उत्तिष्ठ कौन्तेय


जावेद अख्तरने गृह मन्त्रालयद्वारा नागरिकता संशोधन विधेयकके विरोधियोंको बन्दी बनानेको लेकर किया व्यङ्गय
        जावेद अख्तरने सामाजिक जालस्थल ‘ट्विटर’पर टिप्पणी करते हुए लिखा है कि जब राष्ट्र ‘कोरोना’से युद्धकर रहा है, तब गृहमन्त्रालयके आदेशानुसार देहली पुलिस, नागरिकता संशोधन विधेयकके विरोधमें शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करनेवाले व्यक्तियोंको बन्दी बनानेमें व्यस्त है; कदाचित उनकी प्राथमिकताएं राष्ट्रसे भिन्न हैं  ।  उनके इस वक्तव्यपर अनेक व्यक्तियोंने प्रश्न करना आरम्भकर दिया व उनसे पूछा कि क्या शासनको एक समयपर केवल एक ही कार्य करना चाहिए और अपराधियोंको दण्ड देनेका विचार भी त्याग देना चाहिए ? उल्लेखनीय है कि कुछ दिवसोंसे देहली पुलिस फरवरी माहमें हुए उपद्रवके आरोपियोंकी जांचकर रही है  ।
             नागरिकता संशोधन विधेयकके उपद्रवको शान्तिपूर्ण प्रदर्शन बताना जावेद अख्तरकी जिहादी मानसिकताका परिचायक है, ऐसे लोगोंका सभीने मुखर होकर विरोध करना चाहिए व इनका प्रतिकार करना चाहिए ! (२६.०५.२०)
**********
 उत्तर प्रदेशमें गृहबन्दीमें ‘नमाज’ पढनेके कारण जिहादियोंको  बनाया गया बन्दी
    इस महामारीके विकट समयमें जब शासनने सारे देवालय बन्द किए हैं, सभी मुसलमानोंको घरपर नमाज पढनेके आदेश हैं, ऐसे विकट समयमें अनेक स्थानोंपर ईदकी सामूहिक नमाज पढकर नियमका उल्लंघन किया गया  ।
 * उत्तरप्रदेशके औरैया जनपदके अजीतमल क्षेत्रमें सोमवार २५ मई २०२० को सामूहिक नमाज पढनेके अपराधमें २६ लोगोंको बन्दी बनाया गया है, जबकि ८ लोग बंदी बनानेसे पूर्व पलायनकर गए  ।  कोरोनाके कारण नियम १४४ के अन्तर्गत सभीको घरपर नमाज पढनेके आदेश थे  ।
* उत्तरप्रदेशके मुजफ्फरनगरमें भी खतौलीके कुछ लोग नमाज पढने एकत्रित हुए  ।  वहां पुलिसने ३० लोगोंको अपनी अभिरक्षामें (हिरासतमें) लिया  ।
*  रांचीके पतसा गांवकी मस्जिदमें तो सामाजिक दूरीका ध्यान भी नहीं रखा गया  तथा सामूहिक नमाज पढी गई  ।  इस अपराधमें वहां ७० व्यक्तियोंको बन्दी बनाया गया  ।
सम्पूर्ण देशमें महामारीसे ग्रसित रोगियोंकी संख्यामें निरन्तर वृद्धि होनेपर भी ये धर्मान्ध इस महामारीके प्रति सतर्क नहीं है और अभी भी  देशमें सर्वत्र इसे  फैला रहे हैं  ।  जिन्हें शीघ्र उचित दण्ड दिया जाए जिससे इनमें कुछ भय व्याप्त हो  ।
**********
मुसलमान महिलाओंको उकसाने, उपद्रवोंके लिए भडकानेके लिए ‘पिंजरा तोड’की नताशा, देवांगनासे पूछताछमें कई रहस्य खुले 
      स्वयंको महिलावादी संगठन बतानेवाली ‘पिजरा तोड’की नताशा नरवाल व देवांगना कलिताकी देहलीमें हुए हिन्दू विरोधी उपद्रवोंमें मुख्य भूमिका रही है  ।  ये दोनों उत्तर-पूर्वी देहलीके जाफराबादमें हिंसा भडकाने, महिलाओंको उकसाकर उनसे यातायात बाधित करवाने अर्थात चक्काजाम करवाने तथा विधिव्यवस्था बिगाडनेका कार्यकर रही थीं  ।  दोनोंका कार्य जाफराबादतक ही सीमित नहीं था; अपितु इन्होंने कई अन्य क्षेत्रोंमें मुसलमानोंको साम्प्रदायिक उपद्रवोंमें भाग लेनेको उकसाया ।  दोनोंको रविवार (मई २४, २०२० को) ‘वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग’द्वारा स्थानीय न्यायालयके समक्ष प्रस्तुत किया गया था  ।  न्यायालयने इन दोनोंको २ दिनकी पुलिस अभिरक्षामें भेज दिया था, जहां ‘क्राइम ब्रांच’ने इनसे पूछताछ की  ।  रविवारको ‘मजिस्ट्रेट’ अजीत नारायणने ये कहते हुए इन दोनोंको प्रतिभूतिपर मुक्तकर दिया कि आरोपितोंका समाजमें अच्छी प्रभाव है और वे अधिक पढी-लिखी भी हैं  ।  वे पुलिसके साथ जांचमें सहयोग करनेके लिए सज्ज (तैयार) हैं  ।
