घरका वैद्य – कमल पुष्प (भाग-१)
आजसे हम आयुर्वेद अन्तर्गत पुष्पों व उनसे होनेवाले अकल्पनीय लाभके विषयमें यह शृंखला आरम्भ करने जा रहे हैं, जिसके अन्तर्गत आज सर्वप्रथम हम कमलके पुष्पके विषयमें जानेंगें ।
कमलका पुष्प कीचडमें खिलता है और अत्यधिक सुन्दर होता है । कमलके पुष्पका प्रयोग प्रायः पूजा-पाठमें किया जाता है; परन्तु क्या आप जानते हैं कि कमलका फूल एक उत्तम औषधि भी है और रोगोंकी चिकित्सामें कमलके पुष्पके अनेक लाभ हैं । अत्यधिक तृष्णाकी (प्यास) समस्या, जलन, मूत्रसे सम्बन्धित रोग, कफके दोष, अर्श (बवासीर) आदिमें कमलके पुष्पसे लाभ मिलता है ।
कमल एक पुष्प है, जो पानीमें उत्पन्न होनेवाली वनस्पति है । इसकी तीन प्रजातियां होती हैं, जो इस प्रकार हैं –
१. कमल : इसके पत्ते चौडे होते हैं, जो थालीकी भांति पानीमें तैरते हुए दिखाई देते हैं । इसके पुष्प अत्यन्त सुन्दर व बडे होते हैं । रंग-भेदके अनुसार कमल कई प्रकारके होते हैं ।
२. कुमुद : कुमुदनीका रूप कमलके जैसा ही होता है; परन्तु इसके पत्ते कमलके पत्तेसे छोटे, चमकीले, स्निग्ध (चिकने), जलकी सतहपर तैरनेवाले होते हैं । इसके पुष्प श्वेत (सफेद) तथा ५-१२ से.मी. व्यासके होते हैं ।
३. उत्पल (नीलकमल) : इसके पत्ते पानीकी सतहपर तैरते हैं, तथा इसके पुष्प नीले रंगके होते हैं ।
अन्य भाषाओंमें कमलके नाम : कमलका वानस्पतिक नाम Nelumbo nucifera Gaertn. (निलम्बो न्यूसीफेरा), Syn-Nelumbium speciosum Willd, Nelumbium nelumbo Druce है । यह Nymphaeaceae (निंफिएसी) कुलका है । हिन्दीमें इसे कमल; अंग्रेजीमें लोटस, इण्डियन लोटस, सेक्रेड लोटस, संस्कृतमें पद्मम्, नलिनम्, अरविन्दम्, सरसिज, कुशेशयम् एवं राजीवम् आदि नामोंसे जाना जाता है ।
आज हम आयुर्वेद अन्तर्गत कमल पुष्पसे होनेवाले शारीरिक लाभके विषयमें जानेंगें ।
श्वेत केशकी (सफेद बालोंकी) समस्यामें : नीलकमल तथा दूधको मिला लें एवं इसे मिट्टीके पात्रमें १ माहतक भूमिमें दबाकर रखें । इसे निकालकर बालोंमें लगानेसे बाल स्वस्थ होते हैं एवं बालोंका पकना न्यून (कम) होने लगता है ।
आधासीसीमें (अर्धावभेदक या अर्धकपारीमें) : अनन्तमूल, कूठ, मुलेठी, वच, पिप्पली और नीलकमल लें ! इन छह द्रव्योंको कांजीमें पीसकर, थोडा एरण्ड तेल मिला लें ! इसका लेप करनेसे आधासीसी (अधकपारी) तथा सूर्य उगनेके पश्चात होनेवाली सिरकी वेदनामें लाभ मिलता है ।
वमनमें : कमलके भुने हुए छिलके रहित बीजोंको १-२ ग्रामकी मात्रामें लें ! इसमें मधु मिलाकर सेवन करनेसे वमन (उल्टी) बन्द हो जाता है ।
सिरकी वेदनामें : शतावरी, नीलकमल, दूब, काली तिल तथा पुनर्नवा लें ! इन ५ द्रव्योंको जलमें पीसकर लेप करनेसे सभी प्रकारकी सिरकी वेदनामें लाभ मिलता है ।
गंजेपनकी समस्यामें : समान भागमें नीलकमल, बहेडा फल मज्जा, तिल, अश्वगंधा, अर्ध-भाग प्रियंगुके फूल तथा सुपारी त्वचाको पीस लें ! इसे सिरमें लेप करनेसे गंजेपनकी समस्यामें लाभ होता है ।
नेत्र रोगमें : कमलके पुष्पसे दूध निकाल लें ! इसे काजलकी भांति नेत्रमें लगानेसे नेत्रके रोग ठीक होते हैं ।
दांतोंके रोगमें : कमलकी जडको चबानेसे दांतोंके कृमि (कीडे) समाप्त होते हैं । उत्तम परिणामके लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सकसे अवश्य परामर्श लें !
खांसीके रोगमें : १-२ ग्राम कमलकी बीजके चूर्णमें मधु (शहद) मिलाकर सेवन करें ! इससे पित्त दोषके कारण होनेवाली खांसी ठीक हो जाती है ।
गुदाभ्रंश रोगमें : कमलके १-२ ग्राम पत्तोंके चूर्णमें शक्कर या खांड मिला लें ! इसे खानेसे गुदभ्रंशमें (गुदाका बाहर आना) लाभ होता है ।
Leave a Reply