घरका वैद्य – पाटलपुष्प (गुलाब) (भाग – १)


आयुर्वेद पुष्पकी शृंखलामें आज हम एक नूतन पुष्पके विषयमें जानेंगें, वह है, ‘गुलाब,’ यह शब्द फारसी भाषाका है, गुल अर्थात पुष्प और आब अर्थात पानी, अर्थात पानीवाला पुष्प । इसे भारतीय भाषाओं में पाटलपुष्प, देवपुष्प, तरुणी, देवतरुणी, शतपत्री, कर्णिका, चारुकेशर आदि कहा जाता है ।
पाटलपुष्पको पुष्पोंका राजा बोला जाता है । पाटलपुष्प एक बारहमासी पौधेका पुष्प है, जो ‘Rosaceae’ कुटुम्बमें आता है । अधिकांश पाटलपुष्पकी तीन सौ प्रजातियां और सहस्रों प्रकार हैं । पाटलपुष्प श्वेत, पीले और लाल रंगके होते हैं । पाटलपुष्पकी अधिकांश प्रजातियां एशियाकी हैं, छोटी संख्या यूरोप, उत्तरी अमेरिका और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीकाकी भी हैं । शास्‍त्रोंमें भी माना गया है कि घरमें पाटलपुष्पका एक पौधा लगानेसे न केवल इसकी सुन्दरता बढती है, वरन यह घरमें सुख और प्रेमभाव भी बढाता है ।
   वैसे पूजा और प्रेमसे भिन्न अल्प ही लोग पाटलपुष्पके लाभके विषयमें जानते हैं । पाटलपुष्प जलका (गुलाबजलका) प्रयोग तो त्वचापर कान्ति लाने और कई व्‍यंजनोंको एक विशेष स्‍वाद देनेके लिए होता ही रहा है; परन्तु पाटलपुष्पका अपनेआपमें स्वास्थ्यके गुणोंकी खान है ।
प्रकृति – पाटलपुष्प शीतल प्रकृतिका पुष्प है ।
सेवन विधि :
१. पाटलपुष्पके पुष्पका प्रयोग पुष्पकन्द (गुलकन्द) बनानेमें बृहद स्तरपर किया जाता है, जिसका सेवन सभीको रुचिकर (पसन्द) है ।
२. पाटलपुष्पजलके रूपमें भी इस पुष्पका सेवन किया जाता है ।
३. पाटलपुष्पका क्वाथ (काढा) भी बनाया जाता है ।
सेवन की जानेवाली मात्रा
१.  पुष्पका क्वाथ ३५ से ५० मिलीलीटर
२. पुष्पकन्द १०-३० ग्राम
३. पाटलपुष्पका रस २०-४० ग्राम
४. पाटलपुष्पके नूतन (ताजे) पुष्प १० ग्रामसे ३० ग्रामतक
५. शुष्क पुष्पोंका चूर्ण ३ से ६ ग्राम
आज हमने पाटलपुष्पके (गुलाबके) विषयमें जाना, अगले भागमें हम इससे होनेवाले शारीरिक लाभके विषयमें जानेंगे ।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution