उत्तिष्ठ कौन्तेय
पाताललोकमें सिखोंको दिखाया बलात्कारी : इसके निर्देशकों और अमेजनको वैधानिक ‘समन’
अमेजन ‘प्राइम’पर प्रसारित होनेवाली शृंखला (सीरिज) ‘पाताललोक’में सिक्खोंको बलात्कारी बताया गया है । इसकी एक कडीमें दिखाया गया है कि एक सिख एक वृद्ध महिलाके साथ कई अन्य समुदायके सदस्योंकी उपस्थितिमें बलात्कारकर रहा है, जहां उसके पति और ससुर भी उपस्थित हैं । इस दृश्यसे सिखोंकी भावनाओंको ठेस पहुंची है । देहली सिख गुरुद्वारा प्रशासन समितिके (DSGMC) अध्यक्ष मनजिंदर सिंह ‘सिरसा’ने अमेजन ‘सेलर सर्विसेज’ और पाताललोकके निर्देशक अविनाश अरुण तथा प्रोसित रॉयको वैधानिक ‘समन’ (वैधानिक कार्यवाहीकी सूचनाका पत्र) भेजा है । ‘समन’में आरोप लगाया गया है कि पाताललोकका दृश्य स्पष्ट रूपसे अवैध और धार्मिक संस्कृति और आस्थाका दुरुपयोग है यह न केवल अपमानजनक है, वरन इस दृश्यसे पूरे सिख समुदायमें आक्रोश है । ‘DSGMC’ने ‘समन’में तत्काल क्षमा मांगनेकी मांगकी है, साथ ही इस बातकी सुनिश्चितता की मांग भी की है कि वे आगेसे ऐसी भ्रामक सामग्री नहीं बनाएंगे जो धार्मिक भावनाओंको आहत करती हो ।
उल्लेखनीय है कि बीजेपीके विधायक नन्दकिशोर गुर्जरने इसकी निर्मात्री अभिनेत्री अनुष्का शर्माके विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट कराया था कि उनका चित्र बिना अनुमति प्रयोग किया गया है । इस परिवादके पश्चात निर्माताने उनका चित्र हटा दिया था ।
इससे पूर्व, अधिवक्ता वीरेन सिंह गुरुंगने भी अनुष्का शर्माको वैधानिक ‘समन’ भेजा था । जिसमें एक दृश्यमें पूछताछके समय एक महिला पुलिस नेपाली चरित्रपर जातिवादी शब्दोंके साथ ऐसे ‘अपशब्दों’का प्रयोग करती है, जिसे स्वीकारा नहीं जा सकता ।
ऐसी विवादास्पद जालस्थल शृंखलामें धारावाहिक बनाकर पाताललोकके निर्माता, निर्देशक समाजको क्या बताना चाहते है ? इसमें हिन्दुओंके प्रति घृणाको बढावा व मुसलमानोंको ‘बेचारे’ जैसा दिखाया गया है । समाजके अन्य समुदायोंको भी इस शृंखलासे आपत्ति है । यह केवल धन कमाने व प्रख्याति पानेका साधन मात्र है । समाज व देशके समुदायोंकी भावनाएं कितनी भी आहत हों, इससे उन्हें अन्तर नही पडता । प्रशासनको इसे कठोरतासे प्रतिबन्धित करना चाहिए ।
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संभलके गांव रसूलपुर सरायमें पाया गया पुजारीका मृत शरीर, बताई जा रही आत्महत्या
उत्तर प्रदेशके संभल जनपदके शिव मन्दिरमें एक पुजारी और उनके बेटेको मृत पाया गया । नाखासा थाना क्षेत्रके रसूलपुर सराय गांवमें पुलिसद्वारा यह प्रकरण प्रविष्ट किया गया है । मृत्युका समाचार मिलनेपर ग्रामीण बहुत संख्यामें वहां एकत्रित हो गए । पुलिसने उन दोनोंके शवोंको शव-परीक्षणालयके (पोस्टमार्टम) लिए भेज दिया है । शिव मन्दिरमें रहनेवाले ६० वर्षीय पुजारी अमर सिंह और उसके पुत्र जयवीर जो २१ वर्षका बताया जा रहा है, उसका शव शुक्रवारके दिनके समय सन्दिग्ध अवस्थामें पाया गया । पुलिसका कहना है कि पुजारी पिता अपने पुत्रके साथ रहता था । आज भी वे वहींपर सोये थे । पुलिसद्वारा उसके पुत्रको विक्षिप्त बताया जा रहा है । पुलिसका है कि उन दोनोंने आत्महत्या की होगी । दोनोंके गलेपर कोई चिह्न पाए जानेकी बात बताई गई है । ऊत्तर प्रदेशके मुख्यमन्त्री योगीजीने इस घटनाको संज्ञानमें लिया है और उन्होंने जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियोंको भी शीघ्रातिशीघ्र विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने हेतु निर्देश दिया है तथा दोषियोंके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाही करनेका आदेश दिया है ।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले उत्तर प्रदेशके बुलंदशहरके अनूपशहर क्षेत्रमें भी दो साधुओंकी निर्मम हत्या की गई थी । मन्दिरमें सो रहे दोनों साधुओंको शस्त्रोंसे काटकर मार डाला गया था । किन्तु वहांके वासियोंने अपराधियोंको पकड लिया था और पुलिसने उन्हें बन्दी बना लिया था । आए दिन कहीं न कहीं साधू या पुजारीकी हत्याके षड्यन्त्र भिन्न-भिन्न प्रकारसे देखनेमें आ रहे हैं । यह सब हिन्दुओंकी सुप्तावस्थाका परिणाम है । उत्तर प्रदेश शासनने जैसे त्वरित संज्ञान लिया है, यह अन्य राज्यों भी सीखना चाहिए । (३०.०५.२०२०)
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गोहत्यारोंपर रासुका लगाकर बदायूं पुलिसने दिया स्पष्ट सन्देश ‘गाय नहीं कटने देंगे’
ये वह कार्यवाही है जिसने एक बार देशके मनकी बातको अपने आप बिना कहे कह डाला है । ‘गोतस्करी’ और गोहत्या कभी पूरे उत्तर प्रदेशके लिए एक बडी चुनौती बनी हुई थी, यह वो अपराध था जिसके चलते आए दिन साम्प्रदायिक तनाव भी फैल जाया करता था । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार त्रिपाठी जनपद बदायूंके निर्देशनमें गोवंशकी हत्या करनेवाले अपराधोंकी रोकथाम हेतु चलाए जा रहे अभियानके अन्तर्गत प्रभारी निरीक्षके सहसवान हरेन्द्र सिंहके नेतृत्वमें थाना सहसवान पुलिस दलद्वारा विगत दिनों ग्राम जोनेराके पास जंगलमें गोवंशकी हत्याकर रहे तीन गोहत्यारोंका बन्दी बनाया है । इनके नाम इंतजार पुत्र इब्राहिम, छुटन्नी पुत्र अशफाक और कप्तान पुत्र शेर मोहम्म्द बताए गए हैं । इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा विधानके (कानून) अन्तर्गत बन्दी बनाकर कारावास भेज दिया गया है ।
उत्तर प्रदेशके प्रशासन एवं पुलिस विभागकी यह कार्यवाही अति सराहनीय है । हम सब हिन्दुओंका यह दायित्व बनता है कि हम उत्तर प्रदेशके प्रशासन एवं पुलिस विभागको साधुवाद कहें और उन्मुक्त हृदयसे आभार व्यक्त करें ! इस प्रकरणसे तुष्टीकरणकी राजनीति करनेवालोंको कुछ सीख मिले और वह सब भी गोवधके विरुद्ध कार्य करें ! (३०.५.२०२०)
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धर्मान्द्ध नेताओंद्वारा सामाजिक दूरीका ध्यान न रखते हुए बैठक व विवाहका आयोजन
कानपुर उत्तरप्रदेशमें कोरोना संक्रमित स्थानपर सपा विधायक इरफान सोलंकीद्वारा सामाजिक दूरीका ध्यान न रखते हुए बैठक करनेकी घटना सामाजिक जालस्थानपर प्रदर्शित हो रही है । जिसमें सपा विधायक इरफान सोलंकी ‘कुर्सी’पर बैठे दृष्टिगत हो रहे हैं । उनके पास कुछ पुलिसवाले तथा सहस्रोंकी संख्यामें जनता सामाजिक दूरी न बनाते निकट खडी दृष्टिगत हो रही है । यह बैठक चमनगंज कानपुरमें हुई जो एक कोरोना संक्रमित स्थान है । स्थानीयजनने विधायकसे कहा था कि पुलिस वहां उनके साथ दुर्व्यवहारकर उन्हें कष्ट दे रही है । इस घटनाके ज्ञात होते ही एक अधिकारी त्रिपुरारि पांडेय पुलिस बलके साथ उस स्थानपर पहुंचे ।
इससे पूर्व अलीगढमें बसपा नेता मोहम्मद जाहिदके बेटेके निकाह समारोहमेंभी लोगोंमें सामाजिक दूरी तथा गृहबन्दीका ध्यान नहीं रखा था । निकाहमें नर्तकियोंसे भी नृत्यभी करवाया गया था । २६ मईको घटित इस घटनापर जाहिद तथा अन्यपर वैधानिक कार्यवाही की जा रही है ।
धर्मान्धोंद्वारा सामाजिक दूरीका ध्यान न रखते हुए कोरोना महामारीको सर्वत्र फैलानेकी अनेकानेक घटनाएं होती रही हैं । आज जब रोगियोंकी संख्या १६०००० के पार हो चुकी है । इन्हें कडा दण्ड न देनेपर यह संक्रमण महामारीका विस्फोटकर, अनेक प्राणोंकी आहुति लेगा ।
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उत्तर प्रदेशके मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथजीका शासन करेगा ८०० किलोमीटरके मार्गपर आयुर्वेदिक औषधीय पौधोंका रोपण
