना है !
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४. ‘लॉकडाउन’का उल्लंघन करते हुए जिहादियोंने राजस्थानके सवाई माधोपुरके क्षेत्रमें सुरक्षाबलों द्वारा रोकनेपर भी थूका और चेतावनी दी तथा कुछ समयके पश्चात तीससे अधिककी संख्यामें एकत्रित होकर पुलिसपर पथराव करके उन्हें चोटिल भी किया ! इसके पश्चात सुरक्षा बलोंको लौहेकी अवरोधकके (बैरियरके) पीछे छिपकर स्वयंको बचाना पडा । कुछ समय पश्चात प्रशासन प्रभारियोंने वहां पहुंचकर तीन लोगोंको बन्दी बनाया और शेष वहांसे भाग चुके थे !
अब ये जिहादी खुलेमें आक्रमण करने लगे हैं और इसका समस्त श्रेय गहलोत शासनके अति तुष्टिकरणको जाता है ।
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५. नागपुरके गिट्टीखदान थाना अन्तर्गत एक मस्जिदमें रुके म्यांमारके ८ जिहादियोंपर पारपत्र और ‘लॉकडाउन’ नियमोंका उल्लंघन करनेके लिए अभियोग प्रविष्ट किया गया है । उल्लेखनीय है कि ये सभी लोग तबलीगी जमातसे जुडे हैं और पुलिसको सूचना दिए बिना नागपुरकी मस्जिदमें रह रहे थे । परिसरमें पुलिसका दबाव बढता देख ये आठों २१ मार्चको मोमिनपुराके अंसारनगरमें स्थित इदरा-ए-इदाफिजुल कुराटमें (लाल मरकजमें) चले गए थे और तबसे उनके बारेमें किसीको कोई सूचना नहीं थी ।
इस प्रकरणसे स्पष्ट है कि स्थानीय नागरिकों व मस्जिदोंके सहयोगके बिना विदेशी जिहादियोंका इतने दिन छुपे रहना सम्भव नहीं था । शासन अब तो कमसे कम मस्जिदोंपर कार्यवाही करे !
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६. देहलीके निजामुद्दीन मरकजसे हरियाणामें छिपे जमातियोंको हरियाणा शासन चेतावनी देते हुए कहा कि बुधवार सायं ५ बजेके पश्चात किसीभी छिपे हुए तबलीगी जमातीके पकडे जानेपर उसके विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिताकी धारा ३०७ के अन्तर्गत हत्याका अभियोग प्रविष्ट किया जाएगा । यदि ‘कोरोना’ परीक्षणमें पाया गया तो यह अभियोग चलता रहेगा । इसके पश्चात २०० तबलीगी जमातियोंने स्वंयको विभिन्न प्रशासनके समक्ष प्रस्तुत किया है । उल्लेखनीय है कि राज्यमें अब तक मिले १५६२ में ८२ जमातियोंकी जांचमें ‘कोरोना’ पाया गया है ।
देरीसे ही सही; परन्तु हरियाणा राज्य शासनद्वारा लिया गया यह निर्णय प्रशंसनीय है । अन्य राज्य भी इससे सीख लें और राजनीतिक स्वार्थको परे रखकर यथाशीघ्र कठोर पग उठाएं !
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७. बुधवार, ८ अप्रैलको सुरक्षाबलोंको सूचना मिलनेपर कि बारामुलाके सोपोर क्षेत्रमें जैशके आतंकी छिपे हुए हैं तो सेना, ‘सीआरपीएफ’ और ‘एसओजी’के सैनिकोंने संयुक्त अभियान चलाकर मुठभेडमें स्थानीय आतंकी सज्जाद डारको, जो कि संगठनमें स्थानीय युवाओंकी भर्तीका कार्य करता था, उसे मार दिया ! सुरक्षाबलोंद्वारा जैश आतंकी सज्जादका शव उसके परिजनोंको इस चेतावनीके साथ सौंपा गया कि उसकी अन्तिम यात्रामें अधिक लोग एकत्र न हों; किन्तु ‘सोशल डिस्टेंसिंग’का उल्लंघनकर ४०० लोग एकत्र हो गए ! पुलिस प्रशासनने सभी लोगोंके विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिताकी धारा १८८ के अन्तर्गत अभियोग प्रविष्ट किया है ।
ऐसे संकटप्रद समयमें भी ऐसे दुर्दान्त आतंकीके शवको सौंपा गया ! क्या इस समयमें भी हम इन कथित मानवाधिकारके सिद्धान्तोंको छोड नहीं सकते हैं ? भारतको अब तो कमसे कम कडा दृष्टिकोण अपनाना होगा; अन्यथा कहीं यह देश बचाना कठिन न हो जाए !
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८. देहलीके मरकजसे निकलकर सबसे अधिक जमाती हरियाणाके नूंह जनपदमें शरण लेने पहुंचे थे और विभिन्न व्यक्तियोंके घरोंमें छिपे बैठे थे । समाचारके अनुसार हरियाणा पुलिसने राज्यभरमें अबतक कुल १३०५ जमातियोंकी जानकारी प्राप्त कर ली है, जिसमें १०६ जमाती विदेशी भी हैं । जांचके मध्य इन जिहादियोंमें अनेक संक्रमित भी पाए गए है ।
जिसप्रकार लघु पाकिस्तान बना नूंह, आज भारतको विनाशकी ओर धकेलनेको तत्पर है, उसीप्रकार आज अनेक क्षेत्र लघु पाकिस्तान बन चुके हैं और यह हिन्दुओंके लिए उचित सन्देश नहीं है । हिन्दुओ ! अभी भी समय है, जागें !
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