देव स्तुति
जयचन्द्रदिवाकरनेत्रधरेजय पावकभूषितवक्त्रवरे ।
जय भैरवदेहनिलीनपरे जय अन्धकदैत्यविशोषकरे ।।
अर्थ : हे सूर्य-चन्द्रमारूपी नेत्रोंको धारण करनेवाली देवी, तुम्हारी जय हो ! हे अग्निके समान देदीप्यमान मुखसे शोभित होनेवाली देवी, तुम्हारी जय हो । हे भैरव शरीरमें लीन रहनेवाली और अन्धकासुरका शोषण करनेवाली देवी, तुम्हारी जय हो, जय हो !
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