उत्तिष्ठ कौन्तेय
भारत शासनने खिलौने एवं अन्य कई वस्तुओंपर अपने आयात शुल्कमें वृद्धि की, बिना अनुमति नहीं होगा भारतमें आयात
केन्द्र शासनने बडा निर्णय लेते हुए चीनी उत्पादोंके आयातपर कठोरता कर दी है । अब ‘डीजीएफटी’से अर्थात विदेश व्यापार महानिदेशकसे अनुमति लेनेके उपरान्त ही भारतमें चीनी वस्तुओं का आयात हो पाएगा । ज्ञातव्य है कि पिछले वर्ष दूधके उत्पादोंके आयातपर प्रतिबन्ध लगाया गया था । वैसे १२ जूनसे चीनसे टायरोंके आयातपर भारत प्रतिबन्ध लगा चुका है । इसके साथ ही साइकल, मोटरसाइकिल, कार, बस और लॉरीके टायरोंके आयातपर भी रोक लग गई है ।
भारत शासनका यह निर्णय स्वागत योग्य है । इसका हम समर्थन करते है । इस निर्णयसे भारतके उत्पाद और चीनी उत्पादोंमें मूल्यका अन्तर अल्प ही रह जाएगा; परन्तु भारतमें बने उत्पाद गुणवत्ताकी दृष्टिसे श्रेष्ठ होते हैं; अतः उन्हें क्रय करना ही बुद्धिमानी भी है और देशके प्रति अपने प्रेमका प्रकटीकरण भी । चीनी उत्पाद निम्न गुणवत्ताके होते हैं और इन्हें उपयोग करना अपने पैरपर कुल्हाडी मारने समान ही है; अतः इनका उपयोग बन्द करें !
*********
कांग्रेस नेता जाकिर हुसैनने कहे प्रधानमन्त्रीकी मां-बहनको कहे अपशब्द व देश तोडनेकी बात की
‘सोशल मीडिया’में गलवानकी घटनाको लेकर कांग्रेस नेता जाकिर हुसैन तथा लद्दाख स्वायत्त पहाडी विकास परिषदके पार्षदकी एक ध्वनिवार्ता (ऑडियो) प्रसारित’ हई है, जिसमें वह अपने मित्रसे बातें करते समय देशकी सेना और प्रधानमन्त्रीके लिए आपत्तिजनक बातें करते हुए कह रहा कि आगे कुछ होनेवाला नहीं है । वह कहता है, “सब ठीक हो जाएगा, केवल लेहका आधा भाग चीनको लेना चाहिए, तदुपरान्त देहलीमें मोदीकी ‘मां-बहन’ हो जाएगी ! लद्दाखके टुकडे हो जाएंगे ।” वार्ता प्रसारित होनेके पश्चात जाकिरपर परिवाद प्रविष्टकरउसे बन्दी बना लिया गया है तथा उसे ‘एलएएचडीसी’से भी निलम्बित कर दिया गया है । इस प्रकरणके पश्चात जिहादीने कहा कि उसकी यह बात मित्रके साथ उपहासमें बात हुई थी । मुझे देश और लोगोंपर गर्व है ।
एक तो जिहादी और दूसरा कांग्रेस नेता, सम्मिलित संस्कारोंसे प्रेरित जाकिर देश विरुद्ध विष उगल रहा है और भेद खुलनेपर उपहास बता रहा है अर्थात जिहादकी भावना, जो भीतरमें दबी हुई थी और चूकसे उजागर हो गई, उसे छुपा रहा है । ऐसे छुपे लोग ही आतङ्कियोंके सहायक सिद्ध होते हैं । शासनको शीघ्र इसे बन्दी दण्ड दिलाना चाहिए और जांच की जानी चाहिए कि कहीं इसके सम्बन्ध आतङ्की सङ्गठनोंसे न हो ! (२१.०६.२०)
पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफके योग करते हुए चित्र साझा करनेपर जिहादियोंने कहे अपशब्द
