बोझ या कार्य समझकर सेवा करनेवालोंसे ईश्वर अधिक समय सेवा नहीं कराते हैं
साधको, सत्सेवा मिले तो सौभाग्य व कृतज्ञताके भावसे, यह सेवा ‘परिपूर्ण सेवा हो’, इस भावसे करनेका प्रयास करें, इसे बोझ न समझें ! बोझ या कार्य समझकर करनेवालोंसे ईश्वर अधिक समय सेवा नहीं कराते हैं । – (पू.) तनुजा ठाकुर
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