पादरीके समक्ष ईसाई लडकी और मुसलमान लडकेका विवाह, क्रोधित चर्च, पादरीने की क्षमा याचना 


२५ नवंबर, २०२०
        केरलके एक गिरिजाघरमें ९ नवम्बरको हुए एक विवाहका छायाचित्र समाचार पत्रमें प्रकाशित हो गया । यह विवाह दो ईसाइयोंके मध्य नहीं था; वरन एक ईसाई लडकीका मुसलमान लडकेसे विवाह था । यह देखकर गिरिजाघरके उच्च पदस्थ जनोंने इसपर आपत्ति प्रकट की ।
     केरलके ‘सिरो मालाबार’ गिरिजाघरने इस विवाहपर आपत्ति प्रकट की । कोच्चि स्थित ‘कदवंथरा सेन्ट जोसेफ गिरिजाघर’में यह विवाह सम्पन्न हुआ था । सिरोके मालाबार गिरिजाघर अनुसार, इसमें  ‘कैनन’ विधान (ऐसा विधान, जो गिरिजेके कार्यको (मिशन) पूर्ण करता है), उसका पालन इस विवाहमें नहीं किया गया ।
     इस विवाहमें सतनाके पूर्व ‘बिशप’ मार मैथ्यू वानीकिजक्केल सम्मिलित हुए थे । ‘बिशप’के संग विवाहित जोडेका छायाचित्र ही आन्दोलनका कारण बना । इस विवाहकी घोर भर्तस्ना हुई । कोच्चिके ‘कदवंथरा सेन्ट जोसेफ गिरिजाघर’में जिस पादरीने यह विवाह करवाया, उससे तथा विवाहमें उपस्थित अन्य एक पादरीसे प्रश्न पूछे गए । सिरो
मालाबार गिरिजाघरके अनुसार, मुसलमान लडके और ईसाई लडकीका आपसमें विवाह ‘कैनन विधान’का हनन था ।
    ‘बिशप’ मार मैथ्यूने अपनी चूक स्वीकार करते हुए क्षमा याचना की है । इसके उपरान्त ‘कार्डिनल’ मार जॉर्ज एलेनचेरीने इसपर जांचका आदेश दिया । केरलकी ‘कैथोलिक बिशप काउंसिल’ने दोनों पादरियोंपर (एक जिसने विवाह करवाया व दूसरा जो वहां उपस्थित रहा) ‘कैनन’ विधानके हननका आरोप लगाया है ।
        केरलके ‘कैथोलिक’ पादरियोंके सङ्गठनने कहा कि ‘लव जिहाद’ एक वास्तविक समस्या है । केरलके गिरजाघरने इसके पीछे ‘आईएसआईएस’का हाथ बताते हुए कहा था कि लवजिहादद्वारा अनेक महिलाओंका धर्मान्तरण हो रहा है । इसके उत्तरमें ‘पीएफआई’ जैसे मुसलमान सङ्गठनोंने पादरियोंको मौन रहनेको कहा था; क्योंकि उनका विचार था कि इससे ‘सीएए’के विरोधमें हो रहे उपद्रवमें न्यूनता आ जाएगी ।
       केरलके गिरजाघरका मत है कि कुछ माह पूर्व २१ जनोंको ‘आईएसआईएस’में भर्ती करवाया गया, जिनमें आधे ईसाई सम्प्रदायके थे । पादरियोंका मत था कि ‘लवजिहाद’ साम्प्रदायिक सद्भावको ठेस पहुंचता है । उनका केरल पुलिस प्रशासनपर यह भी आरोप था कि प्रशासन ऐसी घटनाओंके प्रति गम्भीर नहीं है ।
      ‘लव जिहाद’ व धर्मान्तरण एक गम्भीर समस्या है । सभी राज्योंको इसके प्रति संवेदनशील होकर विधान गठित करने चाहिए; परन्तु गिरिजाघर और पादरी इसपर क्यों चिन्तित हो रहे हैं; क्योंकि वे तो स्वयं अवैध कार्यों व अवैध धनसे हिन्दुओंका धर्मान्तरण कर रहे हैं ! – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया


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