कथावाचकके स्पष्टीकरणपर जाग्रत हिन्दुओंने किए प्रतिप्रश्न
इन दिनों जिस कथावाचककी दृश्यश्रव्य सन्दंशिका अर्थात वीडियो क्लिपपर सामाजिक प्रसार माध्यमोंमें चर्चा हो रही है, उसपर उनकी ओरसे स्पष्टीकरण आया है जिसमें उन्होंने अपनी चूकोंको अपनी विशेषता बतानेका प्रयास किया; परन्तु हर्षका विषय यह है कि आजका हिन्दू जाग्रत होने लगा है और उसने,उनसे प्रतिप्रश्न करना प्रारम्भकर दिया, जिसका अभीतक उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया है । इस स्पष्टीकरण और उनसे किए प्रश्नोंसे सभी हिन्दुओंका परिचित होना हिन्दुओंके हितमें है व जो निम्नलिखित हैं
१. ‘अल्लाह’को भागवत रोककर, प्रणाम करनेवाले ‘वीडियो’पर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि मेरी कथाका सीधा प्रसारण चल रहा था और पासमें ‘नमाज’ हो रही थी । वो लोग हमारे यहां कहने भी आए कि बहुत अधिक ध्वनि आती है; इसलिए हमने ‘नमाज’के समय कथा बन्द करनेका निश्चय किया !
देवी जी ! ‘नमाज’ नित्य होती है, जबकि आपकी कथा तो वहां सप्ताहभरकी रही होगी, जब आप ‘अल्लाह’ और रामजीको एक मानती हैं तो अपने मुस्लिम भाइयोंसे निवेदन करतीं कि आप लोग कुछ दिन बिना ‘माइक्रोफोन’के ‘नमाज’ पढ लीजिए या आप लोग भी हमारे साथ कथाका श्रवणकर लीजिए, ‘नमाज’ रहने दीजिए ! क्योंकि जब आपके अनुसार दोनों ही एक हैं तो चाहे ‘अल्लाह’का गुणगानकर लो चाहे रामजीका अथवा श्रीकृष्णका ? एक ही बात है; परन्तु आप ऐसा नहीं कर पाईं; क्योंकि वो अपने मतके प्रति अन्धे हैं, आप जैसे सहस्रों लोगोंके कहनेका भी उनपर कोई प्रभाव नहीं पडता ! आप कथा रोक सकती हैं; परन्तु आप उनकी ‘नमाज’ नहीं रुकवा सकती, न ही आपमें यह सामर्थ्य है, यही सत्य है ।
२. आपने कहा मैं ‘सर्वधर्म समभाव’में विश्वास करती हूं !
देवी जी ! शास्त्रोंके अनुसार धर्म किसे कहते हैं ? वेद, उपनिषद्के अनुसार धर्म कितने हैं ? जिस भागवतका वाचन आप करती हैं, उसमें कितने धर्मोंकी चर्चा है ? धर्म एक है या अनेक ? इसका उत्तर दीजिए !
३. देवीजी एक गोशाला चलाती हैं ।
देवीजी ! गोरक्षकों और गोभक्षकोंमें जब मित्रता हो सकती है तो आपकी गोशालामें तो बहुत गायें हैं, जिनको भक्षण करना हो वहीं बुला लीजिए । आपके मतानुसार तो सब बराबर हैं न, चाहे कोई गाय खाए या गाय पूजे ! तो कब अपनी गोशालामें गोभक्षकोंको बुला रही हैं आप ?
४. व्यासपीठ, जिसपर आप बैठती हैं !
देवीजी ! आप तनिक बताएं ! क्या व्यासपीठपर बैठकर गोभक्षकोंका गुणगानकर सकते हैं या नहीं ? यदि कर सकते हैं तो आप किसी शास्त्रका प्रमाण दीजिए ?
यद्यपि अभी उनसे पूछे गए इन प्रश्नोंका उत्तर नहीं आया है; परन्तु हिन्दुओंने अपने स्वर मुखरित करना आरम्भकर दिया है, यह शुभ संकेत हैं । – एक पाठक
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