जिस अमान हयात खानको विनय गुप्तने दी चाकरी, उसीने हिन्दू प्रेमिकाको धन देनेके लिए की पत्नी सहित विनयकी हत्या


५ नवम्बर, २०२०

‘देहली एनसीआर’ ग्रेटर नोएडामें मंगलवार, ३ नवम्बरकी देर रात्रि एक विनय गुप्त नामक व्यापारी और उनकी पत्नी नेहाकी हत्या सुनियोजित ढंगसे की गई । आरोपीका अभिज्ञान (पहचान) अमान हयात खानके रूपमें किया गया है ।

       पुलिसको जांचमें ज्ञात हुआ है कि आरोपी सभीको अपना नाम अमन बताता था; परन्तु उसके हाथमें हयात गुदा हुआ था । आशङ्का प्रकट की जा रही है कि अमनका पूरा नाम अमान हयात खान था और वर्तनी (स्पेलिंग) एक जैसी होनेके कारण वह अमान नामको ही अमनकी भांति प्रयोग करने लगा था ।

     पुलिसने ‘सीसीटीवी फुटेज’में रातके १२.१५ बजे उसे सदनिकातक (फ्लैट) आते और घटनाके पश्चात हाथमें विनयकी ‘दुकान/मार्ट’का थैला लेकर जाते देखा । इसी अमानने धनके लालचमें ‘मार्ट’के मालिक विनय गुप्तको मारनेकी योजना बनाई और मारनेसे कुछ दिवस पूर्व ही अवकाश लेकर अपना भ्रमणभाष (मोबाइल) बन्द कर दिया । इसके पश्चात ‘ग्रेनो वेस्ट’की ‘हाई सेक्योरिटी’से ‘लैस’ ‘टेकजोन-५ चेरी काउंटी सोसायटी’ निवासी विनयके आवास पहुंचा और अवसर पाते ही उनपर प्रहार किया । अन्य कर्मचारियोंने बताया कि अमान अपने ‘स्टॉल’से वस्त्र विक्रयके रुपयोंमें धोखाधडी करता था । उसने कुछ दिवससे रूग्ण होनेका कहकर अवकाश ले लिया था । जब हत्याका प्रकरण उजागर हुआ, तभी यह भी उजागर हुआ ‌।

      ‘डीसीपी’ने बताया कि अमनकी एक अव्यस्क युवतीसे मित्रताकी भी बात सामने आई है, जिसके व्यय पूरे करनेके लिए ही अमन ‘ग्रॉसरी स्टोर’में कार्य करता था । अपनी प्रेमिकाका व्यय पूरे करने व अपने ‘शौक’ पूरे करनेके लिए कभी-कभी वह ‘ग्रॉसरी स्टोर’में रखे सामानको भी चोरी कर लेता था । ‘डीसीपी’ हरिश्चंद्रने बताया कि अमन हयात खान और पासकी एक ‘सोसाइटी’ निवासी १५ वर्षीय बालिकाके पिता सौरभको शुक्रवार प्रातः गैलेक्सी वेगा चौराहेसे बन्दी बना लिया गया है । सौरभके परिवारकी अमान आर्थिक सहायता भी करता रहता था ।

भारत हो या विश्वका कोई अन्य देश, जिहादी रक्त बहा रहे हैं नाम परिवर्तितकर लूटपाट व हत्याएं करते हैं । जब विनयने उसके हाथपर हयात लिखा देखा, तो उसने सतर्कता दिखाते हुए जिहादीको कार्यपर न रखा होता, तो वह जीवित होता । हो सलकता है, विनयको ज्ञात भी हो और उसने अपनी धर्मनिरपेक्षताके कारण उसे रखे रखा हो । साथ ही जिहादी सौरभकी पुत्रीका जीवन भी नष्ट कर रहा था, तो यह सभी हिन्दुओंके लिए एक सीख है  । मरना है या जिहादियोंको कार्यपर रखना है, इसका निर्णय स्वयं लें ! सम्पादक : वैदिक उपसाना पीठ

स्रोत : ऑप इण्डिया



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