उत्तिष्ठ कौन्तेय


‘मन्दिरमें भी तो घण्टा बजता है’, मुंबई मस्जिदके ध्वनिविस्तारक यन्त्रोंकी ध्वनि न्यून करनेको कहा तो मुसलमान विधायकने अन्यत्र जानेका दिया परामर्श 
    विगत दिनों इलाहाबाद उच्च न्यायालयने कहा था कि किसी भी मस्जिदसे ध्वनिविस्तारक यन्त्रोंसे अजान देना, दूसरे लोगोंके अधिकारोंमें हस्तक्षेप है ।  दूसरोंको सुननेके लिए विवश करनेका अधिकार किसीको नहीं है; परन्तु इससे मुसलमानोंपर  कोई प्रभाव नहीं पडा है ।
मुंबईमें एक महिलाको मस्जिदके ध्वनिविस्तारक यन्त्रोंकी ध्वनि कम करनेका अनुरोध भारी पड गया ।  करिश्मा भोंसले नामकी इस महिलाने ‘ट्विटर’पर अपनी पीडा व्यक्त करते हुए, एक वीडियो प्रकाशित किया, जिसमें वह अपनी मांके साथ मस्जिदमें जाकर, मुसलमान समुदायसे अजानकी ध्वनिको कम करनेका अनुरोध कर रही थी; किन्तु मुसलमानोंने उसके और उसके परिजनके साथ अभद्र व्यवहार किया, जो ‘वायरल’ हो चुके ‘वीडियो’में स्पष्ट दिख रहा है  ।
जब करिश्माने स्थानीय मुसलमान विधायक अबु आजमीसे सहायता मांगी तो उन्होंने उसे ही घर अन्यत्र लेनेका परामर्श दिया  ।
मुंबईके मानखुर्द क्षेत्रमें रहनेवाली करिश्मा भोंसलेके अनुसार उनके घरके पास ही मस्जिदमें ध्वनिविस्तारक यन्त्र लगे हैं; इसलिए वे ध्वनि कम करनेका अनुरोध लेकर मस्जिद गईं; परन्तु मस्जिदके पासके मुस्लिम समुदायके लोग करिश्मा और उनकी मांसे विवादकर उन्हें धमकाने और उनके साथ झडप करने लगे ।
 इस वीडियोमें ‘हिजाब’ पहने एक महिला करिश्मासे विवाद करते हुए कह रही है कि तुम्हारे मन्दिरमें भी तो घण्टा बजता है और क्या हम ‘स्पीकर’ किसीके घरमें लगा रहे हैं ? इसपर युवतीने उत्तर दिया कि यदि मन्दिरमें घण्टी बजती है तो उन्हें वहां जाकर अपनी कहिए ।
विवादके बढनेपर वहां पुलिस भी पहुंच चुकी थी, जो दोनों पक्षोंसे केवल विवाद समाप्त करनेका अनुरोध करती देखी जा सकती है  ।
     हिन्दुओ ! जो लोग १९४७ में अपना एक पृथक देश लेकर सन्तुष्ट नहीं हुए, वे आपके किसी अनुरोधसे नहीं पिघलेंगे ! किसी समय अजान, नमाजके लिए सन्देश होती थी; किन्तु अब ध्वनि संकेतक (अलार्म), समयसूचक यन्त्र (घडी) और ‘व्हाट्सऐप’के समयमें अप्रासंगिक है, तथापि आज भी ध्वनिविस्तारक यन्त्रोंका प्रयोग केवल और केवल अपना अस्तित्व सिद्ध करनेके लिए ही है  ।  जैसे श्रीरामजन्मभूमि विवादके सम्बन्धमें भी मुस्लिम समुदाय सर्व सत्यसे परिचित था, तथापि उन्होंने कभी भी अपना प्रतिवाद नहीं छोडा; क्योंकि प्रश्न मस्जिदका नहीं, बस’जिद’का (हठका)  था  ।  वैसे ही आज भी ये आपके किसी अनुरोधको नहीं माननेवाले हैं ! इनसे दूरी और हिन्दुओंका संगठन ही, एकमात्र पर्याय है, जिसकी आवश्यकता हिन्दू राष्ट्रके लिए भी है  ।  जहांतक मन्दिरमें घण्टी बजानेका प्रश्न है तो यह विवेक हिन्दुओंमें होना चाहिए कि मन्दिरकी घण्टी इस प्रकार बजाएं कि किसीको कष्ट न हो ! मन्दिरमें घण्टी धीरेसे बजाएं और मन्दिरमें घण्टी क्यों बजाई जाती है ?, यह सीखनेका प्रयत्न करें ! (२७.०६.२०)
