घरका वैद्य – शकरकन्द (भाग-१)
जिस प्रकार आलू भारतमें एक लोकप्रिय शाक है, ऐसे ही आप सबने एक नाम और सुना होगा, जो सबको खानेमें अत्यधिक रुचिकर लगता है और उसका नाम है, शकरकन्द (अंग्रेजी नाम : Sweet Potato; संस्कृत नाम : मिष्टालुकम्) । शकरकन्द अपने स्वादके कारण अत्यधिक लोकप्रिय है । फलाहारियोंका यह बहुत ही उपयोगी आहार है । भारतमें बिहार और उत्तर प्रदेशमें विशेष रूपसे इसकी कृषि होती है । यह ऊर्जा उत्पादक आहार है ।
घटक : इसमें अत्यधिक मात्रामें ‘विटामिन’ रहते हैं, जैसे विटामिन ‘ए’ और सी’ । इसमें ‘स्टार्च’की मात्रा भी अधिक होती है । इसके अतिरिक्त इसमें ‘फाइबर’, ‘प्रोटीन’, ‘कार्बोहाइड्रेट’, ‘कैल्शियम’की मात्रा भी मिलती है ।
सेवन विधि : इसे आप कच्चा और पकाकर दोनों रूपमें खा सकते हैं । कुछ लोग इसे अग्निमें पकाते हैं और उसके पश्चात सेन्धा लवण, नींबू आदि लगाकर खाते हैं । जो शकरकन्द लाल होते हैं, उसके गूदे सूखे और ठोस होते हैं और जो शकरकन्द श्वेत और पीले रंगके होते हैं, उनके गूदेके भीतर अत्यधिक रस होता है । लाल शकरकन्द भी पाया जाता है एवं यदि इसे उबालकर खाते हैं तो इससे और अधिक पोषक तत्त्व मिलते हैं । सूखेमें यह खाद्यान्नका स्थान ले सकता है ।
आइए, शकरकन्दके लाभके विषयमें जानते हैं –
१. मधुमेहमें : मधुमेह रोगी मीठी वस्तुएं नहीं खानी चाहिए; परन्तु मीठा आलू मधुमेह वालोंके लिए बहुत ही लाभप्रद होता है । यह शरीरमें उचित स्रावके कार्यमें सहायक होता है, जिसके कारण रक्त शर्कराका स्तर सदैव सन्तुलित रहता है । शकरकन्दका प्रयोग यदि ‘कार्बोहाइड्रेट’युक्त भोजन या चावलके स्थानपर किया जाए तो शरीरको इससे कोई हानि नहीं होती है ।
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