उत्तिष्ठ कौन्तेय
१. कांग्रेस नेता पृथ्वीराजके देवालयोंके कोषको नियन्त्रणमें लेनेके वक्तव्यपर भडके हिन्दू
बुधवार, १३ मईको कांग्रेस नेता व महाराष्ट्रके पूर्व मुख्यमन्त्री पृथ्वीराज चौहानने केन्द्र शासनको संकट कालके चलते मन्दिरोंके स्वर्णको शासकीय नियन्त्रणमें लेनेका सुझाव दिया था । अब हिन्दुओंके विरोधके पश्चात उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि उनकी बातका अनुचित अर्थ निकाला गया है तथा ऐसे असामाजिक तत्त्वोंपर वे उचित वैधानिक कार्यवाही करेंगे । उन्होंने कहा कि पहले भी अटलजीके कहनेपर तथा पुनः २०१५ में मोदीजीने मन्दिरोंका सोना अधिकोषमें (बैंकोंमें) रखा था, जिनमें शिरडी तथा तिरुपति मन्दिरोंके सोनेका समावेश है । भारतमें मन्दिरोंका सोनेका उपयोग नहीं हो रहा है; इसलिए मैंने यह सुझाव दिया था ।
इसपर भाजपाके आध्यात्मिक प्रकोष्ठके सहसंयोजक तुषार भोसलेने पूछा है कि मन्दिर आपकी व्यक्तिगत सम्पत्ति है क्या ? भोसलेने कहा कि संकटके समयमें मन्दिरोंद्वारा सहायता की जाती है; परन्तु मन्दिरके सोनेको नियन्त्रणमें लेनेका परामर्श देनेका अधिकार आपको किसने दिया ?
विचित्र बात है कि कांग्रेस नेताको इस संकटकालमें मन्दिरोंमें रखे स्वर्णके उपयोग न होनेकी चिन्ता हो रही है; परन्तु वे मस्जिदों और गिरिजाघरोंमें धर्मपरिवर्तन हेतु रखे हुए या आनेवाले अवैध धनकी ओर नहीं देख पा रहे हैं । ऐसा नहीं है कि कांग्रेस नेताको इसका ज्ञान नहीं, तब भी उनका केवल मन्दिरोंके स्वर्णपर कुदृष्टि होना, कांग्रेसकी हिन्दूद्रोही मानसिकताका परिचायक है । वस्तुतः आज लगभग सभी राजनीतिक दलोंकी कुदृष्टि मन्दिरोंमें संग्रहित धनपर है; अतः नेताओंकी इस कुदृष्टिको अब धर्मराज्यकी स्थापनाकर ही हटाया जा सकता है । (१५.०५ २०२०)
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२. १६६ जमातियोंने मौलाना सादपर लगाया २० मार्चके पश्चात ‘मरकज’ न छोडकर जाने देनेका आरोप
तबलीगी जमातके विरुद्ध देहली पुलिसकी अपराध शाखाकी जांचमें यह ज्ञात हुआ है कि सभी तबलीगी २२ मार्चको ही मरकज छोडकर चले जाना चाहते थे; परन्तु सादने उन्हें जानबूझकर यह कहकर रोका कि मृत्युके लिए मस्जिदसे उत्तम स्थान कोई नहीं है । इस बातको सशक्त करनेके लिए पुलिसने १६६ जमातियोंसे पूछताछ की । इसके लिए समाजिक जालस्थलपर एक ‘वीडियो’ प्रसारित हुआ, जिसमें साद जमातियोंको रोकता हुआ स्पष्ट सुनाई दे रहा है । साद अपनी ‘कोरोना’ विषाणु सम्बन्धित जांच भी शासकीय चिकित्सालयमें (सरकारी अस्पताल) नहीं कराना चाहता था कि परीक्षण प्रतिवेदन नकारात्मक आनेपर पुलिस पूछताछके लिए बुला लेगी । पुलिस अपराध शाखा इस बातको भी जानना चाहती है कि इन जमातियोंने भारत आनेकी शासकीय अनुमति (वीजा) कैसे प्राप्त की व किसने इनकी सहायता की ? इससे सम्बन्धित सम्पूर्ण जानकारी गृह मन्त्रालयतक पहुंचाई जा चुकी है ।