*************
‘आइएमए’ ‘हलाल’ पोंजी भ्रष्टाचार प्रकरणमें निलम्बित अधिकारी विजय शंकरनेकी आत्महत्या
       ‘आइएमए’ ‘हलाल’ पोंजी भ्रष्टाचार प्रकरणमें निलम्बित वरिष्ठ ‘आईएएस’ अधिकारी विजय शंकरने बेंगलुरुके अपने आवासपर मंगलवार, २३ जूनको आत्महत्या कर ली । विशेष जांच दलने विजय शंकरको गत वर्ष डेढ कोटि रुपयोंकी घूस (रिश्वत) लेनेके आरोपमें बन्दी बनाया था । इसके पश्चात उन्हें निलम्बित कर दिया गया था ।
   आरम्भमें कर्नाटक शासनने विजयशंकर और एलसी नागराजको ‘आइएमए’ भ्रष्टाचारकी जांचके लिए अधिकारीके रूपमें नियुक्त किया था; परन्तु ‘सीबीआई’ने पाया कि इन्होंने तो अपना ब्यौरा ‘आईएमए’के समर्थनमें दिया, जिसके कारण सहस्रों लोगोंका रुपया डूबा था  ।
    पूछताछमें दोनोंने स्वीकारा था कि उन्होंने ‘आईएमए’ निदेशकोंसे घूस ली थी  ।  विजयशंकरको इस कार्यके लिए करोडों रुपए मिले थे  ।  ११ जून, २०२०को ‘सीबीआई’ने राज्य शासनसे विजय शंकर व दो अन्य अधिकारियोंके विरुद्ध ‘पोंजी भ्रष्टाचार’में अभियोग चलानेका अनुरोध किया  ।
    ‘पोंजी योजना’को ‘आईएमए’के संस्थापक मोहम्मद मंसूर खान व उसके साथियोंद्वारा सञ्चालित किया जा रहा था । इसके अन्तर्गत निवेशकोंसे वचन दिया गया था कि उनका धन इस्लामी ढंगसे निवेश करके उन्हें उच्च ‘रिटर्न’ दिया जाएगा  ।  इसी लोभमें कमसे कम ४० सहस्र निवेशकोंने अपना धन लगाया और ४००० कोटि रुपएसे अधिकका भ्रष्टाचार किया गया  ।
       यदि अधिकारी भ्रष्टाचार ही न करता तो उसे ग्लानिके कारण आत्महत्याकी आवश्यकता ही नहीं थी, वह बात पृथक है कि कोई तो भ्रष्ट सिद्ध होनेपर भी गर्वसे घूमते हैं  ।  भ्रष्टाचार करनेवाले ईश्वरीय दण्डके पात्र तो होते ही हैं और आत्महत्या इन्हें दोगुणा दण्डका भोगी बना देती है; परन्तु मैकॉले शिक्षित व धर्मकी शिक्षासे हीन आजके लोगोंको यह समझ नहीं आएगा  ।  आगामी हिन्दू राष्ट्रमें सभीको धर्मका ज्ञान दिया जाएगा, जिससे न ही कोई भ्रष्टाचारी होगा, न ही कोई नागरिक धनके लोभमें किसी मंसूर खानके जिहादी जालमें फंसेगा  ।
*************
अलवरमें जिहादियोंने हिन्दू बालिकासे दुष्कर्मकर पिताको मारकर पेडपर लटकाया
      अलवरके रामगढ जनपदमें एक हिन्दू बालिकाके साथ अनिश खान नामक जिहादीने दुष्कर्म किया  ।  बालिकाके पिताद्वारा पुलिसमें परिवाद करनेका प्रयास करनेपर पुलिसने इसे प्रविष्ट करनेमें दो दिन लगाए ! जिहादियोंद्वारा बालिकाके पिताको परिवाद लौटा लेनेका दवाब डाला गया; किन्तु उनके मना कर देनेपर अनीश खानने अन्य जिहादियों महमूद खान, तौफीक खान, उमरदीन खान इत्यादिकी सहायतासे पिताको मार डाला तथा पेडपर लटका दिया  ।
