घरका वैद्य – प्राणायाम चिकित्सा – उद्गीथ प्राणायाम (भाग-२)


उद्गीथ प्राणायामकी समय सीमा
उद्गीथ प्राणायाममें श्वास शरीरके भीतर लेनेका समय तीनसे पांच ‘सेकेण्ड’का रखें !
★ “ॐ”के जपके साथ जब श्वास बाहर छोडें, तब उसका समय पन्द्रहसे बीस ‘सेकेण्ड’तक, अपनी शक्ति अनुसार खींचनेका प्रयास करें ! (ध्यान रहे, अपने शरीरकी मर्यादामें रहकर ही बल लगाएं !)
★ एक सामान्य व्यक्ति उद्गीथ प्राणायाम अभ्यासको प्रतिदिन सात बारतक कर सकता है । सात बार उद्गीथ प्राणायाम करनेमें तीन-चार मिनिटका समय लगता है ।
★ प्राणायामके प्रत्येक प्रकारमें श्वास लेने और श्वास बाहर छोडनेकी गतिका अत्यधिक महत्त्व है । उद्गीथ प्राणायाममें न ही अति तीव्र गतिसे श्वास लेनी है, न ही अति धीमी गतिसे श्वास लेनी है, इस प्राणायाममें अपने आसपास सकारात्मक ऊर्जा अनुभव करते हुए सामान्य गतिसे श्वास भीतर लेनी है ।
★ अभ्यास बढ जानेपर इस प्राणायामको १०-२० बार अर्थात पांचसे दस मिनिटतक किया जा सकता है । विकट रोगोंसे ग्रसित व्यक्ति उद्गीथ प्राणायामको योग चिकित्सकका परामर्श लेकर १० मिनिटसे अधिक भी कर सकते हैं ।
उद्गीथ प्राणायामके लाभ :
★ सकारात्मकता बढती है और मन प्रसन्नचित्त हो जाता है ।
★ स्मरण शक्ति बढानेके लिए उद्गीथ प्राणायाम एक उत्तम अभ्यास है । क्रोधपर नियन्त्रण करनेके लिए भी यह प्राणायाम उपयोगी है । उद्गीथ प्राणायामसे एकाग्रता और सङ्कल्प शक्ति बढती है ।
★ मानसिक तनाव, व्याधि, चिन्ता और भय लगने जैसी सारी समस्याएं उद्गीथ प्राणायामका अभ्यास करनेसे दूर हो जाती हैं । नींद न आना, नींद अल्प आना, एकाएक नींद भंग होना, नींदमें भयानक स्वप्न आना आदि समस्याएं दूर करनेके लिए भी उद्गीथ प्राणायामका अभ्यास उत्तम है ।



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