सन्तों एवं ईश्वरीय तत्त्वद्वारा राष्ट्रद्रोहियोंके विरोध में क्षात्रतेजयुक्त विचार !
कल मेरी एक संतसे बात हो रही थी, वे भी देशमें जमातियों एवं जिहादियोंके उपद्रवसे बहुत क्रोधित थे और कह रहे थे कि उन्हें कारागारमें नहीं डालना चाहिए क्योंकि वे दुष्टबुद्धि है वहां भी कुछ दुष्टता ही करेंगे, उन्हें तो सीधे गोली मारना चाहिए ! मैंने मनमें सोचा तो मेरे मनमें भी ऐसे राष्ट्रद्रोहियों एवं मानवताके शत्रुके लिए जो क्षात्रतेजयुक्त विचार आ रहे हैं वे ऐसा सन्तों एवं ईश्वरीय तत्त्वद्वारा ही दिए जा रहे हैं ! और मैंने दोनोंके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की !
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