घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – कपालभाति प्राणायाम (भाग-४)


कपालभाति प्राणायामके कुछ अन्य लाभ व सावधानियां 
* समयसे पहले बालोंका पकना या बालोंका अधिक झड जाना, आवश्यकतासे अधिक निद्रा आना या अनिद्रा अथवा अल्प नींद आना इत्यादि, इन सभी समस्याओंको कपालभाति योगके द्वारा जडसे उखाडा जा सकता है ।
* कानोंसे न्यून (कम) सुनाई देना, अपस्मार (मिर्गी), नाकके अन्दर फोडे होना आदि समस्याएं भी कपालभाति प्राणायामसे दूर हो जाती हैं । आंखोंके विकार दूर करनेमें भी कपालभाति उपयोगी है ।
सावधानियां :
* कटिशूलके (कमर दर्दके) रोगीको कपालभाति करनेसे पहले चिकित्सकका परामर्श लेना चाहिए ।
* हृदय रोगी व्यक्तिको भी अपने मनसे कपालभाति करनेपर हानि हो सकती है । ‘पीलिया’के रोगीको भी कपालभाति करनेपर गम्भीर समस्या हो सकती है ।
* पित्त वायुके रोगीको कपालभाति करनेपर समस्या बढ सकती है । ग्रीष्मकालमें कपालभाति पांच मिनट करना ही अच्छा होता है । यदि अधिक कालके लिए इस प्राणायामको ग्रीष्मकालमें करते हैं तो इसके साथ ही शीतली प्राणायाम भी करना चाहिए ।
* अधिक तनावग्रस्त व्यक्ति कपालभाति न करें ! मनको शान्त करनेके पश्चात ही इस प्राणायामको करें !
* मलत्यागसे पूर्व कपालभाति प्राणायाम नहीं करना चाहिए । भोजनके तुरन्त पश्चात भी कपालभाति प्राणायाम हानिकारक हो सकता है ।
* उच्च रक्तचापके रोगीको यह अभ्यास अधिक गतिसे नहीं करना चाहिए ।


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