श्रीगुरु उवाच


चिरन्तन आनन्दकी प्राप्ति हेतु साधनाके अतिरिक्त और कोई पर्याय नहीं हैं ।  ईश्वरपर तथा साधनापर विश्वास न हो, तब भी शाश्वत आनन्दकी इच्छा प्रत्येकजनको होती है ।  वह केवल साधनासे प्राप्त होता है, यह ज्ञात होनेपर, साधनाका पर्याय न होनेसे व्यक्ति साधनाकी ओर मुडता है ।  – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
साभार : मराठी दैनिक सनातन प्रभात (https://sanatanprabhat.org)


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