उत्तिष्ठ कौन्तेय


१. बंगालके कोलकाता उच्च न्यायालयने केन्द्र शासनके उस निर्देशको निरस्त कर दिया, जिसमें एक पौलेण्ड निवासी छात्र युवकको ९ मार्च तक स्वदेश लौटनेका आदेश दिया था । छात्रपर आरोप था कि उसने १९ दिसम्बरको जादवपुर विश्वविद्यालयके कुछ विद्यार्थियोंके साथ नागरिकता संशोधन विधेयकके विरोध प्रदर्शनके मध्य अनुचित आचरण प्रस्तुत किया था, जो कि एक विदेशी व्यक्तिके लिए अपराधकी श्रेणीमें आता है ।
      बंगाल अब देश विरोधी गतिविधियोंका केन्द्र बन चुका है, इसका भान इसी प्रकरणसे लगाया जा सकता है कि देशविरोधी गतिविधि करनेपर भी वहांके न्यायालय राज्य शासनके निर्देश अनुसार कार्य करते हैं और छात्रको दोषमुक्त बता रहे हैं; अतः इन प्रतिकूल परिस्थितियोंके नियन्त्रण हेतु वहां त्वरित राष्ट्रपति शासन पारित करना ही एकमात्र विकल्प है ।
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२. भारतीय सुरक्षा विभागद्वारा बताया गया है कि देहलीमें साम्प्रदायिक हिंसाको भडकाने हेतु पाकिस्तानसे कमसे कम २०० ट्वीट किए गए, जिसमें भारतीय मुसलमानोंको भडकाते हुए देहली सुरक्षा बलोंको लक्ष्य बनाया गया ! इसके लिए शत्रु शक्तियोंद्वारा हिंसा करने वालोंमें धन भी वितरित किया गया । देहली सुरक्षा बलोंने इसी प्रकरणमें पांच विद्रोहियोंको बंदी भी बनाया है ।
     अपनी दरिद्र जनताके पोषणमें असमर्थ होते हुए भी पाकिस्तान अपनी विकृत मानसिकताके कारण आए दिन ऐसी चालें चलना नहीं छोडना चाहता; स्पष्ट है कि वह दण्डित किए बिना नहीं मानेगा और हिन्दुत्वनिष्ठोंके खातोंपर दृष्टि रखनेवाले ट्विटरकी दृष्टि इन जिहादी खातोंपर क्यों नहीं जाती ?
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३. अमेरिकाके अलबामामें विद्यालयोंमें योग पढाए जानेपर २७ वर्षोंसे लगा प्रतिबन्ध हटनेके अगले ही दिवस ‘हार्वर्ड मेडिकल विद्यालय’ने कोरोना विषाणुसे निपटनेमें भी योग और ध्यानको सहायक बताया है । अमेरिकाके प्रमुख चिकित्सकीय संस्थानोंमेंसे एक हार्वर्डने कहा है कि कोरोनासे सम्बन्धित व्यग्रता और उद्विग्नतासे निपटनेके लिए योग और ध्यान करनेके साथ-साथ श्वासपर नियन्त्रण रखना चाहिए । ‘विश्व हिन्दू कांग्रेस अमेरिका’ने कहा कि उसने ‘कोविड-१९’की वैश्विक महामारीके चलते समूचे उत्तरी अमेरिकामें यज्ञ और प्रार्थनाएं आयोजित की हैं !
     हिन्दूद्रोही व सनातनके ज्ञानसे रहित पन्थ मानवजातिको सनातन विधा जैसे यज्ञ, ध्यान व योग आदिसे कितना भी दूर ले जानेका प्रयास करें; परन्तु मानव जाति सनातनकी ओर लौट ही आएगी; क्योंकि समाधान और शान्ति केवल और केवल सनातनमें ही है और यह समाचार यही दिखाता है ।
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४. ‘एबीपी’द्वारा संचालित ‘द टेलिग्राफ’ समाचारपत्रने १७ मार्चको भाजपाद्वारा राज्यसभाके लिए नामांकित किए गए पूर्व न्यायमूर्ति रंजन गोगोईको लेकर अपने मुख्य पृष्ठके शीर्षकमें लिखा, ‘कोविंद, नोट कॉविड, डिड इट’ अर्थात गोगोई कोरोना विषाणुके कारण नहीं, वरन रामनाथ कोविन्दके कारण राज्यसभा पहुचे हैं । भारतीय प्रेस परिषदने राष्ट्रपतिके इस अपमानके लिए समाचार पत्रको ‘कारण बताओ’ अधिसूचना जारी की है ।
     ममता बैनर्जीके बंगालसे प्रकाशित होनेवाले इस समाचारपत्रको वहां होनेवाले उपद्रव और आए दिन भाजपा व संघके कार्यकर्ताओंकी हत्याएं नहीं दिखतीं; परन्तु राष्ट्रपतिपर लक्ष्य साधा जाता है । ‘द टेलीग्राफ’की विषैली मानसिकता इस शीर्षकसे स्पष्ट हो रही है तो कहीं यह इस हिन्दूद्रोही समाचारपत्रकी गोगोईजीद्वारा राम मन्दिरपर दिए निर्णयकी प्रतिक्रिया तो नहीं ?
(१९/०३/२०२०)


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