        आज हिन्दुओंमें धर्माभिमान व धर्मशिक्षण न होनेके कारण ही वे हिन्दू होते हुए भी हिन्दू विरोधी उपद्रव करवा रहे हैं  ।  न्यायालय इनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही करनेके स्थानपर इन्हें समाजमें अच्छी छवि, होनेके कारण छोड रहा है  ।  वैसे समाजमें प्रभाव तो रामपाल और राम-रहीम इंसाका भी अल्प नहीं था तो इस कुतर्कके आधारपर क्या उन अपराधियोंको भी मुक्त कर देना चाहिए !  इस प्रकारकी न्यायिक व्यवस्थासे हम क्या अपेक्षा रख सकते हैं ? इस व्यवस्थाको सुधारनेके लिए हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अति आवश्यक है  ।  (२५.०५.२०२०)
**********
तिरुपति बालाजी मन्दिरकी सम्पत्ति विक्रयपर रोक, श्रद्धालुओंने किया बाध्य
        श्रद्धालुओंद्वारा बाध्य होनेपर आंध्र प्रदेश शासनके जगनमोहन रेड्डीने तिरुपति मन्दिरकी ५० सम्पत्तियोंको अन्तिम निर्णय आनेतक विक्रयपर रोक लगाई है  ।  रेड्डीने अपने मामा सुब्बा रेड्डीको मन्दिरके न्यासका मुखिया बनाया था, जिसका श्रद्धालुओंने कडा विरोध किया  ।  रेड्डी शासनने अपना बचाव करते हुए पिछले शासक चंद्रबाबू नायडूपर दोष मढा  ।  उन्होंने मन्दिरके न्यासको पुनर्विचार करने हेतु कहा  ।  उन्होंने न्यासके निदेशक मण्डलको भी निर्णय शीघ्रतासे लेने लिए भी कहा  ।  यह निर्देश शासनके मुख्य सचिव प्रवीण प्रकाशने दिया  ।  अधिवक्ता सुब्रह्मण्यम स्वामी सहित कुछ अन्य वरिष्ठ लोगोंने विरोध जताया  ।  उन्होंने मन्दिरकी सम्पत्तिके साथ शासनका खिलवाड बताया  ।  मन्दिरके न्यासने इस सम्पत्तिको निष्प्रयोजन सम्पत्ति बताकर विक्रय करनेका निर्णय लिया था  ।  यह सम्पत्ति मन्दिरसे दूर, तमिलनाडु ऋषिकेश और आंध्र प्रदेशमें है  ।  मन्दिरकी स्थितिसे दूर होनेके कारण न्यास प्रबन्धकोंको नियन्त्रण करनेमें कठिनाई हो रही थी  ।  इस सम्पत्तिमें कृषि योग्य एवं निवास हेतु प्रासादस्थल भी हैं  ।  भाजपा सांसद राकेश सिन्हाने मन्दिर-मण्डलको पत्र लिखकर आपत्ति की और कहा कि यह जो सम्पत्ति दूर है, वह श्रद्धालुओंकी भावनाओंसे जुडी हुई है इसलिए अनुरक्षणमें उन्हींकी सहायता ली जानी चाहिए  ।  उल्लेखनीय है कि तिरुपति स्थित गोविंदराजा मन्दिरमें तीन बार सोनेके मुकुट चोरी हो चुके हैं, जो अत्यधिक मूल्यवान थे  ।  इन मुकुटोंमें हीरे और अनमोल रत्न जडे हुए थे  ।  यह चोरी भी उसी समय हुई थी, जब उनका मामा सुब्बा रेड्डी इस मन्दिरके न्यासका मुखिया बना हुआ था  ।  १९७४ से २०१६ तक इस मन्दिरकी १२९ सम्पत्तियोंको बेचा जा चुका है  ।
