उतिष्ठ कौन्तेय


उतिष्ठ कौन्तेय (१४/०४/२०२०)

१. ‘द वायर’ नामक मीडिया पोर्टलने अपनी एक ‘रिपोर्ट’में दावा किया कि पंजाब और हिमाचलकी सीमापर कुछ मुसलमान पुरुष, औरतें और बच्चे नदी तालपर बिना खाना पीनाके रह रहे है; क्योंकि गांववालोंने इन्हें मारकर भगा दिया है । इसके पश्चात ‘पोर्टल’के स्वामीने इसे ‘टवीट’ किया जो कुछ दिवस पूर्व ही झूठ फैलानेके लिए न्यायालयसे ‘नोटिस’ पा चुके हैं । होशियारपुरकी पुलिसने इस विषयमें संज्ञान लेकर साक्ष्य प्रस्तुत किया कि ‘द वायर’ झूठ फैलानेका कार्य कर रही है ।
     इस प्रकार वामपंथी ‘मीडिया पोर्टल’ झूठे समाचार फैलाकर समाजमें विष घोलनेका कार्य कर रही हैं ऐसे न्यूज पोर्टलको प्रशासनद्वारा शीघ्रातिशीघ्र बंद करना चाहिए ।
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२. ११ अप्रैल २०२० को भारतमें करोना फैलानेकी षड्यंत्र रचनेवाला शस्त्रोंके तस्कर जालिम मुखियाको पुलिसने बन्दी बना लिया इसने सीमा पार करके भागे हुए २४ जमातियोंको ‘छपकैया वार्ड नंबर २’ की मस्जिद व ‘यतीमखाना’ मस्जिदमें छिपानेका कार्य किया साथ ही भारतमें करोना फैलानेके लिए ३०० मुसलमानोंको मस्जिदमें इकट्ठा किया ।
      इस प्रकारके प्रकरणोंसे स्पष्ट होता जा रहा है इनलोगोंका महामारी फैलाकर अधिकसे अधिक लोगोंको मरवाना ही एकमात्र उद्देश्य है ।
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३. उत्तराखंडके हल्द्वानीमें कोरोना ‘हॉट स्पॉट’ घोषित वनभूलपूरा क्षेत्रमें रविवार,१२अप्रैल, कोरोनाकी जांच करने गई स्वास्थ्य विभाग और पुलिस बलने जब बंजारन मस्जिदके मौलानाको ‘क्वाकरंटाइन’ करनेसे पूर्व जांच ‘सैंपल’ लेना चाहा, तो सूचना मिलते ही सैंकडों जमातियोकी भीड ‘अल्लाह हो अकबर’के और मुर्दाबादके नारे लगाते सडकपर उतर आई और स्वास्थ्य विभाग तथा पुलिसकर्मियोंको यह कहते हुए वापस भेज दिया कि उन्हें प्रताडित करने हेतु लक्ष्य बनाया जा रहा है। उल्लेखनीय है इस क्षेत्रको जमातमें सम्मिलित सात लोग कोरोना संक्रमित पाए जानेपर पहलेसे ही सील किया गया था । प्रशासन और स्वास्थ्य विभागके लोग उन्हें समझानेकी चेष्टा कर रहे हैं ।
    यह प्रशासनकी निष्क्रियता ही है, कि इतने संक्रमित जमातियोंके उपस्थित होनेके पश्चात भी कठोर पग उठानेके स्थानपर उनसे अनुनय-विनय कर रहा है !
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४. श्रीलंका सरकारने देशके अल्पसंख्यक मुसलमानोंकी आपत्तिको अनदेखा करते हुए ‘कोरोना’ विषाणुसे होनेवाली मृत्युका शवदाह करना अनिवार्य कर दिया है । कोरोनाके संक्रमणसे हुई सात मृत्युमें से तीन मुसलमान शवोंका, इनके परिजनोंके अपार विरोधके पश्चात भी दाह संस्कार किया गया । श्रीलंकाके स्वास्थ्य मंत्री पवित्रा वन्नियाराचचीने कहा, “जिस व्यक्तिकी मृत्यु कोरोना विषाणुसे हुई है या ऐसी आशंका है, उसके शवका दाह संस्कार किया जाएगा।” आधिकारिक ‘गजेटियर’में कहा गया है कि शवको ४५-६० मिनटकी अवधि तक ८००-१२०० डिग्री सेल्सियसके तापमानपर जलाया जाएगा ।
