घरका वैद्य – स्वर चिकित्सा (भाग-६)
* चन्द्र और सूर्य स्वरोंका सही अभ्यास करनेवाले साधकको भविष्य ज्ञानकी अनुभूति होने लगती है । क्रोध एवं कामको प्रेम एवं ब्रह्मचर्यमें रूपान्तरण करनेकी क्षमता प्राप्त होने लगती है । भविष्यमें होनेवाली घटनाओंका उसे पूर्वाभ्यास होने लग सकता है ।
* यदि किसी व्यक्तिका अकेला चन्द्र स्वर ही दिन-रात चलता है तो उस व्यक्तिकी मृत्यु अधिकतम तीन वर्षमें आशङ्कित होती है ।
* यदि किसी व्यक्तिका दिनभर सूर्य स्वर और रातभर चन्द्र स्वर चले तो उसकी मृत्यु लगभग छह मासके भीतर आशङ्कित होती है ।
* यदि सुषुम्ना स्वर सहज रूपसे दो घण्टेतक सतत चले तो व्यक्तिकी मृत्यु २४ घण्टेके भीतर हो सकती है ।
स्वर योग जीवन जीनेकी कला है । स्वरसे ही राशि-नक्षत्रों एवं तिथि-लगन, मुहूर्तका सम्बन्ध होता है । अनुभवी स्वर योगी बिना ज्योतिषशास्त्र किसी भी व्यक्तिका भविष्यमें सम्भावित शुभाशुभ बता सकता है । स्वयंके रोगके साथ-साथ दूसरे रोगीका भी उपचार कर सकता है । भूत-प्रेत बाधाओंका निवारण भी सरलतासे कर सकता है । आधुनिक वैज्ञानिकोंसे अपेक्षा है कि स्वर योगपर शोध करें, इस हेतु आवश्यक स्वर मापक यन्त्रोंका निर्माण करें, जिससे जनसाधारण आत्म-विश्वासपूर्वक स्वर ज्ञानका उपयोगकर अपने जीवनको सुखी बना सकें ।
जिज्ञासु व्यक्ति अनुभवी स्वर साधकसे स्वरोदय विज्ञानका अवश्य गहन अध्ययन करे; क्योंकि स्वर विज्ञानसे न केवल रोगोंसे ही बचा जा सकता है; अपितु प्रकृतिके अदृष्य रहस्योंका भी पता लगाया जा सकता है । मानव देहमें स्वरोदय एक ऐसी आश्चर्यजनक, सरल, स्वावलम्बी, प्रभावशाली, बिना किसी व्ययवाली चमत्कारी विद्या होती है, जिसका ज्ञान और सम्यक पालन होनेपर किसी भी सांसारिक कार्यमें असफलताकी प्रायः आशंका नहीं रहती । स्वर विज्ञानके अनुसार, इस शास्त्रके अभ्यासकद्वारा साक्षात्कारमें सफलता, भविष्यमें घटित होनेवाली घटनाओंका पूर्वानुमान, सामनेवाले व्यक्तिके अन्तरभावोंको सहजतासे समझा जा सकता है, जिससे प्रतिदिन उपस्थित होनेवाली प्रतिकूल परिस्थितियोंसे सहज बचा जा सकता है । अज्ञानवश स्वरोदयकी जानकारीके अभावसे ही हम हमारी क्षमताओंसे अनभिज्ञ होते हैं । रोगी बनते हैं तथा अपने कार्योंमें असफल होते हैं । स्वरोदय विज्ञान प्रत्यक्ष फलदायक है, जिसको ठीक-ठीक लिपिबद्ध करना सम्भव नहीं ।
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