उत्तिष्ठ कौन्तेय
कुपवाडामें सुरक्षाबलोंको देखते ही आतङ्कियोंने किए ‘हिन्दुस्तान जिन्दाबाद’के उद्घोष
कश्मीरमें भारतीय सुरक्षाबलोंने तीन वर्ष पूर्व ऐसे युवाओंको मुख्यधारामें ‘वापस’ लानेका अभियान आरम्भ किया था, जिन्हें घाटीमें सक्रिय आतङ्कवादी सङ्गठन दिशाभ्रमितकर आतङ्की बनाते हैं । इसमें उन्हें दक्षिण कश्मीरमें सफलता भी मिली है, जिसमें परास्त होकर पाकिस्तान अब उत्तरी कश्मीरमें युवाओंको दिशाभ्रमित करने लगा है । इसीके चलते कुपवाडामें सुरक्षाबलोंने तीन ऐसे जिहादियोंको बन्दी बनाया, जिन्होंने एक दिवस पूर्व सामाजिक जालस्थलपर अपने शस्त्रोंका प्रदर्शन किया था । उन पाकिस्तानी आतङ्कियोंकी भारतीय सुरक्षाबलोंको सामने देखते ही एकाएक विचारधारा परिवर्तित हो गई ! जैसे ही मुठभेड आरम्भ हुई, तीनों आतङ्की ‘हिन्दुस्तान जिन्दाबाद और पाकिस्तान मुर्दाबाद’का उद्घोष करने लगे ! इन तीनों युवकोंका अभिज्ञान आबिद अहमद वानी, जाकिर अहमद बट और जावेद अहमद डारके रूपमें हुआ है । तीनों कुछ दिवस पूर्व ही घरसे भागे थे । सुरक्षाबल उन्हें दिशाभ्रमित करनेवालोंकी शोधकर (खोज) रहे हैं । कुपवाडाके ‘एसएसपी’ श्रीराम दिनकरने बताया कि तीनों युवक ‘लश्कर’में सम्मिलित हुए थे; परन्तु जब घेराबन्दी आरम्भ हुई तो इन्हें समझ आ गया कि बचना कठिन है और ‘हिन्दुस्तान जिन्दाबाद व पाकिस्तान मुर्दाबाद’के उद्घोष करने लगे और आत्मसमर्पण कर दिया ।
आतङ्कियोंने आत्मसमर्पण तो कर दिया; परन्तु जो विचारधारा बाल्यकालसे ही मस्जिदों व मदरसोंद्वारा निर्मित की गई है, वह हटाना अत्यन्त कठिन है, भारतको यह भी ध्यानमें रखना होगा; अन्यथा आज इतने शिक्षित जिहादी आतङ्की क्यों बनते ? यदि भारत वास्तवमें परिवर्तन चाहता है तो सर्वप्रथम जिहादियोंकी आतङ्की शिक्षाके केन्द्र ‘मदरसों’को बन्द करे ! (२२.०५.२०)
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बोकारो और बहराइच की मस्जिदमें एकत्र जिहादियोंने किया पुलिसपर आक्रमण
‘कोरोना’ विषाणु सङ्क्रमणको देखते हुए सामूहिक नमाज निषेध होनेके पश्चात भी उत्तर प्रदेशके बहराइच और झारखण्डके बोकारोमें सामूहिक नमाजके लिए मस्जिदमें जिहादियोंद्वारा एकत्र होने और पुलिसकर्मियोंपर आक्रमण करनेके प्रकरण उजागर हुए हैं, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी गम्भीर रूपसे चोटिल हुए हैं ! मस्जिदके निकट नियुक्त पुलिसकर्मी रामप्रवेश और विनय कुमारने इन लोगोंको गृहबन्दीका (लॉकडाउनका) कहकर रोकनेका प्रयास किया तो इसी बातको लेकर जिहादियोंने पुलिसकर्मियोंपर पथराव कर दिया । इस प्रकरणके पश्चात कई आरोपियोंको, जिनमें कुछ महिलाए भी सम्मिलित हैं, पुलिसद्वारा बन्दी बनाया गया है ।
मस्जिदके निकट ही पुलिसकर्मी नियुक्त करनेकी आवश्यता क्यों होती है ? मस्जिदसे ही पुलिसकर्मियोंपर पथराव क्यों होते हैं ? मन्दिरोंके सामने यह स्थिति क्यों नहीं होती ? बहिर्मुख राजनेता अब स्वयंसे यह प्रश्न करें और बताएं कि सर्वधर्मसमभाव, जिसका राग आलापकर आपने जिहादियोंका साहस इतना बढा दिया है, क्या वास्तवमें वैसा होता है क्या ? (२२.०५.२०२०)
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मुसलमानोंको वैष्णो देवीके आशीर्वाद भवनमें दी जा रही ‘इफ्तार’
जम्मू स्थित माता वैष्णो देवीके मन्दिरके आशीर्वाद भवनमें मुसलमानोंको ‘रमजान’के माहके ‘रोजा’ रखनेवालोंको ‘इफ्तार’ दी जा रही है ! यह समाचार ‘श्राइन बोर्ड’के ‘सीईओ’ रमेश कुमारने दिया । उन्होंने कहा कि दूसरे प्रदेशोंसे आ रहे श्रमिकोंको वहां जांच और सङ्गरोधके (क्वारण्टीनके) लिए रखा जा रहा है । इस भवनकी क्षमता पांच सौ लोगोंको रखनेकी है । वहांके कर्मचारी रात्रिमें भी उन्हें भोजन करवा रहे हैं । रमेश कुमारके अनुसार अबतक इन लोगोंपर ८० लाख रुपए व्यय किया जा चुके हैं, जबकि ‘कोरोना’ महामारी हेतु भी डेढ कोटि रुपए व्यय हो चुके हैं ।
यही कारण है कि कोई भी देवालय शासनाधीन नहीं होना चाहिए । मस्जिदें अपने धनसे जिहाद करती हैं, महामारी फैलाती हैं और हिन्दू देवालय उन्हीं जिहादियोंको आश्रय देकर धन व्यर्थकर रहे हैं, जबकि यह बात भी सभी जानते हैं कि मस्जिदें इस प्रकार आपदामें भोजनका प्रबन्ध कदापि नहीं करेंगी ! हिन्दुओ, मन्दिरोंसे अब नेताओंका नियन्त्रण हटे, इस हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु प्रयासरत हों ! (२३.०५.२०२०)
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गोरखपुरकी मुसलमान शिक्षिकाने विद्यार्थियोंको संज्ञाके उदाहरणमें पाकिस्तानको बताया प्रिय राष्ट्र
गृहबन्दीके कारण भारतके विभिन्न विद्यालयोंद्वारा ‘ऑनलाइन’ (सांगणिक) माध्यमसे कक्षाओंका आयोजन किया जा रहा है । इसीके अन्तर्गत गोरखपुरके ‘जीएन पब्लिक विद्यालय’में भी कक्षा चारके विद्यार्थियोंको संज्ञा समझाते हुए उनकी शिक्षिका शादाब खानमने यह उदाहरण लिखा, ‘पाकिस्तान हमारा प्रिय राष्ट्र है, मैं पाकिस्तानी सेनामें भर्ती होऊंगा तथा रशीद मिनहद एक वीर सैनिक था ।’ कक्षा समाप्त होनेके पश्चात जब विद्यार्थियोंने अपने माता-पिताको इस विषयका ज्ञान कराया तो माता-पिताने कक्षाकी सामग्री जांचकर विवाद आरम्भकर दिया । विरोधाभास होता देख शिक्षिकाने सामग्रीको त्वरित हटाया; परन्तु उससे पूर्व ही अभिभावकोंने विवादित सामग्रीका छायाचित्र उतार लिया था; अतः प्रकरण सभीके समक्ष आ गया ।
ऐसे समाचार यह स्पष्ट करते हैं कि जिहादियोंकी मानसिकता सदैव राष्ट्र विरोधी रहती है तथा वे उसीका प्रचार करते हैं । ऐसे राष्ट्रविरोधियोंको शिक्षक पदपर नियुक्तकर विद्यार्थियोंका जीवन नष्ट नहीं करने दिया जा सकता है; अतः जिहादी इस पदके योग्य नहीं हैं, सभी विद्यालय इस विषयमें जांच करें व संज्ञान लें ! उत्तर प्रदेश शासन भी इस विषयमें त्वरित संज्ञान लेकर दोषीको कठोर दण्ड दे, ऐसी सभी राष्ट्रनिष्ठोंकी मांग है ! (२३.०५.२०)
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मुरादाबादमें जिहादी विधायक इकराम कुरैशीने गृहबन्दीके नियमोंका किया उल्लङ्घन
मुरादाबादमें सपा विधायक इकराम कुरैशी तथा उनके पुत्र उबैद कुरैशीने गृहबन्दीके नियमोंका उल्लङ्घनकर खाद्य पदार्थ वितरित किया । उन्होंने पिछले शुक्रवारको रमजानके उपलक्ष्यमें खाद्य पदार्थ वितरित किए तो वहां भीड एकत्र हो गई । भीड तब अनियन्त्रित भी हो गई, जब उन्होंने खाद्य पदार्थके साथ धन वितरित किया । वहां एकत्र लोग एक-दूसरेके निकट खडे थे तथा अधिकतरने मुखावरण (मास्क) भी नहीं लगाया था । उल्लेखनीय है कि मुरादाबाद एक ‘कोरोना’ ग्रस्त क्षेत्र है ।
धर्मान्धोंद्वारा पूर्वमें भी ‘मरकज’से निकलकर सर्वत्र इस महामारीको फैलाया गया है । ऐसे धर्मान्धोंको त्वरित बन्दी बनाया जाना चाहिए, चाहे वह विधायक ही क्यों न हो !
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देहलीके जामियासे पकडी गई आधुनिक युवती हिना इस्लामिक पुस्तकोंको पढकर बनी थी आतङ्की
जामिया क्षेत्रसे पुलिसद्वारा अपने पति जहानजेबके साथ पकडी गई हिना बेगकी पुलिसद्वारा की गई जांचसे ज्ञात हुआ है कि वह पुणे विश्वविद्यालयसे प्रबन्धनमें स्नातक हुई तथा उसने अनेक अन्तरराष्ट्रीय संस्थानोंमें कार्य किया है । हिनाका इस्लामके प्रति झुकाव तब हुआ, जब उसकी भेंट २०१५ में, अपने भाई जुबैरकी पत्नी डलिया सचदेवासे हुई, जो एक हिन्दू थी । ये दोनों इस्लामपर बहुत समयतक चर्चा करती थीं, जिसके फलस्वरूप उसने अनेक इस्लामकी पुस्तकें पढीं । इसके साथ वह जाकिर नाइक, दक्षिणी अफ्रीकाके मुफ्ती मेंक और मोहम्मद फैज औरंगाबादके वक्तव्य सामाजिक प्रसार माध्यमपर सुनती रही । जब हिनाने ‘आईएसआईएस’के बारेमें सुना तो उसने ‘फेसबुक’ और ‘गूगल’पर इनके बारेमें शोध करना और पढना आरम्भ किया, तब हिनाने कश्मीर मूलके जहानबेगसे ‘आईएसआईएस’की विचारधारा फैलानेके लिए विवाह किया । जहानबेग ‘इस्लामिक स्टेट’ ‘खुरासान माॅडयूल’के लिए नियुक्तियां करने लगा और ये देहलीमें बडे आक्रमणकी पूर्वसिद्धता कर रहे थे ।
जिन पुस्तकों और उनके विद्वानोंको पढकर व सुनकर एक सामान्य युवती इतनी आगे बढ जाए कि वह अनेक लोगोंको बमसे उडाकर मारनेका निश्चयकर ले तो विचार करें, वह कथित ‘धर्म’ और उसकी कथित ‘पुस्तकें’ मानवके योग्य होंगी क्या ?
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