        जिहादियोंका दुस्साहस देखकर लगता है कि यह भारत नहीं, वरन कोई इस्लामिक देश   है ! सभी हिन्दू सिद्ध हो जाएं और जिहादियों तथा इनके पोषक गहलोत शासनका मुखर होकर विरोध करें, इसके बिना जिहादियोंमें भय उत्पन्न नहीं हो सकता है; अन्यथा वे दुष्कर्म करते रहेंगे और कहीं हम विकासका खेल खेलते-खेलते स्वयंके घर न लुटा बैठे ! (२५.०६.२०)
*************
आतङ्की ओसामाको पाकिस्तानने बताया हुतात्मा (शहीद)
     पाकिस्तानके प्रधानमन्त्री इमरान खानने अपने एक व्यक्तव्यमें कुख्यात आतङ्की ओसोमाको हुतात्मा (शहीद) बताया है ! उन्होंने कहा कि अमेरिकाने पाकिस्तानमें घुसकर ओसामाको मारकर ‘शहीद’ कर दिया और हमें ही सबके समक्ष भला-बुरा कहा  ।  विश्वके लोग हमें भला-बुरा कहने लगे  ।  आतङ्कके प्रकरणपर हमने अनेक बार अपमान सहन किया है  ।  यह उस समय हुआ, जब हम अमेरिकाको आतङ्कवादके विरुद्ध अपने देशमें साथ दे रहे थे  ।  अब अमेरिका यदि अफगानिस्तानमें सफल नहीं हो पाया तो भी इसका उत्तरदायी पाकिस्तान ही माना जाएगा  ।  भारतके विदेश मन्त्रालयने बताया है कि पाकिस्तान ‘एफएटीएफ’की सन्दिग्ध सूचीमें है और ऐसे वक्तव्य दे रहा है  ।  इससे यह स्पष्ट होता है कि वह आतङ्कवादका समर्थन कर रहा है  ।
      इमरानका ऐसा वक्तव्य केवल यह दिखा रहा है कि वे आतङ्कका केवल बचाव कर रहे हैं और दिखा ऐसे रहे हैं कि वे ही विश्वमें आतङ्कके विरुद्ध खडे हैं, जो कि हास्यास्पद है; परन्तु अब विश्व इस सत्यको जान चुका है और पाकिस्तान प्रदत्त इस इस्लामिक आतङ्कवादपर अपने स्वर मुखर कर रहा है  ।  (२६.०६.२०२०)
*************
‘टी सीरीज’ने ‘यूट्यूब’पर साझा किया पाकिस्तानी गायकका गीत
     सङ्गीत प्रतिष्ठान ‘टी-सीरीज’ने २३ जूनको ‘यूट्यूब’पर पाकिस्तानी गायक आतिफ असलमका गाया गीत ‘किन्ना सोना’ साझा किया ! इसके उपरान्त उसे जनमानसके विरोधका सामना करना पडा  ।  इसके विरुद्ध ‘ट्विटर’पर आक्रोश व्यक्त किया जाने लगा  ।
उल्लेखनीय है कि ‘फैडरेशन ऑफ वेस्टर्न इण्डिया सी’ और ‘ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन’ने पाकिस्तानी कलाकारोंके भारतमें कार्य करनेपर प्रतिबन्ध लगा दिया है  ।  ऐसा गत वर्ष पाकिस्तानद्वारा भारतीय चलचित्रोंके प्रदर्शनपर प्रतिबन्ध लगानेके उपरान्त किया गया था  ।
‘एमएनएस सिनेमा विंग’के अध्यक्ष अमेय खोपरकरने इसपर क्रोध व्यक्त करते हुए ‘टी-सीरीज’से कहा कि वे शीघ्रातिशीघ्र इस गीतको ‘यूट्यूब’से हटा ले; अन्यथा परिणाम अनुचित होंगे  ।
इसके उपरान्त ‘टी-सीरीज’ने यह गीत हटाते हुए क्षमायाचना करते हुए कहा कि उसके किसी कर्मचारीद्वारा असमंजससे यह कार्य घटित हुआ है  ।  वे भविष्यमें ऐसी चूक नहीं करेंगे  ।  किसी भी पाकिस्तानी कलाकारको इस प्रकार प्रोत्साहित नहीं करेंगे  । उल्लेखनीय है कि गत वर्ष आतिफ असलमने धारा-३७० हटानेपर भारत शासनकी निन्दाकी थी  ।
       ‘टी-सीरीज’से भूलसे भी यह चूक कैसे हो सकती है ? क्या सङ्गीत संस्थानोंका उद्देश्य अब देशके हितसे ऊपर हो गया है ? यह प्रथम बार नहीं है, इससे पूर्व भी अनेक चलचित्र निर्माताओंने भी कथित ‘टैलेंट’की दुहाई देते हुए पाकिस्तानी कलाकारोंका समर्थन किया है और ‘सङ्गीतको राष्ट्रोंकी सीमा नहीं बांधती’ आदि निरर्थक वक्तव्योंसे भ्रमितकर उन्हें भारतमें कार्य दिया और उन्हीं लोगोंने पाकिस्तान लौटनेपर भारतका अपमान किया, यह सर्वविदित है  ।  ऐसे प्रकरण दिखाते हैं कि हममें राष्ट्राभिमान नहीं है, जो अत्यन्त लज्जास्पद है  ।
*************
‘कोरोनिल’ औषधिपर विवादके पश्चात ‘फेयर & लवली’पर उठे प्रश्नपर यूनिलिवर परिवर्तित करेगा नाम 
      पतञ्जलिके समर्थक ‘सोशल मीडिया’पर ‘कोरोनिल’ औषधिपर विवाद बढनेके पश्चात प्रश्न कर रहे थे कि जो लोग २० वर्षसे ‘फेयर & लवली’का प्रयोग गोरा होनेके लिए कर रहे हैं, वो आज ‘कोरोनिल’पर इसलिए प्रश्न कर रहे हैं; क्योंकि उसे ‘कोरोना वायरस’का उपचार बताया जा रहा है ।  क्या इन लोगोंने कभी ‘फेयर एंड लवली’को प्रयोग करते हुए वैज्ञानिक प्रमाण मांगा ? इसके पश्चात समाचार आया कि अब ‘हिन्दुस्तान यूनिलीवर’ने निर्णय लिया है कि वे अपने ४५ वर्ष पुराने ‘प्रॉडक्ट’का नाम परिवर्तित कर देंगे  ।
     भारतीय ‘बाजार’ अनियमितता, विषैली व भ्रामक प्रचारवाली वस्तुओंसे भरा हुआ है, यह आज सभी जानते हैं, चाहे वह अंग्रेजी औषधि हो या ‘फेयर एंड लवली’  ।  वस्तुतः प्रश्न तो यह होना चाहिए कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कर्करोग, थायरॉइड आदिमें अंग्रेजी औषधिके (ऐलोपैथिक औषधिके) लेनेके पश्चात भी रोगीका उपचार नहीं होता तो किस अधिकारसे ये औषधियां विक्रयकी जा रही है ? परन्तु वहीं ‘पतंजलि’ यदि गिलोय व श्वासारि आदि औषधियोंसे मिलाकर व शोधकर एक औषधि क्यों नहीं दे सकते ? इससे स्पष्ट होता है कि कोई बडा गुट इस जालके पीछे कार्यरत है, जिसके आगे हमारे शासकगणतक झुक रहे हैं !  यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इस समय इस समूहसे सम्बन्धित चिकित्सालय ‘कोरोना’ महामारीके उपचारके नामपर लोगोंको लूट रहे हैं, जबकि सत्य यह है कि उन लोगोंके पास इसका कोई उपचार है ही नहीं; अतः उस समूहको भय है कि ‘पतंजलि’की औषधि यदि सफल हुई तो उनका लूटतन्त्र समाप्त हो जाएगा; इसलिए अब आवश्यकता यह है कि प्रत्येक भारतीय आयुर्वेदका साथ देकर उसे उपचारकी विशिष्ट पद्धतिमें स्थान दे और इन समूहोंकी वास्तविकताका भान करे व इस जालसे बाहर आए !