अन्तरराष्ट्रीय योग दिवसपर पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाडी मोहम्मद कैफने सामाजिक जालस्थल ‘ट्विटर’पर योग करते हुए चित्र साझा किया, जिसके पश्चात जिहादियोंने उनपर अभद्र टिप्पणी करना आरम्भ कर दिया । उन्हें इस्लाम विरोधी बताते हुए पांच समय नमाज पढनेका कहा गया । अदनान नामक जिहादीने इस्लाम धर्मपर सङ्कटकी आशङ्का प्रकट करते हुए कैफको धर्मद्रोही बताया, वहीं इमदाद अब्दुल्लाने कैफके योगको राजनीतिक क्रिया बताते हुए इसे बीजेपीसे ‘टिकट’ लेनेकी पूर्व सिद्धता बताया ।
निम्न स्तरकी मानसिकतावाले जिहादी केवल हिन्दुओंद्वारा विश्व प्रसारित व्यायामका चित्र साझा करनेपर ही अपना द्वेष व्यक्त कर रहे हैं तो आप स्वयं ही सोचें कि इनके मनमें हिन्दू धर्मके प्रति कितनी घृणा भरी होगी ? हिन्दुओ, ये विषैली मानसिकताके लोग ‘भाईचारे’के योग्य हैं क्या ?, विचार करें । (२२.०६.२०)
चीनने नेपालके उत्तरी गोरखामें रुई गांवपर किया अधिकार
नेपालके प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली भारतके विरुद्ध मानचित्र परिवर्तित करनेमें लग रहे; परन्तु चीनने उनको धोखा देते हुए उत्तरी गोरखाके रुई गांवपर अधिकार कर लिया है !
विशेषज्ञोंने बताया कि नेपाल शासन, बुद्धिजीवी और नागरिक कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्रमें भारतीय क्षेत्रमें अतिक्रमणके बारेमें बात करनेमें व्यस्त हैं, जबकि गोरखा गांवमें चीनके अतिक्रमणकी बातोंको वहांका शासन छुपा रहा है । गोरखाका रुई गांव, जो गोरखाके रुई भोटके अन्तर्गत आता है, अब चीनके स्वायत्त क्षेत्र तिब्बतके अधिकारमें आ गया है ।
इतिहासकार रमेश धुंगलका कहना है कि रुई और तेइगा गांव गोरखा जनपदके उत्तरी भागमें थे । धुंगलने कहा, “रुई गांव नेपालका भाग है । न तो नेपालने इसे युद्धमें खोया और न ही यह तिब्बतसे सम्बन्धित किसी विशेष अनुबन्धके अधीन था, राष्ट्रीय हितोंकी अनदेखीके कारण नेपालने रुई और तेघा दोनों गांव खो दिए । भारतकी सीमा सुलभ है । लोग इसके चारों ओर घूमते हैं; इसलिए भारतके साथ सीमा प्रकरण सभीको दिखाई दे रहे हैं; परन्तु उत्तरी सीमामें तिब्बतीसे लगे नेपालकी स्थिति अत्यन्त विकट है ।
समस्त विश्वको चीनकी अतिक्रमणकी नीतिका भान है । चीनने अपना वर्चस्व सिद्ध करनेके प्रयासमें नेपाल शासनको मूर्ख बनाकर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया । नेपालको अब यह समझना होगा कि केवल भारत ही उसकी स्वतन्त्रता एवं सम्प्रभुताकी रक्षा कर सकता है; अतः नेपालकी जनताने अब वहांके शासनके विरुद्ध मुखर होकर सामने आना चाहिए ! (२२.०६.२०२०)
