उतिष्ठ कौन्तेय


उतिष्ठ कौन्तेय (१२/०४/२०२०)

१. जमातके सदस्योंको ढूंढते समय यह देखा जा रहा है कि कौन-कौनसे लोग देहलीके उनके मजहबी आयोजनमें सम्मिलित हुए थे, जिससे उनकी जांच कराई जा सके । इसी क्रममें झारखण्ड पुलिसने यह सूचना दी है कि जमातियोंद्वारा देहलीमें प्रयोग किए जा रहे चलभाष ‘सिम’का पंजीकरण उन हिन्दू आदिवासीयोंके ‘आधार कार्ड’से किया गया है, जो कभी देहली गए ही नहीं ! आशंका प्रकट की जा रही है कि जमातके लोगोंने अपना अभिज्ञान न होने देनेके लिए आदिवासियोंके नामपर फर्जी ढंगसे ‘सिम’ लिया है ।
    यह कार्य बिना यहांके जिहादियों व मस्जिदोंकी सहायताके बिना सम्भव नहीं है और कौन जानता है कि ये ‘सिम’ धार्मिक कार्यक्रममें सम्मिलित होनेके लिए लिए थे या भारतमें देहली उपद्रव सदृश किसी प्रकरणको लेकर अस्थिरता उत्पन्न करनेके लिए ? मोदी शासन अब कृपया तुष्टिकरण छोडकर ऐसे सभी लोगों व कथित धार्मिक संस्थानोंपर कार्यवाही करे और कलको ये कुछ बडा कार्य करके भागेंगें तो शासन किसे ढूंढेगा ?; अतः ‘सिम’ लेनेकी प्रक्रियाके नियमको और  भी कडा किया जाना आवश्यक है ।
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२. तमिलनाडु पुलिसने तबलीगी जमातके ६६ व्यक्तियोंके विरुद्ध अभियोग प्रविष्ट किया है, जिनमें अधिकांश जमाती विदेशी हैं । इनपर भारतमें स्वास्थ्य आपातकालके मध्य विदेशी नागरिक विधेयकके उल्लंघनका आरोप सिद्ध हुआ है । उल्लेखनीय है कि ये जिहादी नागरिक थाईलैंड, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, फ्रांस, कैमरून, बैल्जियम एवं कांगो आदि राष्ट्रोंके हैं !
    केन्द्र शासन यदि पहले ही उपाय योजना करता और तमिलनाडु शासन पहले ही तुष्टिकरणके स्थानपर जिहादियोंपर कार्यवाही करता तो आज ये विदेशी जिहादी देशके वातावरणमें विष न घोल रहे होते ! शासकगणोंके पास अब भी समय है कि वे तुष्टिकरण बन्द करें; अन्यथा स्थिति और विकट होगी  !
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३. ९ अप्रैल २०२० को रांचीके हिन्दपीढी क्षेत्रमें ‘कोरोना’के पांच रोगी एक साथ मिलनेके पश्चात प्रशासनने समूचे क्षेत्रमें ‘सैनिटाइजिंग’का कार्य करवाया; परन्तु वार्ड क्रमांक – २३ स्थित नाला रोड पहुंचनेपर ‘स्थानीय लोग’ छतोंसे कर्मचारियोंपर थूकने लगे और थूक लगाकर १०-१० के नोट फेंकने लगे । इस घटनाकी सूचना उपनगर आयुक्त रजनीश कुमारको दी गई तथा कर्मचारी अपना कार्य समाप्त किए बिना ही वापस आ गए ।
      यह सभी जानते हैं कि ये स्थानीय लोग मुस्लमान हैं; क्योंकि अब इनके कुकृत्य समूचा देश घर बैठकर देख और जान रहा है; परन्तु विचित्र है कि कुछ समाचार वाहिनियां अभी भी इन्हें स्थानीय लोग कहकर छुपा रही हैं ! ऐसी समाचार वाहिनियोंका अब व्यापक बहिष्कार होना चाहिए !
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४. बंगालके मुर्शिदाबादमें १० अप्रैलकी नमाज करनेके लिए एकत्र हुए लोगोंने न केवल ‘लॉकडाउन’का उल्लंघन किया, वरन ‘सोशल डिस्टेंसिंग’के नियमोंको भी अनदेखा किया और इस समयपर इन लोगोंने ‘मास्क’ और ‘ग्लव्स’ भी नहीं पहने, तत्पश्चात सूचना मिलनेपर पहुंचे पुलिसवालोके समक्ष गर्वसे निकले । अब पुलिसने मौलानाको बुलाकर लोगोंसे घरोंमें रहकर ही नमाज पढनेको कहा है ।
     सभी धर्मस्थल बंद हैं; किन्तु ये धर्मान्ध मस्जिदोंमें जा रहे हैं । यह विधान व्यवस्था हमने बनाई है कि जिहादी उसे निर्भय होकर तोड रहे हैं और बंगालमें तो पुलिस कार्यवाही करनेके स्थानपर मौलानाओंसे विनती कर रही है ! सभी देशवासी धर्मान्धोंका तुष्टिकरण करनेवाले ममता शासनसे इसका उत्तर मांगे !
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५. उत्तरप्रदेशके लखनऊमें पुलिसद्वारा ‘कोरोना’के संकट उभरनेपर जमातियोंको ढूंढनेका कार्यक्रम चलाए जानेपर एकाएक २०० जमाती अपने चलभाष बंद करके लुप्त हो गए हैं ! उनके सम्पर्कमें आए ३०० लोगोंने भी ‘क्वारंटीन’के भयसे अपने चलभाष बंद कर दिए हैं ! आशंका है कि इन्होंने नूतन भ्रमणभाष क्रमांक (नंबर) लेकर अथवा अपने परिचितोंके विक्रय केन्द्रसे (दुकानसे) नूतन चलभाष ले लिए हैं । प्रशासनने इनके बारेमें सूचना देने वालोंको ५ सहस्र रूपएका पुरस्कार घोषित किया है । उल्लेखनीय है कि अपराध शाखाने इस प्रकरणमें लखनऊमें रहनेवाले ७०० से अधिक चलभाष क्रमांकको जांचपर लगा रखा था ।
    सुनकर भी विचित्र प्रतीत होता है कि कैसे गृह मन्त्रालय व अन्य सुरक्षा विभागोंके रहते जिहादी छुपते फिर रहे हैं और नूतन चलभाष क्रमांक भी ले रहे हैं, इससे ही ज्ञात होता है कि हमने सुरक्षा व्यवस्थाको कभी कडा किया ही नहीं, जिससे इन जिहादियोंपर नियन्त्रण किया जा सकता था !


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