शास्त्र वचन


एकैकस्य तिलैर्मिश्रांस्त्रींस्त्रीन् दद्याज्जलाज्जलीन्। 
यावज्जीवकृतं पापं तत्क्षणादेव नश्यति।
अर्थ : जो अपने पितरोंको तिल-मिश्रित जलकी तीन-तीन अंजलियां प्रदान करते हैं, उनके जन्मसे तर्पणके दिनोंतकके पापोंका नाश हो जाता है ।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution