शास्त्र वचन


पुण्यंप्रज्ञावर्धयतिक्रियमाणंपुन: पुन: । 
वृद्धप्रज्ञ: पुण्यमेवनित्यमारभतेनर: ॥ – विदुर नीति
अर्थ : बार-बार क्रियमाणद्वारा पुण्य करनेसे मनुष्यकी प्रज्ञा बढती है और जिसका विवेक जाग्रत होता है, ऐसा व्यक्ति सदैव पुण्य कर्म करता है ।


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