उत्तर प्रदेशके मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथजीके शासनने अपने प्रदेशमें ८०० किलोमीटरके मार्गपर ‘हर्बल बेल्ट’ अर्थात आयुर्वेदिक औषधीय पौधोंके रोपणकी शृंखलाका निर्णय लिया है । यह जानकारी उत्तर प्रदेशके उपमुख्यमन्त्री केशव मौर्यने साझा करते हुए कहा कि इसके अन्तर्गत औषधीय वनस्पति जैसे पीपल, नीम, ब्राह्मी व अश्वगंधा आदि पौधोंका रोपण हमारे प्रदेशके राष्ट्रीय व राजकीय मार्गोंके दोनो ओर किया जाएगा । उन्होंने यह भी साझा किया कि इसका उद्देश्य केवल औषधियोंको प्राप्त करना ही नहीं; अपितु मार्गोंका सौन्दर्यीकरण, प्रदूषण नियन्त्रण, मिट्टीके कटावको रोकना व वर्षाके जलका संरक्षण भी है ।
योगी आदित्यनाथजीका यह निर्णय प्रशंसनीय है । भारतकी औषधीय वनस्पतियोंके गुण सम्पूर्ण विश्वमें अपना ध्वज फहरा चुके हैं; परन्तु दुर्भाग्यसे यहांके शासकोंने इनके प्रोत्साहन हेतु कभी उचित प्रयास नहीं किए । आनेवाले हिन्दू राष्ट्रमें केवल आयुर्वेदिक औषधियां ही रोगोंके उपचार हेतु उपलब्ध होंगी और ‘एलोपैथी’का प्रभाव नगण्य होगा । (३०.०५.२०)
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कोरोनो वायरसके सन्देहपर मुसलमानको ६ कब्रिस्तानोंने गाडनेसे मना करनेपर, हिन्दुओंने श्मशान घाटमें दिया स्थान
तेलंगानाके रंगारेड्डी जनपदमें दस वर्ष पूर्व रहने आए, ५५ वर्षीय मुसलमान मोहम्मद खाजाकी हृदयाघातसे मृत्यु हो गई । परिवारवाले शव लेकर समीपके कब्रिस्तान पहुंचे तो कोरोनोके रोगी होनेका सन्देह होनेपर उन लोगोंको यह कहकर भगा दिया गया कि इससे कोरोना विषाणु फैल सकता है । पीडित परिवार शवको लेकर एकके पश्चात दूसरे और इस प्रकारसे भिन्न-भिन्न स्थानोंके ६ कब्रिस्तानोमें गए; किन्तु सभीने शवको गाडनेसे मनाकर दिया । तत्पश्चात दो हिन्दू युवक सन्दीप और शेखरकी सहायतासे शवको गाडनेके लिए श्मशान घाटमें भूमि उपलब्ध कराई ।
यही ‘भाईचारा’ दिखा-दिखाकर आज हिन्दुओंकी यह दुर्दशा हो गई है ! क्या ये जिहादी लोग अपने कब्रिस्तानमें किसी चिताको जलने देंगे । कभी नहीं, भविष्यमें इसकी आडमें और भी शव गाडकर, उस शमशान घाटपर भी ‘भूमि जिहाद’द्वारा अतिक्रमण किया जाएगा । सभी हिन्दुत्ववादियोंको तेलंगाना राज्य ‘वक्फ बोर्ड’से कहकर शवको अन्य किसी कब्रिस्तानमें गाडनेको कहना चाहिए । (२९.०५.२०)
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असलमने किया दुष्कर्म, समाचार पत्रने उसे ‘तान्त्रिक’ लिखा, भगवा कपडोंवाला चित्र लगाया
पिछले दिनों ऐसा ही एक प्रकरण पश्चिम बंगालके नदिया जिलेमें घटी घटनाके बाद सामने आया था । जहां मुस्लिम तान्त्रिकद्वारा ‘काले जादू’का उपयोग करके किए गए उपचारमें एक दस वर्षीय बालककी मृत्यु हो गई थी; परन्तु ‘मीडिया’ने इस अपराधको हिन्दूद्वारा किए गए अपराधके रूपमें प्रसारित किया था । जांचमें यह भी पता चला कि असलमके पास न केवल आसपाससे लोग आते थे; अपितु दूसरे जनपदोंके लोग भी उसके पास अपनी समस्या लेकर आते थे । ऐसेमें जब एक ३४ वर्षीय महिलाको इसकी सूचना मिली तो वह भी असलमके पास पहुंची । जहां असलमने पहले महिलाकी समस्याको सुना और तत्पश्चात उसे झाड-फूंकके नामपर कक्षमें ले गया गया और उसके साथ भी दुष्कर्म किया ।
संचार माध्यमोंमें प्रायः समुदाय विशेषके अपराधोंको छुपानेका प्रयास किया जाता है । कई ऐसे प्रकरण हैं जब आरोपित ‘मुस्लिमों’का न केवल अभिज्ञान छुपाया गया; अपितु उन्हें हिन्दूके रूपमें प्रचारित किया गया । विदेशी वित्तसे पोषित प्रसार माध्यम समूहोंसे भी सावधान रहना होगा । हिन्दुओ ! जो भी प्रसार माध्यम इस प्रकारका कृत्य करता है, उसका बहिष्कार करें !