लखनऊमें ‘टिकटाॅक वीडियो’में तिरंगा जलाते हुए जिहादियोंको पकडा गया
उत्तरप्रदेशकी राजधानी लखनऊके बाजारखाला थानाक्षेत्र स्थित टिकैतराय तालाबके पास रविवार, २१ जूनकी सन्ध्यामें ४ युवक तिरंगाको जलाते हुए ‘टिकटाॅक विडियो’ बना रहे थे, जिसका स्थानीय लोगोंने विरोध किया और एक युवकको पकड लिया और उसके अन्य ३ साथी भागनेमें सफल हुए । पुलिसने बताया कि राजाजीपुरम निवासी रविकांतने थानेमें परिवाद दिया कि टिकैतराय तालाबके पास वो साइकिल चला रहे थे, तभी उन्हें चार युवक तिरंगा जलाते हुए और देश विरोधी ‘नारे’ लगाते दिखे, जो अपना ‘वीडियो’ बना रहे थे ! उन्होंने युवकोंको रोका तो वे युवक मारपीट करने लगे और जब रविकांतने कोलाहल किया तो ‘पार्क’में घुमते कुछ युवा उनके पास आए तो सभी युवक भाग गए और एक युवकको पकड लिया गया, जिसे रविकांत बाजारखाला थाने लेकर आए, जहांपर पूछताछके समय वह अवयस्क निकला ।
यद्यपि किसी समाचार वाहिनीने उनका नाम नहीं बताया; परन्तु यह सर्वविदित है कि वे विशेष समुदायसे ही होंगे ! इस प्रकरणसे स्पष्ट होता है कि धर्मान्ध छोटा हो या बडा, वह न तो भयभीत है, न भटका है, वरन वह जिहादी है, जिसका उद्देश्य जिहाद है, जो उसे मस्जिदोंसे शिक्षामें मिला है; परन्तु दुःखद है कि हमारे जर्जर विधानका लाभ लेकर ये आतङ्की मानसिकताके युवक छूट जाएंगे और समाचारोंद्वारा इन्हें भटका हुआ बताया जाएगा, यही इस राष्ट्रकी दुर्गतिका कारण है । (२२.०६.२०२०)
हिन्दूद्रोही पत्रकार प्रशांतने पुनः किया देवी-देवताओंका अपमान
उत्तर प्रदेशके लखनऊमें पत्रकार प्रशांत कनोजियाने एक बार पुनः हिन्दू देवताओंपर निकृष्ट टिप्पणीकी है । प्रशांतने ‘ट्वीट’ करके देवताओंको जूते मारनेकी बात लिखी है, जिसमें उसने एक बच्चीके शवको माध्यम बनाया है । जम्मूमें आसिफासे हुए सामूहिक दुष्कर्मके प्रकरणमें उसने कहा कि जिस मन्दिरमें आसिफासे दुष्कर्म हुआ, उस मन्दिरके भगवानकी मूर्तिको मार्गके मध्यमें रखकर जूतेसे मारना चाहिए और ‘गटर’में विसर्जित कर देना चाहिए ।
प्रशान्तपर ‘एफआईआर’ होनेकी चेतावनीसे उसने ‘ट्वीट’ हटा दिया है; परन्तु उसने क्षमा नहीं मांगी है ।
हिन्दूद्रोही प्रशान्त देवी-देवताओंपर ऐसी ओछी टिप्पणी करके अपने संस्कारोंका ही परिचय दे रहा है । यदि हिन्दू माता-पिता अपने बालकोंको धर्मके लेश मात्र भी संस्कार देते तो कोई इस प्रकार आतङ्कियोंकी भाषा नहीं बोलता ! यह कैसी अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रता है, जो हिन्दू बहुल देशमें धर्मपर आघात करनेवाले ‘ट्विट’ हटाकर निकल लेते हैं ! प्रशांत सदृश निकृष्ट लोगोंका भारतमें रहना हिन्दूकी क्षात्रहीनताका प्रतीक हैं ! (२२.०६.२०२०)
