घरका वैद्य – अखरोट (भाग-२)
अर्शके (बवासीरके) लिए : वातजन्य अर्शमें अखरोटके तेलके ‘फाहे’को गुदामें लगानेसे ‘सूजन’ अल्प होकर पीडा दूर हो जाती है । इसकी गिरी ५० ग्राम, छुहारे ४० ग्राम, और बिनौलेकी मींगी १० ग्राम, एक साथ कूटकर, थोडेसे घीमें भूनकर, उतनी ही मात्रामें देसी मिश्री मिलाकर रखें ! इसमें २५ ग्राम प्रतिदिन प्रातःकाल सेवन करनेसे प्रमेहमें विशेष लाभ होता है; किन्तु इसके ऊपर दूध नहीं पीना चाहिए ।
दांतोंके लिए : अखरोटका मञ्जन दांतोंके लिए अत्यन्त लाभकारी होता है । अखरोटकी छालको मुखमें रखकर चबानेसे दांत एवं मसूडे स्वच्छ होते हैं । अखरोटके छिलकोंको जलाकर, उसकी भस्मको छानकर दांतोंपर मञ्जन करनेसे, दांत सुदृढ हो जाते हैं ।
कर्करोगके लिए : अखरोटमें कर्करोगरोधी तत्त्व पाया जाता है, जिसके प्रभावके कारण कर्करोगके विषाणुओंके पनपनेमें अवरोध होता है । अखरोटको मोटा-मोटा कूटकर, देशी मिश्रीके साथ मिलाकर रखनेसे एवं प्रतिदिन सवेरे गायके दूधके साथ सेवन करते रहनेसे कर्करोगके उपचारमें सहायता मिलती है ।
अस्थियोंके (हड्डियोंके) लिए : ‘अल्फा लिनोलेनिक एसिड’युक्त खाद्य पदार्थके सेवनसे अस्थियां सुदृढ होती हैं । इसके अतिरिक्त अखरोटमें ‘कैल्शियम’ और ‘विटामिन-डी’ भी पाया जाता है, जो अस्थियोंको स्वस्थ रखनेके लिए आवश्यक होता है ।
त्वचाके लिए : अखरोटमें ऑक्सीकरणरोधी गुण होता है । ‘एंटीऑक्सीडेंट’ स्वास्थ्यके साथ-साथ त्वचाको भी पोषण देते हैं । ‘एंटीऑक्सीडेंट’ त्वचासे मलिनताको हटाकर कान्तिमय बना देते हैं । अखरोटको कच्चे दूधमें घिसकर मुखपर लगानेसे त्वचापर कान्ति आती है ।
गर्भावस्थामें लाभकारी : अखरोटमें पाए जानेवाले ‘फैटी एसिड’, ‘विटामिन-ए’ और ‘ई’, शिशुके मानसिक विकासमें सहायता करते हैं । प्रतिदिन एक-दो अखरोट भिगोकर खाते रहनेसे शिशुके मस्तिष्कको ऊर्जा प्राप्त होती है । मासिक धर्मकी समस्यामें अखरोटके छिलकेको पीसकर, उसे दो लीटर जलमें उबाल लें ! एक चौथाई रह जानेपर उसे छानकर रख लें, उसमेंसे तीससे चालीस ग्राम जितना, दो चम्मच मधु मिलाकर प्रतिदिन तीन-चार बार पीनेसे लाभ होता है I
मधुमेहके लिए : कच्चे अखरोटमें ‘बीटा-ग्लूकन’ होता है, जो रक्तमें मधुमेहके स्तरको न्यून करनेमें सहायक होता है । यह ‘इंसुलिन’को नियमित करनेमें सहायता करता है, जो इसे ‘श्रेणी-२’के मधुमेहके रोगियोंके लिए अत्यन्त लाभदायक है । ये शरीरमें ‘इंसुलिन’के उत्पादनको स्थिर करके पाचन और रक्त-शर्कराको नियन्त्रित करनेमें सहायता करता है । मधुमेहके रोगियोंके लिए यह एक अचूक औषधि है I
अखरोटका तेल : अखरोट और इसके तेलका उपयोग बालोंको काला, लम्बा और घना बनानेके लिए किया जाता है I अखरोटका प्रयोग कई प्रकारकी सौन्दर्य सामग्री बनानेके लिए किया जाता है । शरीरपर इसका तेल लगानेसे चक्र (दाद), खाज, खुजली और लाल चकत्ते दूर हो जाते हैं । आंखोंके लिए अखरोटके तेलका प्रयोग अत्यन्त लाभदायक होता है I आंखोंके नीचे इसका तेल लगाकर मर्दन (मालिश) करनेसे आंखोंके काले धब्बे और काले घेरे मिट जाते हैं और त्वचाके साथ-साथ यह आपके बालोंको लम्बा, घना और घनिष्ठ बनाता है । अखरोटका तेल गंजेपनको दूरकर देता है । शीत ऋतुमें जब-जब शरीर ऐंठता है तो अखरोटके तेलका मर्दन (मालिश) करनेसे लाभ होता है ।
पुरुषत्वके लिए : अखरोट पुरुषकी शुक्राणुओंकी न्यूनताको भी दूर करता है; क्योंकि आयुर्वेदमें अखरोट एक शक्तिशाली कामोत्तेजक पदार्थ माना जाता है । अखरोट शुक्राणुओंकी न्यूनताको दूर करके नए स्वस्थ शुक्राणुओंको उत्पन्न करता है और वीर्यको गाढा करता है । अखरोटकी गिरीको कूटकर, पचास ग्राम बादामके तेलमें भूनकर, देसी खाण्डके साथ मिलाकर प्रतिदिन खानेसे पुरुषत्वके लिए ऊर्जा प्राप्त होती है ।
प्रयोगमें सावधानियां
तीव्रग्राहिता (एलर्जी) : अखरोट अधिक खानेसे ‘एलर्जी’ भी हो सकती है । यदि किसीको इससे ‘एलर्जी’ होती है तो अखरोटका सेवन न करें ! इससे छातीमें खिंचाव अनुभव होता है अथवा श्वास लेनेमें कष्ट होता है ।
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