*************
‘लास वेगास’के ‘फाउंडेशन रूम’के स्वामीने देवताओंकी मूर्तिके अपमानके विरोधके पश्चातकी क्षमा याचना
     ‘लास वेगास’के ‘फाउंडेशन रूम मांडले रिजाॅर्ट और कैसीनो’के स्वामीने अपने ‘क्लब’में प्रयोगकी गई देवी-देवताओंकी प्रतिमाओंके अनुचित प्रयोगपर आपत्तिके पश्चात उन मूर्तियोंको कार्यक्रम स्थलसे हटानेकी घोषणाकी है  ।  सामाजिक जालस्थलपर लास वेगासमें बजी काॅकटेल लाउंजके कुछ छायाचित्रोंको प्रसारित किया गया था, जिसमें अर्धनग्न बार नृत्याङ्गनाएं उन प्रतिमाओंपर बैठकर छायाचित्र खिंचवाती दृष्टिगोचर हुई ! वे इन प्रतिमाओंके साथ ‘पोल नृत्य’ सदृश अश्लील नृत्य करती थीं  ।  ऐसे स्थानोंपर भगवान गणेश, नटराज आदि सनातन धर्मोंसे सम्बन्धित ईश्वरकी प्रतिमाओंको रखा जाना और उनके इस आचरणपर कई लोगोंने अपना रोष प्रकट किया था  ।   इन छायाचित्रोंके प्रसारित होनेपर उत्तरी नेवादाके कुछ धर्मगुरुओंद्वारा इसपर आपत्ति प्रकट करनेके पश्चात २५ जूनको ‘फाउंडेशन रूम’ने एक घोषणा करके लोगोंसे धार्मिक भावनाओंको  ठेस पहुंचानेपर क्षमा मांगी  ।
      हिन्दुओ, क्या कभी ऐसे किसी फूहड स्थानपर किसी इस्लाम या ईसाईके प्रतीकोंको लगे देखा है ? नहीं, चूकसे भी नहीं, फिर हिन्दू देवी-देवताओंकी ऐसी विडम्बना क्यों की जाती    है ?, विचार करें ! क्या यह हमारी क्षात्रहीनताका प्रमाण नहीं ? (२६.०६.२०२०)
*************
अब कैथलके शृंगी ऋषि आश्रमके महन्त रामभज दासकी हुई निर्मम हत्या, षड्यन्त्रकी आशंकाके अन्तर्गत जांचमें जुटी पुलिस
     हरियाणाके कैथलसे २६ वर्षीय महन्त रामभज दासकी निर्मम हत्याका मामलाका सामने आया है ।  जहां बुधवारको कुछ लोगोंने मिलकर महन्तपर आक्रमण कर दिया ।  उन्हें गम्भीर अवस्थामें कलायतके खरकपांडवा गांवके निकट खेतोंमें फेंक दिया था ।  महन्त रामभज दास षड्दर्शन साधु समाज हरियाणाके उपाध्यक्ष व कैथलके सांघन गांव स्थित प्राचीन शृंगी ऋषि आश्रमके महन्त थे । सरपर गहरी चोट लगनेसे उपचारके मध्य उनकी मृत्यु हो गई ।
  उन्होंने एमए तककी शिक्षा प्राप्तकी हुई थी ।  वे पहले काकौतमें रहते थे ।  ४ वर्ष पहले ही वे इस गांवके मन्दिरमें आए थे ।  महन्तने गांववासियोंकी सहायताके लिए कई कार्य भी करवाए थे ।  गांववालोंमें साधुकी हत्याको लेकर भारी आक्रोश है । वहीं महन्तपर हुए आक्रमणपर साधु संगठनोंने भी रोष प्रकट किया है ।
     हिन्दुओंको धर्म व अध्यात्मका सही ज्ञान तथा हिन्दुओंको जागरूक करने वाले साधुओंकी निर्मम हत्याएं निधर्मी व्यकितयोके द्वारा की जा रही है  । प्रशासन आंखें बन्दकर यह सब होने दे रहा है  । हमें ही एकत्र होकर इन विधर्मियोंका विरोध करना होगा  । (२६.०६.२०२०)
*************


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution