श्रीगुरु उवाच


भक्तोंके लिए काचशाला (शीशमहल) अनावश्यक है !
पुरातन कालमें रजवाडोंमें शीशमहल होते थे । ऐसे प्रासादमें (महलमें) व्यक्ति कहीं भी हो, वह सर्वत्र दिखाई देता था । भक्तोंको काचशाला नहीं बनानी पडती है; क्योंकि उन्हें ईश्वर सर्वत्र ही नहीं, स्वयंमें भी दिखाई देता हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution