उत्तिष्ठ कौन्तेय


मोपलाके सहस्रों हिन्दुओंके नरसंहारके लिए उत्तरदायी वरियम कुन्नथु कुंजाहम्मद हाजीको राष्ट्रवादी दर्शाने हेतु चलचित्रकी घोषणा 
खिलाफत आन्दोलनका सक्रिय सदस्य वरियम कुन्नथु, जिसने अपने मित्रके साथ मिलकर १९२१ में सहस्रों हिन्दुओंका नरसंहार किया, १ लक्षसे अधिक हिन्दुओंको अपने घरबार त्यागकर पलायन करनेको विवश किया, ऐसे धर्मान्धके जीवनपर आशिक अबू नामक केरली व्यक्ति चलचित्रका फिल्मांकन कर रहा है । इस चलचित्रमें इस धर्मान्धको राष्ट्रवादी दर्शाया जारहा है । यह वास्तविक इतिहास छुपाकर समुदाय विशेषके कुकर्मोंको ढकनेका प्रयास है । यह धर्मान्ध स्वयंको अरनदका सुल्तान कहता था । यह वही क्षेत्र है जहां सहस्रों हिन्दुओंका नरसंहार किया गया तथा १ लक्षसे अधिक हिन्दू अपने पहने हुए वस्त्रोंमें पलायन करनेको बाध्य हुए ।
वामपन्थी इतिहासकारोंने असत्य इतिहास लिखकर भारतके विद्यार्थियोंको असत्य ज्ञान दिया है । अब ऐसे चलचित्रोंका बहिष्कार होना चाहिए जो आनेवाली पीढीको असत्य बताने हेतु निर्मित किए जारहे हैं ।
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झारखण्डमें चर्चमें लोगोंने की तोडफोड
   झारखण्डमें धर्मान्तरणके प्रकरणमें कुछ लोगोंने (चर्च) गिरजाघरकी तोडफोड की । धनबाद झारियाके लगभग दो ‘दर्जन’ निवासियोंका धर्मान्तरण करनेके कारण हिन्दुओंके संगठनोंने व्याप्त रोष व्यक्त किया । ईसाई समुदायके मिशनरियोंने ‘कोरोना’की आडमें वहांके निर्धनोंको पुनर्वास और धनका लोभ देकर यह अपराध किया । उन्होंने निर्धन लोगोंको कम धन देकर उनकी भूमिको कपट करके क्रय कर लिया है । स्थानीय लोगोंका कहना है कि वहांका प्रशासन कोई भी कार्यवाही नहीं करता है । लोगोंमें आक्रोश और अशान्ति फैली हुई है । ईसाई मिशनरीके दो प्रधानोंसे पूछताछके लिए पुलिसने अपने साथ ले लिया है । इससे पहले भी हिन्दू परिषदने वहांके राज्य शासनपर आरोप लगाया था । भाजपा शासनके रहते वहां विधान बनाया गया था; किन्तु वर्तमान सोरेन शासनका गठबंधन शासन होते ही धर्मान्तरण तीव्रगतिसे होने लगा है ।
   धर्माचरणके अभावमें विदेशी अधर्मी अपने धर्मोंको फैलानेके लिए निर्धनोंको लोभ देते हैं जिसमें वहांके राज्य शासकोंका भी योगदान सम्मिलित होता है । ऐसे शासनको हटानेके लिए हिन्दुओंको प्रखर सवैंधानिक तौरपर विरोध करना चाहिए ।  (२४.०६.२०२०)
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‘जासूसी’का अड्डा बने पाक उच्चायोगके ५० प्रतिशत कर्मचारियोंको भारत छोडनेका आदेश, भारतीय उच्चायोगसे भी आएंगे कर्मी
     भारतने पाकिस्तानको आतंकी और ‘जासूसी’ गतिविधियोमें लिप्त देहली स्थित पाकिस्तान उच्चायोगके पाकिस्तानी कर्मचारियोंकी संख्या ५० प्रतिशत घटानेका निर्णय लिया है । साथ ही इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोगमें भी इसी अनुपात में कर्मचारी कम किए जाएंगे । देहली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोगके प्रभारी अधिकारीको विदेश मंत्रालयने  बुलाकर उच्चायोगके अधिकारियोंके जासूसी करने और आंतकी संगठनोंके संपर्कमें रहनेका प्रकरण भी पुनः उठाया । जिसमें दो अधिकारियोंके रंगे हाथ पकडे जानेका भी उदाहरण दिया गया, जिन्हें देशसे बाहर कर दिया गया था।
          ऐसे आतंकी देशके साथ भारतको समस्त राजनयिक सम्बन्ध तोडकर वहां उच्चायोगमें कार्यरत अपने कर्मचारियोंको बुला लेना चाहिए एवं पाकिस्तानी उच्चायोगको भी बन्द कर समस्त कर्मचारियोंको पाकिस्तान भेज देना चाहिए, जिससे उनके द्वाराकी जा रही आतंकवादी गतिविधियोंपर अंकुश लगे । (२३.०६.२०)
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सफूरा जरगरको मिली ‘जमानत’ : मोदी शासनने ‘असुर’के साथ ‘मानवता’ क्यों दिखाई?
देहली उच्च न्यायालयने जामिया ‘कोआर्डिनेशन कमेटी’की सदस्य सफूरा जरगरको ‘जमानत’ दे दी है । बता दें कि देहलीमें दंगा भडकानेमें सफूरा जरगर मुख्य षड्यन्त्रकर्ताओंमेंसे एक है । जफूराके कई ‘वीडियो’ उपलब्ध हैं, जिसमें वो कश्मीरको, केरलको, बिहारको स्वतन्त्रता देने और  क्रान्तिकी बातें करती है । इसके अतिरिक्त सफूराके विरुद्ध साक्ष्य हैं कि ये जाफराबादसे महिलाओंकी टोलीको शाहीनबाग लाती थी और दंगेसे पहले जाफराबादमें जो जाम लगा था, वहां भी ये सक्रिय रूपसे उपस्थित थी और लोगोंको उकसा रही थी।
सफूराको प्रतिभूतिपर मुक्त क्यों किया गया ? इस पर ‘सॉलिसीटर जनरल’ तुषार मेहताने स्वयं लिखकर दे दिया कि ‘मानवीय आधार पर’ इसे ‘जमानत’ दे दी जाए और वो मानवीय आधार है उसका गर्भवती होना ।
न्यायालयकी ओरसे जिहादी सफूराको मुक्ति देनेकी भूलके दुष्परिणामको पूरे राष्ट्रको भुगतना पडेगा । कारागारसे बाहर निकलकर यह पुनः विषवमन ही करेगी । हिन्दुओ ! संगठित होकर अपने स्वरको मुखरकर प्रशासनको उनकेद्वारा पारित अनुचित आदेशको निरस्त करनेपर विवश करनेका प्रयास करें !
(२४.०६.२०२०)


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