         वामपन्थियोंद्वारा व ईसाईपक्षी लोगोंद्वारा हिन्दूधर्मको नष्ट करनेके लिए उनकी सम्पत्तिको भी भूमि जिहादद्वारा नष्ट किया जा रहा है  ।  क्या ये कांग्रेस शासक, किसी मुस्लिम अथवा ईसाईकी सम्पत्तिको मोल-तोलकर बेच सकते हैं  ? सभी हिन्दुओंको संगठित होकर ऐसे प्रकरणोंका विरोध करना चाहिए  ।  (२६.०५.२०२०)
**********
ईदकी नमाजको लेकर दो पक्षोंके मध्य पथराव और ‘चाकूबाजी’, कई महिलाओं समेत अनेक व्यक्ति घायल
      मेरठके लिसाडी गेट थाना क्षेत्र, लक्‍खीपुराके निवासी निजाम मलिकका पडोसी रियाज मलिक सोमवारको अपने निवासमें ईदकी नमाज पढा रहा था  ।  उसके बेटे हाफिज अनसको नमाज पढानेसे रियाजने मनाकर दिया  ।  इस बातको लेकर दोनोंके मध्य विवाद हो गया और हिंसातक हो गई !
           गृहबन्दीके मध्य अपने घरमें अन्य लोगोंको नमाज पढवाना यह दर्शाता है कि धर्मान्धोंके मनमें प्रशासनका कोई भय नहीं है और इसी बातका दुष्परिणाम अब समस्त देशवासी भुगत रहे है  ।  (२५.०५.२०)
**********
अभद्र टिप्पणी करनेके प्रकरणमें अलका लांबाके विरुद्ध प्राथमिकी प्रविष्ट
 प्रधानमन्त्री श्री. नरेंद्र मोदी, गृहमन्त्री श्री. अमित शाह और मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथपर अभद्र टिप्पणी करनेके प्रकरणमें अलका लांबाके विरुद्ध उत्तर प्रदेशके बाल अधिकार संरक्षण आयोगकी सदस्या प्रीति वर्माने प्राथमिकी लिखवाई है  ।  अलका लांबाके विरोधमें २५ मईको भादविकी धारा ५०४, ५०५ (१) (बी), ५०५ (२) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम २००८ की धारा ६७ के अनुसार प्राथमिकी प्रविष्ट की गई है  ।  इससे पहले कुलदीप सिंह सेंगरकी पुत्री ऐश्वर्याने भी अलका लांबाके विरोधमें उन्नावमें प्राथमिकी लिखवाई थी  ।  ऐश्वर्याने कहा कि अलका लांबाने भ्रामक जानकारी फैलाई । अलका लांबाके जिस ‘ट्वीट’पर यह कार्यवाही हुई उसमें लिखा था कि बलात्कारियोंको कोई भी न्यायालय अधिक दिनतक कारावासमें नहीं रख सकता, यदि उनपर भाजपा नेताओंका हाथ हो । इसके पश्चात न्यायपालिकाको भला-बुरा कहते हुए लिखा कि उच्च न्यायालयके न्यायाधीशने यह निर्णय देकर बस अपने प्राण बचाए हैं ।  इसके साथ उसने केन्द्रीय मन्त्री स्मृति ईरानीको बलात्कारी नेताकी मुक्तिकी बधाई दी ।
            इस प्रकरणसे स्पष्ट होता है कि किस प्रकार विपक्षकी महिला नेत्रियोंका भी बौद्धिक पतन हो रहा है ! उनसे किसी प्रकारकी मानमर्यादाकी अपेक्षा रखना मूर्खता है ।  इनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही होनी चाहिए । (२६.०४.२०२०)
**********
८३ विदेशी तबलीगी जमातियोंपर वैधानिक कार्यवाही, साकेत न्यायालयमें २० आरोपपत्र प्रविष्ट तथा १४ और प्रविष्ट करनेकी सिद्धता 
        निजामुद्दीन मरकज प्रकरणमें देहली पुलिसने विदेशी जमातियोंके विरुद्ध कडे पग उठाते हुए, न्यायालयमें आरोपपत्र (चार्जशीट) प्रविष्ट किए हैं । बताया जा रहा है कि इस आरोपपत्रमें मरकज न्यास प्रबन्धनका नाम भी सम्मिलित है ।
इनपर यात्रा नियमोंके उल्लंघन, धारा १४४ का उल्लंघन तथा महामारी अधिनियमके उल्लंघनके गम्भीर आरोप हैं ।
ज्ञातव्य है कि ये लोग भारतमें  पर्यटनके मिथ्याहेतुसे (बहानेसे) आए और अवैध रूपसे मरकजके कथित धार्मिक समारोहमें भाग लेते रहे तथापि विभिन्न सुरक्षा तथा गुप्तचर विभागोंकी दृष्टिसे ये बचे रहे !
