घरका वैद्य – रस चिकित्सा (भाग-३)
कुछ रोग और उनके लिए विशिष्ट रस
मधुमेह (डायबिटीज) : लौकीका रस पिएं ! थोडा पानी, ‘काला नमक’, काली मिर्च और तुलसीके पत्ते भी इसमें डालें ! बनानेके उपरान्त तुरंत पिएं ! प्रशीतकमें (फ्रिजमें) न रखें !
सिरकी वेदना : प्रातः तरबूजका रस निकालकर उसमें ‘काला नमक’ डालकर पीनेसे स्थायी लाभ होता है ।
रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) : करेलेके साथ टमाटर और खीरेका रस पिएं ! रस बनानेके पश्चात उसे छान लें और नींबूका रस और लवण (नमक) मिलाकर तुरन्त पिएं ! तरबूजका रस भी हृदय रोगमें लाभकारी है ।
वृक्कमें (गुर्देमें) पथरी : इस रोगमें तरबूजके रसका सेवन करनेसे बहुत लाभ मिलता है । यह आंतोंकी स्वच्छता करता है तथा मुखपर चमक भी लाता है । खीरेका रस भी पथरीको बाहर निकलनेमें सहायक है ।
घावको शीघ्र भरनेके लिए : बन्दगोभीका रस घावको शीघ्र भरता है ।
बालों और त्वचाके लिए : आंवलेका रस पिएं ! इसके सेवनसे मुखपर कान्ति आती है । झुर्रियां शीघ्र नहीं पडतीं तथा बाल काले रहते हैं । खीरेके रसका प्रातःकालमें सेवन भी त्वचाको चमकदार बनाता है ।
अपच : सवेरेके समय खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानीमें एक नींबूका रस लें ! भोजनके समयसे आधा घण्टा पहले एक चम्मच अदरकका रस पिएं ! पपीता, अनानास, ककडी और गोभीका रस अथवा गाजर, चुकन्दर और पालकके रसको मिलाकर उनका सेवन करें !
रुधीरकणोंकी अल्पता (एनीमिया) : चुकन्दरका रस पिएं ! इसमें लौह तत्त्व (आयरन) भरपूर मात्रामें मिलता है ।
शीतप्रकोप (सर्दी-जुकाम) : टमाटरका ‘सूप’ गरम-गरम पिएं ! इसमें अदरक, लहसुन और कन्द (प्याज) भी डाला जा सकता है ।
पीलिया : करेले, गन्ने, चुकन्दरका रस पिएं !
गठिया : सेबका रस पिएं ! ‘प्याज’के रसको सरसोंके तेलमें मिलाकर जोडोंपर दो महीनेतक सतत मर्दन (मालिश) करनेसे भी आमवात, जोडोंकी वेदनामें लाभ मिलता है ।
अपस्मार (मिर्गी) : गाजर, अंगूरका रस पिएं !
‘दाद-खाज’ : अनानास और खरबूजेका रस पिएं !
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