‘जैश-ए-मोहम्मद’के आतङ्की देहलीमें घुसे, राजधानीकी सभी सीमाएं प्रतिबन्धित
देहलीमें ‘जैश-ए-मोहम्मद’के चारसे पांच आतङ्की प्रवेश कर गए हैं । ऐसे समाचार प्राप्त होनेके पश्चात देहलीमें सतर्कता बढा दी गई है । ये कोई बडा आक्रमण कर सकते हैं । नगरकी सभी सीमाएं प्रतिबन्धित करके शोध अभियान चल रहा है । बस स्थानक (स्टैंड), रेलवे स्टेशन तथा विपणियोंमें (बाजारोंमें) सुरक्षा बढा दी गई है ।
ज्ञात हुआ है कि आतङ्की ट्रकसे देहली आए हैं ।
पाकिस्तान द्वारा भारतकी शान्ति व्यवस्था भङ्ग करनेके उद्देश्यसे सदैव आतङ्की भेजे जाते रहे हैं; परन्तु यह विचार करनेकी बात है कि बिना स्थानीय आश्रयके वे प्रवेश नहीं कर सकते हैं और इन्हें आश्रय कौन देते हैं ?, ये हमें आए दिन मस्जिदों, मदरसों और मौलवियोंपर आनेवाले समाचार बताते ही हैं तो हिन्दुओ, अभी भी ‘भाईचारा’ बना रहेगा या समय रहते कुछ नेत्रके पट खुलेंगे ? देशका विचार तो जाने देते हैं, एक बार स्वयंके परिजनकी ओर देखकर ही इसपर विचार करें !
केन्द्र शासनके हस्तक्षेपके पश्चात भगवान जगन्नाथकी रथ यात्राको मिली अनुमति
भगवान श्रीजगन्नाथ रथयात्राको लेकर उच्चतम न्यायालयमें सुनवाईके मध्य केन्द्र शासनकी ओरसे महाधिवक्ता (सॉलिसिटर जनरल) तुषार मेहताने कहा कि यदि भगवान जगन्नाथको बाहर नहीं लाया गया तो परम्पराके अनुसार अगले १२ वर्षोंतक उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सकता है और हम शताब्दियों पुरानी इस परम्परा नहीं तोड सकते । यह करोडों लोगोंकी आस्थासे जुडा प्रकरण है । सेबायत और पंडा, जो जांचमें संक्रमित नहीं हैं, वे श्रीशंकराचार्यजीके निर्णयके अनुरूप अनुष्ठानोंमें भाग ले सकते हैं । लोग एकत्र न हों और वे सीधे प्रसारणके मध्य दूरदर्शन वाहिनियोंपर (टीवीपर) दर्शन कर सकते हैं । पुरीके राजा और मन्दिर समिति इन अनुष्ठानोंके प्रबन्धोंका पर्यवेक्षण कर सकती है । आवश्यकता पडनेपर निषेधाज्ञा (कर्फ्यू) भी लगाई जा सकती है ।
इसपर न्यायालयने भारत शासनके तर्कोंको मानते हुए कुछ आवश्यक प्रतिबन्धनोंके साथ यात्राको अनुमति दे दी है ।
कल्पना कीजिए यदि आज भारतमें किसी अन्य दलका शासन होता तो क्या वह न्यायालयमें यह पक्ष रखता ! इसका अर्थ यह नहीं है कि केन्द्र शासन हिन्दूवादी शासन है; अपितु इससे यह सिद्ध होता है कि जाग्रत होते हिन्दूसे भयभीत होना सभीकी विवशता है । आज कुछ हिन्दू ही अपने स्वर मुखरित कर रहे हैं तो ये परिणाम मिल रहे हैं । जिस दिन अधिकांश हिन्दू संघर्षके लिए सिद्ध हो जाएंगे, उस दिन किसी हिन्दूविरोधीका हिन्दूद्रोह करनेका दुस्साहस नहीं होगा; अतः हिन्दुओ ! जागो और जगाओ !
Leave a Reply