घरका वैद्य – सम्मोहन चिकित्सा (हिप्नोटिस्म) (भाग-२)


सम्मोहनके माध्यमसे क्या कुछ हो सकता है : जैसाकि पहले कहा गया है कि सम्मोहनके मध्य व्यक्ति सम्मोहनकर्ताकी सभी आज्ञाओंका पालन करता है; किन्तु एक वर्ग यह भी कहता है कि यदि कोई आज्ञा सम्मोहित व्यक्तिके विश्वासोंके अनुसार अनैतिक या अनुचित है तो वह उसका पालन नहीं करता है और सम्मोहनसे बाहर आ जाता है ।
    सम्मोहनकर्ता यदि कहता है कि एक और एक तीन होते हैं तो सम्मोहित व्यक्ति इसे मान लेता है । यदि उसे कहा जाता है कि वह कोई चारपाया पशु है तो सम्मोहित व्यक्ति हाथों और घुटनोंके बल चल सकता है । सम्मोहित व्यक्तिको भ्रमका भी ‘शिकार’ बनाया जा सकता है । यदि सम्मोहनके मध्य उसे यह सुझाव दिया जाता है कि जिस आसन्दीपर (कुर्सीपर) वह बैठा है, वह वहां है ही नहीं तो सम्मोहित व्यक्ति भूमिपर लुढक सकता है । सम्मोहनकर्ताके सुझावपर सम्मोहित व्यक्तिके शरीरका कोई भाग संवेदनहीन हो सकता है । बिना पीडा हुए उस अङ्गकी शल्यक्रिया (ऑपरेशन) की जा सकती है ।
इसके विपरीत कोई अङ्ग या इन्द्रियोंपर, बहुत अधिक सम्मोहनके मध्य की गई बातें, व्यक्ति भूल जाता है; किन्तु उसके पश्चात भी कुछ समयतक वह सम्मोहनकर्ताकी आज्ञाका पालन कर सकता है । यदि सम्मोहनकर्ता उससे कहता है कि अमुक कार्य पांच मिनट पश्चात करना तो वह वैसा ही करता है ।
आत्मसम्मोहनसे मिलता है स्वस्थ शरीर और मन
   आत्मसम्मोहनसे भी स्वस्थ और प्रसन्न रहा जा सकता है । सम्मोहनमें जिस प्रकार सम्मोहनकर्ता किसी व्यक्तिको प्रेरणा या सुझाव देता है, इसी प्रकार आत्मसम्मोहनमें स्वयंको प्रेरणा या सुझाव दिए जाते हैं । इसके अन्तर्गत आत्मचिन्तन किया जाता है और नियमित रूपसे स्वयंको सकारात्मक विचारोंका पोषण दिया जाता है । विशेष रूपमें यह स्वयंके भीतर झांकनेकी प्रक्रिया है । आत्मचिन्तनकी प्रक्रिया है । प्रतिदिन आत्मसम्मोहनके अभ्याससे नकारात्मक भावनाओंको या स्वभावदोषोंको दूर किया जा सकता है और शरीर व मनको प्रसन्न रखा जा सकता है । आत्मसम्मोहन विधिको किसी सम्मोहन चिकित्सकसे ही सीखा जा सकता  है ।  विश्वमें सम्मोहनके माध्यमसे बिना पीडा हुए शल्यक्रिया (ऑपरेशन) करनेके प्रकरण भी सामने आए हैं ।


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