निजामुद्दीनके साद जैसे लोग हमारे देशके ही नहीं, वरन सम्पूर्ण मानवताके शत्रु हैं । ऐसे लोगोंको कडेसे कडा दण्ड दिया जाना चाहिए, जिससे आगे कोई भी ऐसा दुस्साहस नकर सके; परन्तु विडम्बना तो यह है कि इसे अभीतक बन्दी भी नहीं बनाया गया है । जिहादियोंका तुष्टीकरण ही इस देशकी दुर्गतिका कारण है, राज्यकर्ता यह स्मरण रखें और अपने कर्तव्यका पालन करें ! (१४.५.२०२०)
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३. कांग्रेस नेताने कर्नाटकके मुख्यमन्त्रीको पत्र लिखकर ईदपर मस्जिदमें नमाजकी मांगी छूट
कांग्रेसके एक नेता इब्राहिमने कर्नाटकके मुख्यमन्त्री बीएस येदियुरप्पाको पत्र लिखकर ईदके अवसरपर मस्जिद और ‘ईदगाह मैदानों’में मुसलमानोंको नमाज पढनेकी छूट देनेको कहा है । पत्रमें लिखा गया कि ‘कोरोना’के कारण समूचे राज्यके मुसलमान मस्जिदोंमें नमाज पढनेमें असमर्थ हैं । वे अपने घरोंमें रहकर ही नमाजकर रहे हैं; इसलिए समुदायकी ओरसे एक परामर्श है कि शासन स्वास्थ्य विशेषज्ञोंका परामर्श लेकर मुसलमानोंको ईदके दिवस १ बजेतक मस्जिदोंमें नमाज करनेकी अनुमति दे ! ऐसेमें कांग्रेस मन्त्रीके इस अनुरोधके पश्चात उनकी आलोचना हो रही है ।
हिन्दू बहुल देशके हिन्दुओंने अपने पर्व, जो घरमें मनाए नहीं जा सकते थे, वे भी घरोंमें मनाए; परन्तु नमाज, जो कहीं भी पढी जा सकती है, उसके लिए उन्हें मस्जिद क्यों जाना है ? कांग्रेस नेता अपने ‘वोट बैंक’के लिए प्रशासनपर दबावकी राजनीतिकर रहे हैं, जबकि इनके समुदायकी जमातके लोग ही हैं, जो महामारीके संक्रमण फैलानेके लिए मुख्य रूपसे उत्तरदायी हैं । कर्नाटक प्रशासनको यह त्वरित अस्वीकार करना चाहिए । (१५.०५.२०२०)
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४. बंगालके पुलिस अधिकारी हुमायूं कबीरने तेलीनिपाडामें हिन्दुओंपर हुए आक्रमणको ‘ताना मारने’का परिणाम बताया
बंगालके हुगली जनपदके तेलीनिपाडा क्षेत्रमें हिन्दुओंके विरुद्ध साम्प्रदायिक हिंसाको बंगाल पुलिसने ‘ताना मारने’का परिणाम बताया है । ममता बनर्जीके कृपापात्र चन्दन नगर पुलिस आयुक्त हुमायूं कबीरने यह बात कही है । कबीरने कहा कि चन्दन नगरमें कुछ लोगोंको ‘कोरोना’ पाए जानेके पश्चात हिन्दुओंने उर्दी बाजारमें मुसलमानोंपर कटाक्ष किया । उसके पश्चात ही मुसलमानोंको क्रोध आया । उन्होंने कालान्तरमें ‘सॉकेट बम’, ‘गैस सिलिण्डर’, ‘तलवारों’, धारदार शस्त्रों, लोहेकी छडों और ईंट-पत्थरोंसे आक्रमण किया । इस घटनापर हुगलीसे भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जीने कहा कि अजमेरसे लौटे कुछ मुसलमानोंमें ‘कोरोना’ पाए जानेके पश्चात चन्दननगरके लोग सतर्क हो गए थे और उन्होंने अपने क्षेत्रमें बाहरी लोगोंका प्रवेश बन्दकर दिया था; परन्तु मुसलमानोंने अवरोधक (बैरिकेड) लगानेपर उन लोगोंपर आक्रमणकर दिया ।
जिहादियोंको हिन्दुओंपर आक्रमण करनेका एक अवसर मात्र चाहिए, यह तो सर्वविदित है; परन्तु जब ममता शासनका संरक्षणप्राप्त पुलिस आयुक्त यह भाषा बोले तो समझना चाहिए कि हिन्दुओंका अस्तित्व वहां संकटमें है । हिन्दुओ, अब स्वयं ही अपने रक्षक बनें और इसके लिए राजनीतिक दलोंसे अपेक्षा छोडकर एकजुट हो जाएं ! (१५.०५.२०२०)
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५. हिन्दुओंके नरसंहारके लिए ‘मैरियट संस्थान’के कर्मचारी विन्नी बैलमने किया विषवमन
लन्दनमें ‘हॉस्पिटैलिटी चेन मैरियट इण्टरनेशनल’में कार्यरत तथा मुम्बईके विन्नी बैलम नामके एक व्यक्तिने सामाजिक प्रसार माध्यमपर (सोशल मीडियापर) हिन्दुओंके विरुद्ध घृणा प्रसारित करते हुए उन्हें मारनेकी धमकी दी । हिन्दुओंको ‘नस्लवादी’ बताते हुए कहा कि यदि देशके मुसलमान और ईसाई एकजुट हो गए तो हिन्दुओंका नरसंहारकर दिया जाएगा । खाडी देशोंमें चाकरीसे (नौकरीसे) निकाले गए हिन्दुओको भोजन नहीं मिलेगा, उन्हें ‘भीख’ मांगनी होगी । उसने मुम्बई पुलिसको ‘हिन्दू पुलिस आतंकवादी’ बताते हुए प्रधानमन्त्री मोदीको अपमानजनक शब्दोंमें कहा कि हिन्दुओंको गोमूत्र पीना अच्छा लगता है । अयोध्यामें राम मन्दिरका निर्माण होगा तो मुसलमान इसे नष्टकर देंगे । इसपर लोगोंने ‘मैरियट’से यह स्पष्टीकरण मांगा कि वे अपने कर्मचारीके विचारोंका समर्थन करते हैं या नहीं ? तो संस्थानने इसपर कार्यवाही करनेकी बात की और बताया कि विन्नी वैलम सीधे ‘मैरिएट’से नहीं जुडा है, तथापि हम उसपर कार्यवाही करेंगे ।
भारतमें जन्म लेनेवाला यह अहिन्दू भारतके विरुद्ध विषवमनकर रहा है तो इसमें विचित्र कुछ नहीं है । जो स्वयंको इस मिट्टीका मानता ही नहीं, वह इसकी प्रशंसा कैसे करेगा ? यह तो हिन्दू ही हैं, जो व्यर्थके ‘भाईचारे’के फेरमें लगे रहते हैं । अब भारत शासन इसपर त्वरित कार्यवाहीकर लन्दन प्रशासनपर दबाव डालकर ऐसे देशद्रोहीको बन्दी बनाए, यही सभी देशभक्तोंकी शासनसे मांग है । (१४.०५.२०२०)
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६. ‘बीफ रेसिपी’को गोमाता कहकर ‘वीडियो’ साझा करनेवाली रेहाना फातिमा ‘भारत संचार निगम लिमिटेड’से हुई निलम्बित
२०१८ में सबरीमला मन्दिरमें घुसनेका प्रयास करनेवाली रेहाना फातिमाको ‘बीएसएनएल’ने निलम्बितकर दिया है । कुछ दिवस पूर्व फातिमाने ‘यूट्यूब’पर ‘वीडियो’ साझा करते हुए ‘बीफ’ पकानेकी विधिके मध्य मांसको गोमाता कहकर पुकारा था । उनकी इस कृतिसे हिन्दुओंकी भावनाएं आहत हुइंनऔर इसके विरुद्ध अनेक व्यक्तियोंने ‘बीएसएनएल’को परिवाद (शिकायत) किया, जिसके परिणामस्वरूप संस्थाने यह निर्णय लिया । उल्लेखनीय है कि केरलकी जमात परिषदने भी ‘लाखों हिन्दू श्रद्धालुओंकी भावनाओंको चोट पहुंचानेको लेकर फातिमाको समुदायसे निष्कासितकर दिया था ।
हिन्दूद्वेष्टा महिला, जो पहले भी हिन्दू धर्मका अपमानकर चुकी है, वह हिन्दू बहुल देशमें पूजनीय गोमाताका ऐसा अपमान करनेका दुस्साहसकर सकती है, यह सभी हिन्दुओं और इस देशके शासक और प्रशासक दोनों ही वर्गोंके लिए लज्जाका विषय है ?, ऐसा ही इस्लामका अपमान वह किसी मुसलमान देशमेंकर सकती थी क्या ?, या किसी ईसाई बहुल देशमें ? हिन्दुओ, यह स्वयंसे प्रश्न करें और यदि अभी भी जाग्रत होकर एकजुट नहीं हुए तो स्वयंको मृत ही समझें ! (१५.०५.२०)
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७. इलाहबाद उच्च न्यायालयने ध्वनिप्रसारक यन्त्रोंसे (लाउडस्पीकरसे) ‘अजान’पर लगाई रोक
इलाहाबाद उच्च न्यायालयने मस्जिदसे ध्वनिप्रसारकसे होनेवाली ‘अजान’ और गाजीपुरमें जिलाधिकारीद्वारा गृहबन्दीके मध्य ‘अजान’पर लगाए प्रतिबन्धको लेकर कहा है कि ‘लाउडस्पीकर’से अजानपर प्रतिबन्ध वैध है; क्योंकि यह इस्लामका अंग नहीं है । किसी भी मस्जिदसे ‘लाउडस्पीकर’से ‘अजान’ करना दूसरे लोगोंके अधिकारोंमें हस्तक्षेप करना है । दूसरोंको सुननेके लिए विवश करनेका अधिकार किसीको नहीं है । न्यायमूर्ति शशिकान्त गुप्त और न्यायमूर्ति अजीत कुमारकी खण्डपीठने अफजल अंसारी व फर्रूखाबादके सैयद मोहम्मद फैजलकी याचिकाओंपर निर्णय सुनाते हुए गाजीपुरके जिलाधिकारीके आदेशको निरस्तकर दिया और बिना ‘लाउडस्पीकर’ अजानको स्वीकृति देते हुए कहा कि मस्जिदमें अजान करना, ‘कोरोना’की रोकथामके लिए शासनद्वारा जारी किए गए नियमोंका उल्लंघन नहीं है ।
न्यायालयने ‘लाउडस्पीकर’से चिल्लाकर की जानेवाली ‘अजान’को तो बन्द करवा दिया; परन्तु यदि जिहादी मस्जिदमें एकत्र होकर ‘अजान’ करेंगे तो शासनद्वारा पारित गृहबन्दीका (लॉकडाउनका) क्या अर्थ रह जाएगा ? क्या यह निर्णय देनेसे पूर्व चिकित्सकोंसे परामर्श नहीं लेना चाहिए था ? न्याय देनेवालोंको यह क्यों लगता है कि उन्हें सब विषयोंका ज्ञान है ? हिन्दुओंको तब मन्दिरमें जानेसे क्यों रोका गया ? ये सभी प्रश्न आज हिन्दुओंके मनमें है ।
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८. अलीगढमें पुलिसपर आक्रमणकर गोतस्करोंको छुडा ले गई भीड, रुकसाना और शबाना बन्दी बनाई गईं
उत्तर प्रदेशके अलीगढके सासनी गेट थाना क्षेत्रके कासिम नगर क्षेत्रमें गुरुवार, १४ मईको गोतस्करोंको बन्दी बनाने गए पुलिस दलपर जिहादी भीडने आक्रमणकर दिया । जिहादियोंने उनकी वेशभूषा फाड दी और आरोपियोंको छुडा लिया । इस प्रकरणमें दो महिलाएं बन्दी बनाई गईं हैं ।
इसके पश्चात भारी संख्यामें पहुंचे पुलिस बलने स्थितिको सम्भाला । उल्लेखनीय है कि जब पुलिसने कासिम बाबा मस्जिदके दोनों आरोपियोंको पकडा तो इसकी जानकारी जैसे ही आसपासके लोगोंको हुई उन्होंने इसका विरोध करते हुए पुलिसके साथ मारपीट की ।
गोमांस भक्षण करनेशाले, अपराध करनेपर भी जिहादियोंको बचानेके लिए पुलिसको मारनेवाले ऐसे असभ्य लोग भारतमें रहने योग्य हैं क्या ? क्या ऐसे लोग ‘भाईचारे’ या किसी भी प्रकारकी सहिष्णुताके योग्य हैं क्या ? स्वयं विचार करें !
(१७/०५/२०२०)
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