भोजन बनाना व ग्रहण करना यज्ञ कर्म है; इसलिए उसे प्रकाशमें ही करना चाहिए !


मैंने देखा है कि कुछ लोग अन्धेरेमें खाते हैं । हिन्दू धर्ममें भोजन बनाना व ग्रहण करना यज्ञ कर्म होता है; इसलिए उसे प्रकाशमें ही करना चाहिए । भोजनकी सुगन्धसे आस-पासकी अनिष्ट शक्तियां सहज ही आकर्षित हो जाती हैं और वे उसे सूक्ष्मसे ग्रहण करने आती हैं; इसलिए हमारे यहां भोजनको प्रथम ईश्वरको अर्पण करनेका विधान है एवं जलसे उसके चारों ओर कवच या मण्डल बनानेका विधान है । इस कवचके कारण अनिष्ट शक्तियां भोजनकी थालीसे उसे ग्रहण नहींकर पाती हैं । मैं आपको भोजन बनाते समय क्या करना चाहिए ?, यह बता ही चुकी हूं ! आज समाजमें अनेक शारीरिक व मानसिक रोगोंके होनेका एक मुख्य कारण अशुद्ध भोजन करना भी है; इसलिए भोजन बनाने व ग्रहण करनेकी प्रक्रियाको एक यज्ञ कर्म बनानेका प्रयास करें !


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