      यह सन्तोषका विषय है कि इनपर आरोप निश्चित किए गए हैं; परन्तु जबतक इनका मुखिया साद बन्दी नहीं बनाया जाता, यह कार्यवाही भी सन्देहकी दृष्टिसे ही देखी जाएगी; अतः देहली पुलिस इनके नेता सादको भी शीघ्र बन्दी बनाए !
**********
जिहादियोंद्वारा हिन्दू देवताओंकी की गई इस जिहादी विडम्बनासे अनभिज्ञ विवेकहीन हिन्दू !
      एक सामाजिक जालस्थलपर एक समाचारमें दिखा कि एक पोटलीमें (पाउचमें) ‘जय मां तुलसी’ नामक तमाखुका (तम्बाकूका) निर्माण और विक्रय कोई ‘हुसैन सेल्स कार्पोरेशन’, कायमगंज उत्तर प्रदेशद्वारा किया जा रहा है । इस संस्थानका स्वामी निश्चित ही मुस्लिम ही होगा और वह हिन्दू देवीके नामपर तमाखुका (तम्बाकूका) विक्रयकर रहा है । इसपर अधिकांश लोगोंने ध्यान नहीं दिया और इस तथ्यको उपेक्षितकर दिया । बात केवल किसी व्यसनी या तामसिक उत्पादके नामकरणकी नहीं है; अपितु हिन्दुओंकी चेतना, आज किस स्तरपर सुप्तावस्थामें है ?, इस तथ्यकी ओर भी संकेत करती हैं । कोई विधर्मी व्यक्ति जो हिन्दू देवी-देवताओं और सनातन प्रतीकोंके अपमानकी दृष्टिसे, जानबूझकर अपने उत्पादका नाम ‘जय मां तुलसी’ रखता है और उसे बिना रोक-टोकके हिन्दुओंके देशमें ही विक्रयकर पाता है, क्या यह तथ्य आश्चर्यजनक नहीं है ? पहली बात तो यह कि ऐसा अधिकार किसी जिहादी व्यक्तिको तो दूर, किसी सनातनी व्यक्तिको भी नहीं है कि वह विष्णुप्रिया वृन्दा अर्थात मां तुलसी या अन्य किसी देवी-देवताके नामपर इस प्रकारका कोई उत्पाद बनाए या विक्रय करे ! और ऐसी घटनाओंको सामान्य समझनेकी भूल ही अबतक हिन्दू समाज करते आया है और यही सामान्य रोग अब एक विकराल महामारी बन चुका है ।
       योग्य विधान न होनेके कारण शासन सम्भवतः कोई कठोर कार्यवाही न कर पाए; परन्तु धर्मनिष्ठ हिन्दू इस विषयको अपने स्तरपर विभिन्न मंचोंसे उठाकर तथा अपने स्वरोंको मुखरितकर ऐसे कुकृत्य करनेवालोंको हतोत्साहित अवश्यकर सकते हैं । सभी हिन्दू इस प्रकारका कोई भी तामसिक उत्पाद करें न क्रय करें ! ऐसी आपसे अपेक्षा है !-दिनेश दवे


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution