शास्त्र वचन
नैकयान्यस्त्रिया कुर्याद् यानं शयनमासनम् ।
लोकाप्रासादकं सर्वं दृष्ट्वा पृष्ट्वा च वर्जयेत् ॥
अर्थ : अकेली पराई स्त्रीके साथ-साथ वाहनपर बैठने, लेटने और आसन ग्रहण करनेका कार्य न करें ! ध्यानसे देखकर तथा औरोंसे पूछकर उन बातोंको टालें, जो सामान्य लोगोंको अप्रिय लगती हों ।
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