   क्या केंद्र सरकारभी इससे संज्ञान लेते हुए सुरक्षाकी दृष्टिसे कोरोनासे हुई मृत्युके मृत शवों हेतु दाह संस्कारका नियम लागू करने हेतु कोई ठोस पग उठाएगी या अभी भी तुष्टिकरणका क्रम चालू ही रहेगा !
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५. सम्पूर्ण भारतमें जिहादियोंद्वारा चिकित्सक दलोंपर प्रहार करनेके प्रकरणमें वृद्धि थम नहीं रही है । अब कश्मीरके बडगाम जनपदके वाथुरा ग्राममें जिहादियोंके समूहने चिकित्सक दलको तब बन्दी बना लिया जब वह उनसे पूर्व की यात्राओंके विषयमें प्रश्न करने लगे । सूचना मिलनेपर पुलिसबलने आकर उनकी रक्षा की व मुक्त करवाया; परन्तु इस मध्य जिहादियोंने पत्थरसे उनपर प्रहार आरम्भ कर दिया जिसमें तीन पुलिसकर्मी चोटिल हो गए ।
   जिहादियोंद्वारा किए गए उत्पातोंपर शासनद्वारा कार्यवाही न करना मानो हिन्दुओंके धैर्यकी परीक्षा लेना है । इन धर्मांधोंको त्वरित कारागारमें भेज देना चाहिए !
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६. बिहारके पश्चिमी चम्पारण जनपदमें दो जिहादियोंको उस समय पकड लिया गया जब वह गौमांस लेकर गांवसे जा रहे थे । जब इसकी सूचना पुलिसको दी गई तो पुलिसने आनेमें अत्याधिक विलंब किया व प्रकरणको दबाने हेतु दोषियोंसे उत्कोच ( रिश्र्वत) मांगी जिसकी ग्रामीणोंको भनक लग गई और उन्होंने राजमार्ग बाधितकर न्यायकी मांग की । अतः पुलिसने आरोपियोंके विरुद्ध प्राथमिकी लिखकर उन्हें कारावास भेज दिया ।
   समाचार राष्ट्रमें न्याय व्यवस्थाके ऊपर प्रश्न करता है व यह भी स्पष्ट करता है कि अब यह व्यवस्था पूर्णतः असक्षम हो चुकी है और भ्रष्टाचारसे लिप्त है । अतः हिन्दूराष्ट्र ही इसे सजीव करने हेतु एकमात्र विकल्प है ।
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७. जमातियोंको अवैध रूपसे सीमापार करानेके आरोपमें मुख्य सिपाही मोहम्मद पंकज खानके विरुद्ध प्रकरण प्रविष्ट कर दिया गया है और उसे संक्रमणकी जांचके लिए भेज दिया गया है । इससे पहले भी उसे आपराधिक गतिविधियोंमें सलंग्न पाया गया था । सीमापर उसने अपनी पुलिसकी वेशभूषा ‘वर्दी’का अनुचित लाभ उठाते हुए अपना पहचानपत्र दिखाकर पार किया । उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी देहलीका एक पदस्थ सिपाही इमरान भी अपनी व्यक्तिगत वाहनसे जमातियोंको सीमापार करके उत्तरप्रदेश ले जाते समय रंगे हाथों पकडमें आ गया था ।
   जिहादी चाहे किसी भी पदपर आसीन हो जाए, देशद्रोही और धर्मान्धताकी मानसिकता कभी भी नहीं त्याग सकता । ऐसे कट्टरपंथियोंको शासनने तुरंत हटा देना चाहिए ।


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