शास्त्र वचन
मति कीरति गति भूति भलाई । जब जेहिं जतन जहां जेहिं पाई ॥
सो जानब सतसंग प्रभाऊ । लोकहुं बेद न आन उपाऊ ॥
अर्थ : उनमेंसे जिसने जिस समय जहां कहीं भी जिस किसीने, यत्नसे बुद्धि, कीर्ति, सद्गति, विभूति (ऐश्वर्य) और भलाई पाई है, सो सब सत्संगका ही प्रभाव समझना चाहिए । वेदोंमें और लोकमें इनकी प्राप्तिका दूसरा कोई उपाय नहीं है ।
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