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कोरोना योद्धाकी मृत्यु, देहली शासनद्वारा क्षतिपूर्ति राशि देना अस्वीकार
देहली पुलिसमें नियुक्त महिला पुलिसकर्मी शैली बैसलाकी मृत्युको लेकर परिजनने कहा है कि उसकी मृत्यु कोरोनासे हुई थी । बता दें कि ग्रेटर नोएडाके कुलेसरा गांवमें रहनेवाली शैली बैसला देहली पुलिसमें महिला ‘कांस्टेबल’ थीं । बीते दिनों उनकी मृत्यु हो गई थी । मृत्युके उपरान्त कहा गया कि मस्तिष्क ज्वरसे (दिमागी बुखारसे) मृत्यु हुई है ।
वहीं महिला शैलीके पिता लीला बैसला व मां किरण देवीने आरोप लगाया है कि उनकी बेटीकी मृत्यु कोरोनासे हुई है । उधर, देहली पुलिस इस बेटीको महामारीसे मृत माननेको सिद्ध (तैयार) नहीं है । आरोप है कि उनकी बेटीकी मृत्युके पश्चात देहली पुलिसका कोई भी अधिकारी मिलने नहीं आया । जिस थानेमें शैली नियुक्त थी, वहांके अधिकारी भी नहीं आए ।
लीलाने बताया कि शैलीको देहली शासनने कोरोना योद्धा नहीं माना है । उनका परिवार अत्यन्त निर्धन है और दूध विक्रयकर वे जीवनयापन करते हैं । उनकी बेटी ही एकमात्र थी जो आय अर्जित करती थी । उसकी मृत्युसे परिवारके सभी सदस्य दुखी हैं । मुस्लिम तुष्टीकरणके नए मानदण्ड स्थापित करनेवाले देहलीके मुख्यमन्त्री केजरीवालसे और क्या अपेक्षाकी जा सकती है ? यदि मृतकाका नाम ‘शैली बैसला’के स्थानपर ‘शेहला बानो’ होता तो वह स्वयं इसके घर जाकर क्षतिपूर्तिका धनादेश दे आते । समझमें नहीं आ रहा है कि जब महामारीके प्रारम्भ होते ही केन्द्र शासनने सभी कोरोना योद्धाओंका ‘बीमा’ करवाया है तो देहली शासनको क्षतिपूर्ति राशि देनेमें क्या संकोच है ? वैसे भी देहली पुलिस केन्द्र शासनके अन्तर्गत आती है तो देहली शासनको उसे कोरोना योद्धा माननेमें क्या समस्या है ?
प्रतिदिन करोडों रुपएके विज्ञापन विभिन्न माध्यमोंसे यह देहली शासन प्रसारितकर जनताके धनका दुरुपयोगकर रहा है, इसे एक कोरोना योद्धाको राशि देनेमें अथवा केन्द्रसे दिलानेमें कष्ट क्यों हो रहा है ? शीघ्र ही जनसामान्यको भी इस अन्यायके विरुद्ध अपने स्वर मुखरितकर, कोरोना वीरांगना शैली बैसलाको न्याय दिलवाना होगा । ऐसे निकृष्ट नेता और ऐसा निकृष्ट शासन भविष्यमें न हो, इसलिए अब हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अपरिहार्य हो गई है ।
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