घरका वैद्य – मर्दन (मालिश) चिकित्सा (भाग-३)


प्रत्येक ‘मालिश’के पश्चात यदि रोगी न्यूनतम आधे घण्टेतक वस्त्र ओढकर विश्रामकर ले तो इससे विशेष लाभ होता है । नित्यकी ‘मालिश’से भूख खुल जाती है, नींद अच्छी आने लगती है, त्वचा कोमल, लचीली और चमकीली हो जाती है । शरीरका रंग खुल जाता है ।
शुष्क घर्षण स्नान : शुष्क घर्षण स्नान और कुछ नहीं, मात्र सारे शरीरकी साधारण सूखी ‘मालिश’ है । इसके लाभ अनेक हैं । त्वचाको स्वच्छ, सुन्दर एवं स्वस्थ रखनेके हेतु अङ्ग-प्रत्यङ्गकी सूखी ‘मालिश’ करनी चाहिए । इससे न केवल त्वचाका; अपितु सारे शरीरका व्यायाम हो जाता है और त्वचाके लिए इससे बढकर और कोई व्यायाम है ही नहीं । इस क्रियासे रक्तकी गतिमें वेग उत्पन्न होकर, रक्त शुद्ध और मलरहित हो जाता है । मल्लयोद्धा (पहलवान) व्यायाम कर लेनेके पश्चात सारे शरीरकी सूखी ‘मालिश’ करते-करवाते हैं और उससे ‘मालिश’का शत-प्रतिशत लाभ उठाते हैं । सूखी ‘मालिश’ किसी दूसरेसे न करवाकर, यदि अपने ही हाथोंसे की जाए तो दोगुणा लाभ प्राप्त होता है । शुष्क घर्षणस्नानके लिए अपनी हथेलीसे शरीरके अङ्ग-प्रत्यङ्गको सिरसे पांवतक भलीभांति और द्रुत गतिसे इतना रगडना चाहिए कि समूचे शरीरमें लालिमा आ जाए । जांघ और टांगोंको रगडते समय घुटनोंको सीधा और तना रखना चाहिए । इससे रीढ, पेट तथा समस्त स्नायुमण्डलका हलका व्यायाम हो जाएगा । इस क्रियासे रक्त अधिकसे अधिक मात्रामें शरीरके ऊपरी भागकी ओर आकर शिराओंमें फैलता है, जिससे उन शिराओंका भी व्यायाम हो जाता है । साथ ही त्वचाके असङ्ख्य रोमकूप पूर्णरूपेण खुल जाते हैं; जिसके फलस्वरूप स्वेदद्वारा शरीरका मल निकालनेका कार्य उत्तम रीतिसे होने लगता है । रक्तका प्रवाह, त्वचामें अधिक होनेसे यह स्वाभाविक है कि त्वचा निर्विकार होकर यथेष्ट पुष्ट एवं स्वस्थ हो जाए ।



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